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‘एक राज्य, एक व्यंजन’ प्रतियोगिता में छात्राओं ने दिखाई पाक कला की प्रतिभा

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। नेताजी सुभाष चंद्र बोस राजकीय महिला पीजी कॉलेज, अलीगंज में पोषण माह के अवसर पर जागरूकता एवं शैक्षिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसी क्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय के गृहविज्ञान विभाग की डॉ. देविना सहाय ने “बेहतर जीवन के लिए सही खानपान” विषय पर विशेष व्याख्यान दिया।

अपने व्याख्यान में डॉ. सहाय ने पोषण के महत्व तथा हमारे दैनिक जीवन पर खानपान के प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि किशोरावस्था से ही संतुलित एवं पौष्टिक आहार का सेवन स्वस्थ जीवन की आधारशिला है। उन्होंने यह भी समझाया कि गर्भावस्था में उचित पोषण न लेने का प्रभाव नवजात शिशु के मानसिक एवं शारीरिक विकास पर पड़ सकता है तथा उसका प्रभाव आगे के जीवन तक बना रह सकता है।

डॉ. सहाय ने कहा कि सही और संतुलित खानपान शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने पोषण के क्षेत्र में हुए नवीनतम शोध एवं उपयोगी जानकारियों को सरल एवं प्रभावी ढंग से छात्राओं और शिक्षकों के साथ साझा किया।

इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर शालिनी श्रीवास्तव ने डॉ. देविना सहाय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे व्याख्यान छात्राओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने बताया कि थोड़ी-सी जागरूकता और प्रयास से जंक फूड के स्थान पर पौष्टिक एवं बेहतर विकल्प बच्चों को उपलब्ध कराए जा सकते हैं। उन्होंने मैदा के स्थान पर चोकरयुक्त आटा तथा मोटे अनाज के प्रयोग पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम का आयोजन गृह विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. हेमलता पाण्डेय एवं डॉ. रुचि सिंह के संयोजन में किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत “एक राज्य, एक व्यंजन” विषय पर व्यंजन प्रतियोगिता का भी आयोजन हुआ। जिसमें महाविद्यालय की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान निकुंज चौरसिया, द्वितीय स्थान सृष्टि गुप्ता एवं सलमा तथा तृतीय स्थान अंजलि विश्वकर्मा एवं अखिला कनौजिया ने प्राप्त किया। आस्था मिश्रा को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों ने सहभागिता की। आयोजन का उद्देश्य छात्राओं में पोषण, संतुलित आहार एवं स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यक्रम में डॉ. सनोबर हैदर, डॉ. मीनाक्षी शुक्ला एवं डॉ. भास्कर शर्मा निर्णायक की भूमिका में रहे।