लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। वर्ष 1930 में आईआईएससी बेंगलुरु में स्थापित सोसाइटी ऑफ बायोलोजिकल केमिस्ट्स (इंडिया) की 95वीं वार्षिक बैठक का शुभारंभ लखनऊ स्थित सीएसआईआर–केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान में हुआ। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में 56 से अधिक संस्थानों के 400 से अधिक प्रख्यात वैज्ञानिक, शोधकर्ता एवं विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। सम्मेलन का उद्देश्य जैविक रसायन विज्ञान और जैव-चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में नवीनतम प्रगति पर विचार-विमर्श करना तथा वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देना है।

उद्घाटन सत्र में सीएसआईआर-सीडीआरआई की निदेशक डॉ. राधा रंगराजन ने सभी गणमान्य अतिथियों, आमंत्रित वक्ताओं, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने जैविक विज्ञान की प्रगति और मानव स्वास्थ्य से जुड़ी उभरती चुनौतियों के समाधान के लिए वैज्ञानिक सहयोग, अंतर्विषयक अनुसंधान तथा ज्ञान के आदान-प्रदान के महत्त्व पर प्रकाश डाला।
इसके पश्चात प्रो. दीपांकर नंदी ने अध्यक्षीय संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने सम्मेलन के दौरान होने वाले वैज्ञानिक विमर्श और विचार-विनिमय की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की।सम्मेलन के वैज्ञानिक सत्रों में प्रख्यात वैज्ञानिकों ने जैव-चिकित्सा अनुसंधान के विभिन्न समकालीन विषयों पर व्याख्यान दिए।
भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के प्रो. राघवन वरदराजन ने “श्वसन विषाणुओं के विरुद्ध प्रभावी वैक्सीन का विकास” विषय पर पूर्ण सत्र व्याख्यान (प्लेनरी लेक्चर) दिया। उन्होंने श्वसन संबंधी विषाणु संक्रमणों के विरुद्ध प्रभावी वैक्सीन विकसित करने के वैज्ञानिक दृष्टिकोणों पर चर्चा की। उन्होंने संक्रामक रोगों से निपटने में वैक्सीन अनुसंधान एवं विकास में हो रही प्रगति के महत्त्व को रेखांकित किया।
प्रो. संध्या एस. विश्वेश्वरैया ने प्रथम डॉ. कमला सोहोनी स्मृति व्याख्यान पुरस्कार के अंतर्गत “मौलिक 3Gs: आंत की प्रतिक्रियाएं, आंत की सहज प्रवृत्तियां और cGMP” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने आंत संबंधी जीवविज्ञान के मूलभूत पहलुओं तथा इससे जुड़ी आणविक प्रक्रियाओं पर प्रकाश डाला। साथ ही, शारीरिक प्रक्रियाओं को समझने में जैविक संकेत-प्रणालियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
प्रो. कौस्तुभ सान्याल ने “कवकरोधी औषधियों के प्रति प्रतिरोध का उभरता खतरा: केंडिडा औरिस (Candida auris) द्वारा अपनाई गई नवीन रणनीतियां” विषय पर प्रो. आई.एस. भाटिया पुरस्कार व्याख्यान दिया। उन्होंने कवकरोधी औषधियों के प्रति बढ़ते प्रतिरोध की चुनौती पर चर्चा करते हुए Candida auris नामक उभरते कवक रोगजनक द्वारा अपनाए जाने वाले अनुकूलन तंत्रों एवं रणनीतियों की जानकारी दी। यह कवक वैश्विक स्वास्थ्य के लिए एक महत्त्वपूर्ण चुनौती बनकर उभरा है।
इम्यूनोस्क्रिप्ट लाइफ साइंस के डॉ. संजय सिंह ने “एमआरएनए वैक्सीन क्रांति: प्लेटफॉर्म प्रौद्योगिकियों के मूल सिद्धांत, सुरक्षा और नियामक प्रक्रियाएं” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने एमआरएनए वैक्सीन प्रौद्योगिकी के मूलभूत सिद्धांतों, सुरक्षा संबंधी प्रमुख पहलुओं तथा इन नवीन वैक्सीन प्लेटफॉर्म के विकास एवं अनुप्रयोग से संबंधित नियामक प्रक्रियाओं पर प्रकाश डाला। डॉ. संजय सिंह ने भविष्य में महामारी की तैयारियों और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए एमआरएनए वैक्सीन प्रौद्योगिकी की क्षमता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वैक्सीन विकास एवं उत्पादन क्षमता का विस्तार, आपूर्ति श्रृंखला का एकीकरण और कुशल मानव संसाधन का विकास महामारी से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने इन पहलुओं को नीति आयोग के महामारी तैयारी एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया संबंधी ढांचे के अनुरूप रेखांकित किया।
तीन दिवसीय इस सम्मेलन में विभिन्न महत्त्वपूर्ण विषयों पर 11 समानांतर वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए जाएंगे। आज के वैज्ञानिक सत्रों ने जैविक रसायन विज्ञान, आणविक जीवविज्ञान, प्रतिरक्षा विज्ञान, संक्रामक रोगों तथा संबंधित क्षेत्रों में कार्यरत वैज्ञानिकों के बीच विचारों के आदान-प्रदान, नवीन अनुसंधान निष्कर्षों को साझा करने और सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्त्वपूर्ण मंच प्रदान किया।
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