नई दिल्ली (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। वॉटर क्वालिटी इंडिया एसोसिएशन (WQIA) ने केंद्र के राजस्व सचिव को चिट्ठी लिखकर कहा है कि वॉटर प्यूरीफायर, फ़िल्टर और उनसे जुड़ी सेवाओं पर GST 18% की जगह 5% किया जाए। वजह साफ है – जेब पर कम बोझ और लोगों के सेहत की सुरक्षा।
23 अगस्त 2025 की अपनी चिट्ठी में WQIA (जो पीने के पानी के सिस्टम बनाने और बेचने वाली कंपनियों का उद्योग संघ है) ने कहा कि साफ पीने का पानी “लक्ज़री” नहीं, ज़रूरत है। 18% टैक्स की वजह से प्यूरीफायर उसी टैक्स स्लैब में आ जाते हैं जिसमें AC और कारें हैं, जबकि प्यूरीफायर तो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी हैं।
एसोसिएशन ने देश में पानी की गुणवत्ता की दिक्कतें भी याद दिलाईं। सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड की 2024 रिपोर्ट के मुताबिक कई इलाकों में फ्लोराइड, आर्सेनिक, नाइट्रेट और भारी धातुओं की मिलावट पाई गई है। जिससे जलजनित बीमारियाँ बढ़ती हैं। WHO और यूनिसेफ का कहना है कि विकासशील देशों में करीब 80% बीमारियाँ ऐसे ही संक्रमणों से जुड़ी होती हैं।
खतरा इतना बड़ा है, फिर भी भारत के घरों में इलेक्ट्रिक वॉटर प्यूरीफायर की पहुँच सिर्फ़ करीब 6% है, जबकि दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में यह ~20% तक है। WQIA का तर्क है कि ऊँचा GST प्यूरीफायर को लोअर और मिडिल-इनकम परिवारों के लिए महँगा बना देता है, इसलिए अपनाने की रफ़्तार धीमी है। उन्होंने यह भी बताया कि 20-लीटर पानी के जार—जो कम टिकाऊ विकल्प हैं—पर अभी 12% टैक्स है और GST सुधार के बाद इसे 5% तक लाया जा सकता है। ऐसे में प्यूरीफायर पर 18% रखना नीति में गड़बड़ी लगेगी।
पर्यावरण की दृष्टि से भी बात रखी गई
एक प्यूरीफायर साल में लगभग 12,000 प्लास्टिक बोतलों की ज़रूरत घटा सकता है और पानी उबालने में LPG की खपत भी कम होती है। इंडस्ट्री का साइज फिलहाल लगभग ₹4,400 करोड़ है, इसलिए GST घटाने से सरकार के राजस्व पर असर बहुत बड़ा नहीं होगा, WQIA का कहना है।
कन्फेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्री (CII) ने भी ऐसी ही मांग रखी है। उनका कहना है कि प्यूरीफायर पर तर्कसंगत GST दरें सरकार के “हर घर जल”, “आयुष्मान भारत” और “स्वच्छ भारत” जैसे लक्ष्यों के अनुरूप होंगी और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को बढ़ावा देंगी।
टैक्स विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि अगर 12% और 28% स्लैब मिलाने की योजना आगे बढ़ी और जुड़े सामानों की दरें आपस में मैच नहीं हुईं, तो गड़बड़ी होगी। एक वैश्विक सलाहकार फर्म के सीनियर कंसल्टेंट ने कहा, “अगर पानी के बड़े कैन/ जार 5% पर चले जाएँ और प्यूरीफायर 18% पर ही रहें, तो यह GST सुधार की भावना के खिलाफ होगा।”
उम्मीद है कि GST काउंसिल अपनी अगली बैठक में स्लैब सुधार पर यह मुद्दा भी उठाएगी।