मुंबई (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। ग्रीक थिएटर्स से लेकर खचाखच भरे क्रिकेट स्टेडियम्स तक, एरीना हमेशा से लोगों को एक साथ लाते रहे हैं। अब स्टार प्लस ने इसी सोच को ‘इंडिया के टॉप 1%’ के साथ एक मजेदार और हाई-टेक अंदाज दिया है। हर एपिसोड में अनिल कपूर इस विशाल एम्फीथिएटर-स्टाइल सेट के बीचों-बीच नजर आएँगे और अलग-अलग जगहों और पेशों से आए 100 भारतीयों के साथ बातचीत करेंगे।
इनमें स्टूडेंट्स, होममेकर्स और दुकानदारों से लेकर यूट्यूबर्स, जादूगर और रियल एस्टेट एजेंट्स तक शामिल होंगे। गाँवों, छोटे शहरों और बड़े शहरों से आए ये सभी लोग अपनी अलग-अलग कहानियों और अंदाज के साथ इस एरीना में एक साथ खेलते नजर आएँगे।
सेट के हर कोने में कैमरे लगाए गए हैं, इसलिए यहाँ कोई ब्लाइंड स्पॉट नहीं है। प्रतियोगियों की घबराहट, उलझन और जीत की खुशी का हर पल कैमरे में कैद होगा। एरीना में 100 अलग-अलग टैबलेट्स भी हैं, जिन पर प्रतियोगी हिंदी या अंग्रेजी में गेम खेल सकते हैं। बड़े एलईडी स्क्रीन्स सभी को गेम से जोड़े रखते हैं। वहीं, हर प्रतियोगी की स्टेटस लाइट उनके गेम में बने रहने, बाहर होने या पास इस्तेमाल करने के अनुसार नीले से लाल रंग में बदलती है और गेम का पूरा माहौल बदल देती है।

सेट की सबसे बड़ी खासियत इसका गोलाकार एलईडी फ्लोर है, जिस पर गेम के ग्राफिक्स और बदलते प्रतिशत दिखाई देते हैं। जैसे-जैसे प्रतियोगी टॉप 1% के करीब पहुँचते हैं, यह फ्लोर उनके सफर को और भी रोमांचक बना देता है। सैकड़ों लोगों की मेहनत से सिर्फ एक महीने में तैयार हुआ यह सेट शानदार और आधुनिक होने के साथ-साथ रंगीन, मजेदार और अपनापन भरा भी है।
स्टार प्लस के ‘इंडिया के टॉप 1%’ का सेट डिजाइन करने के बारे में बात करते हुए, वर्षा जैन ने कहा, “इंडिया के टॉप 1% का सेट बनाना मेरे लिए बेहद रोमांचक और रचनात्मक अनुभव रहा। शो को शानदार और भव्य रूप देने के लिए हमने करीब दो से तीन महीने तक कई विकल्प देखे, जिसके बाद इस जगह को चुना गया। इसके बाद सैकड़ों लोगों की मेहनत से पूरे एरीना को तैयार करने में एक और महीना लगा। सेट की हर चीज को बहुत बारीकी से डिजाइन किया गया है और हाथों से तैयार किया गया है।”
उन्होंने कहा, “हम चाहते थे कि यह सेट चमकदार और आधुनिक दिखे, लेकिन साथ ही मजेदार, सहज और अपनापन भरा भी लगे। मेरे लिए हर प्रतियोगी की बदलती स्टेटस लाइट और गोलाकार एलईडी फ्लोर इसकी सबसे बड़ी खासियत हैं। ये दोनों चीजें प्रतियोगियों के सफर और टॉप 1% तक पहुँचने की पूरी प्रक्रिया को जीवंत बनाती हैं। इतने बड़े स्तर और तकनीक के बावजूद यह सेट डराने वाला नहीं लगता और यही संतुलन इसे सच में खास बनाता है।”
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