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79% छात्रों की पसंद फ्लेक्सिबल क्लासरूम, स्मार्ट लर्निंग पर इंटेरियो की स्टडी का खुलासा

मुंबई (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के प्रमुख फर्नीचर ब्रांड ‘इंटेरियो बाय गोदरेज’ (Interio by Godrej) ने अपना नया व्हाइटपेपर जारी किया है। जिसका शीर्षक “बियॉन्ड द स्क्रीन्स: द राइज़ ऑफ़ स्मार्ट लर्निंग स्पेसिस” (Beyond the Screens: The Rise of Smart Learning Spaces) है। यह रिपोर्ट बताती है कि भारत भर के स्कूल किस तरह तकनीक आधारित पढ़ाई को अपना रहे हैं और असरदार स्मार्ट लर्निंग माहौल तैयार करने के लिए किन चीजों की जरूरत है।

‘इंटेरियो बाय गोदरेज’ के वर्कस्पेस एंड एर्गोनॉमिक्स रिसर्च सेल द्वारा तैयार यह अध्ययन बताता है कि तकनीक, आरामदायक फर्नीचर और फ्लेक्सिबल क्लासरूम लेआउट मिलकर छात्रों की भागीदारी, आपसी सहयोग और सीखने की क्षमता को कैसे बेहतर बना सकते हैं। इस रिसर्च में विभिन्न विषयों, क्षेत्रों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के 19 से 28 वर्ष के छात्रों के विचार शामिल किए गए हैं।

अध्ययन के निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए इंटेरियो बाय गोदरेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और बी2बी बिजनेस के प्रमुख समीर जोशी ने कहा, “भारत की शिक्षा व्यवस्था में 14.71 लाख से अधिक स्कूल हैं और इनमें 24.69 करोड़ से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं। ऐसे में सीखने के वातावरण की गुणवत्ता भविष्य के शैक्षणिक परिणामों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत 1.47 लाख करोड़ रुपये के सरकारी निवेश ने तकनीक-सक्षम कक्षाओं को अपनाने की प्रक्रिया को तेज किया है। कक्षा अब केवल जानकारी देने की जगह नहीं रह गई है; यह ऐसा वातावरण बन रही है, जहां सहयोग, रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच को विकसित किया जाता है।”

उन्होंने कहा, “स्कूलों ने डिजिटल तकनीकों को अपनाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन बदलाव का अगला चरण ऐसे लर्निंग स्पेस तैयार करना है, जहां तकनीक के साथ बेहतर डिजाइन, एर्गोनॉमिक्स, लचीलापन और आराम का भी ध्यान रखा जाए। गोदरेज इंटरियो में हमारा मानना है कि शिक्षा का भविष्य केवल स्मार्ट उपकरणों पर निर्भर नहीं है, बल्कि स्मार्ट लर्निंग स्पेस पर भी निर्भर है, जो शिक्षकों को बेहतर ढंग से पढ़ाने और छात्रों को बेहतर तरीके से सीखने में सक्षम बनाते हैं।”

श्वेतपत्र में कक्षाओं के तकनीक-सक्षम लर्निंग एनवायरमेंट में बदलने की प्रक्रिया को रेखांकित किया गया है। इसके अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 100% शिक्षकों का मानना है कि तकनीक छात्रों की भागीदारी और समझ को बेहतर बनाती है। वहीं, 91% शिक्षकों ने तकनीक के इस्तेमाल से संबंधित औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया है। यह दर्शाता है कि शिक्षक डिजिटल माध्यमों से पढ़ाने के तरीकों को अपनाने के लिए तेजी से तैयार हो रहे हैं।

शोध में यह भी सामने आया कि सर्वेक्षण में शामिल सभी स्कूलों ने अपनी कक्षाओं में तकनीक को शामिल कर लिया है। इनमें से 75% शिक्षकों ने कक्षा में तकनीक के इस्तेमाल को सहज और आसानी से समझ आने वाला बताया। हालांकि, तकनीक के व्यापक इस्तेमाल के बावजूद इसका उपयोग मुख्य रूप से कक्षा में पढ़ाने तक सीमित है। ऐसे में मूल्यांकन, डेटा विश्लेषण, व्यवस्थित फीडबैक और छात्रों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप सीखने की व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल की काफी संभावनाएं मौजूद हैं।

अध्ययन में बेहतर शैक्षणिक परिणाम हासिल करने में कक्षा के डिजाइन की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया है। इसके अनुसार, 94% ऐसे शिक्षक, जो कक्षा के फर्नीचर की व्यवस्था को जरूरत के अनुसार बदल सकते हैं, अपने काम को अधिक प्रभावी मानते हैं। वहीं, 79% छात्र ऐसे लर्निंग एनवायरमेंट को पसंद करते हैं, जहां सहयोगात्मक गतिविधियों या एकाग्र होकर पढ़ाई करने के लिए बैठने की व्यवस्था को बदला जा सके।

इन निष्कर्षों से स्पष्ट होता है कि छात्रों के लिए बेहतर और अधिक प्रभावी सीखने का वातावरण तैयार करने में लचीला फर्नीचर, एर्गोनॉमिक सीटिंग, प्रभावी ध्वनि व्यवस्था और अच्छी तरह से तैयार ऑडियो-विजुअल इंफ्रास्ट्रक्चर तकनीक के महत्वपूर्ण पूरक हैं।

19 भारतीय शहरों में स्मार्ट क्लासरूम से लैस स्कूलों में नामांकन में औसतन 22% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह तकनीक-सक्षम शिक्षा की पहुंच बढ़ाने और छात्रों की भागीदारी में इसके प्रभाव को दर्शाता है।

श्वेतपत्र में यह भी कहा गया है कि केवल तकनीक के इस्तेमाल से लर्निंग एनवायरमेंट में बदलाव नहीं लाया जा सकता। स्क्रीन की स्पष्ट दृश्यता, बेहतर ध्वनि व्यवस्था, कक्षा का उपयुक्त लेआउट, एर्गोनॉमिक फर्नीचर, भरोसेमंद रखरखाव और एकीकृत लर्निंग स्पेस भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इन सभी पहलुओं को साथ लेकर चलने से ही तकनीक शिक्षा के क्षेत्र में सार्थक और प्रभावी परिणाम दे सकती है।