नोएडा (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। गोदरेज प्रॉपर्टीज ने गोदरेज इंडस्ट्रीज ग्रुप की ‘गुड एंड ग्रीन’ पहल की इनोवेशन शाखा—गोदरेज गुड एंड ग्रीन लैब्स के तहत ज़िन्टियो के साथ साझेदारी में ‘हैबिटैट मैटर्स’ लॉन्च करने की घोषणा की। यह एक सीएसआर पहल है, जिसका उद्देश्य भारत के निर्माण क्षेत्र में कम-कार्बन निर्माण सामग्री को तेजी से अपनाने को बढ़ावा देना है।
गोदरेज प्रॉपर्टीज के चीफ डिजाइन एंड सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर रोहित मोहन ने कहा, “गोदरेज प्रॉपर्टीज हमेशा से भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र में टिकाऊ विकास के मामले में अग्रणी रही है और ‘हैबिटैट मैटर्स’ के जरिए हम इसे एक कदम और आगे ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य संभावनाशील विचारों और वास्तविक निर्माण स्थल पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों के बीच की खाई को पाटना है। इसके माध्यम से नवाचार करने वालों को इंजीनियरिंग के स्तर पर कठोर परीक्षण, वास्तविक निर्माण स्थल पर तेजी से बदलती और वास्तविक परिस्थितियों में अपने नवाचारों को परखने का अवसर और ऐसे मूल्यांकन उपलब्ध होंगे, जो नए उद्योग मानक तैयार करने में मदद करेंगे।”
सीमेंट, कंक्रीट, स्टील, कांच और दीवारों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले ब्लॉक्स, निर्माण क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं। इसके बावजूद उद्योग के सामने यह सबसे कम संबोधित की गई चुनौतियों में शामिल हैं। ‘हैबिटैट मैटर्स’ का उद्देश्य कम-कार्बन सामग्री से जुड़े संभावनाशील नवाचारों और उन्हें वास्तविक निर्माण परियोजनाओं में इस्तेमाल करने के बीच की खाई को पाटना है। इसके तहत भरोसेमंद नवाचारों की पहचान की जाएगी, उनका पायलट स्तर पर इस्तेमाल किया जाएगा और वास्तविक परिस्थितियों में उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा।
अगले पांच वर्षों में गोदरेज प्रॉपर्टीज ऐसे नवाचारों के पायलट प्रोजेक्ट लागू करने का लक्ष्य रखती है। इससे वास्तविक निर्माण स्थलों पर परीक्षण और सत्यापन से मिले प्रमाणों का एक मजबूत आधार तैयार होगा। जो भविष्य में व्यापक निर्माण उद्योग के निर्माण के तौर-तरीकों को बेहतर और अधिक टिकाऊ बनाने में मदद करेगा।
गोदरेज इंडस्ट्रीज ग्रुप में ‘गुड एंड ग्रीन’ के हैड पाकजान दस्तूर ने कहा, “अगले दशक में भारत की विकास यात्रा इस बात से तय होगी कि हम निर्माण के तरीके को लेकर कौन से फैसले लेते हैं। गुड एंड ग्रीन लेब्स में हमारा उद्देश्य उद्योग की उन बड़ी और जटिल समस्याओं का समाधान करना है, जिनका अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। कम-कार्बन निर्माण सामग्री भी ऐसी ही एक बड़ी चुनौती है। हमारा मानना है कि इन समस्याओं का समाधान अकेले नहीं किया जा सकता। हम जिन समाधानों का समर्थन करते हैं, वे ऐसे लोगों के साथ साझेदारी में विकसित किए जाते हैं, जो विज्ञान और जमीनी वास्तविकताओं को समझते हैं। हमारा लक्ष्य ऐसे समाधान तैयार करना है, जिन्हें व्यापक रियल एस्टेट इकोसिस्टम अपना सके, बड़े स्तर पर लागू कर सके और जिनके जरिए पूरा उद्योग आगे बढ़ सके।”
ज़िन्टियो की पार्टनर सुमन जगदेव ने कहा, “कम-कार्बन सामग्री के क्षेत्र में भारत के सामने नवाचार की समस्या नहीं है, बल्कि इन्हें वास्तविक निर्माण परियोजनाओं में लागू करने की समस्या है। ‘हैबिटैट मैटर्स’ उस कड़ी को जोड़ने का काम करता है, जिसकी बाजार में कमी रही है। यह संभावनाशील समाधानों को वास्तविक निर्माण परियोजनाओं, वास्तविक साइट परिस्थितियों और वास्तविक प्रदर्शन से मिलने वाली व्यावसायिक विश्वसनीयता से जोड़ता है।”
हैबिटैट मैटर्स ने ‘आवेदन के लिए अनुरोध’ (RFA – Request for Applications) जारी किया है, जिसमें स्टार्टअप्स, अनुसंधान संस्थानों, सामग्री निर्माताओं और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं को आवेदन करने के लिए आमंत्रित किया गया है। इस खुली प्रक्रिया के माध्यम से, यह कार्यक्रम कम-कार्बन सामग्री समाधानों की पहचान करेगा और गुड एंड ग्रीन लैब्स के जरिए प्रयोगशाला-परीक्षित नवाचार से लेकर साइट-सत्यापित समाधान तक के उनके सफर में मदद करेगा।
यह कार्यक्रम पांच प्राथमिकता वाली सामग्री श्रेणियों—सीमेंट, कंक्रीट, स्टील, ब्लॉक्स और कांच—के साथ-साथ बायो-आधारित विकल्पों और अन्य एम्बॉइडेड कार्बन न्यूनीकरण समाधानों पर केंद्रित है। TRL 5 और उससे ऊपर के नवाचार आवेदन के पात्र हैं।
चयनित आवेदकों को सक्रिय निर्माण परियोजनाओं के भीतर अपने नवाचारों का पायलट परीक्षण करने का अवसर मिलेगा और उन्हें इस तकनीक को तेजी से अपनाने के लिए संरचित तकनीकी व व्यावसायीकरण सहायता प्राप्त होगी।
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