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H1N1 से घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन इन लोगों को रहना होगा सावधान

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। H1N1 अब भारत में मौसमी इन्फ्लुएंजा का हिस्सा बन चुका है, इसलिए हर साल इसके मामले सामने आना असामान्य नहीं है। मौजूदा स्थिति में महत्वपूर्ण बात यह है कि कई क्षेत्रों में H1N1 का प्रसार और मामलों की पहचान बढ़ी है। ऐसा किसी नए या पहले से ज्यादा खतरनाक वायरस के सामने आने के कारण नहीं है। यह कहना है डॉ. अग्निजीत पालित (एमडी, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल, लखनऊ) का।

उनके मुताबिक भारत में A(H1N1)pdm09 वायरस 2025 से मौजूद है और इसमें हुए आनुवंशिक बदलाव सामान्य मौसमी बदलावों के अनुरूप हैं। मौसमी संक्रमण, मानसून, लोगों की आवाजाही और बढ़ी हुई निगरानी व जांच के कारण भी मामलों की संख्या अधिक दिखाई दे सकती है।

उनके मुताबिक, हालांकि अधिकांश संक्रमणों का इलाज संभव है, लेकिन H1N1 निमोनिया या सांस लेने में गंभीर परेशानी जैसी जटिलताओं का कारण बन सकता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी या कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में गंभीर संक्रमण का खतरा अधिक होता है। बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और थकान जैसे लक्षण अन्य इन्फ्लुएंजा संक्रमणों में भी दिखाई दे सकते हैं, इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर H1N1 की पहचान नहीं की जा सकती। 

उन्होंने बताया कि जहां चिकित्सकीय रूप से जरूरी हो, वहां NAAT आधारित मॉलिक्यूलर टेस्ट, जिसमें रियल-टाइम PCR भी शामिल है, संक्रमण की पुष्टि करने और वायरस की पहचान करने में मदद कर सकते हैं। विकेंद्रीकृत मॉलिक्यूलर जांच से मरीज के करीब ही तेजी से जांच और निदान संभव हो सकता है। उचित जांच के साथ टीकाकरण, हाथों की स्वच्छता, भीड़भाड़ या कम हवादार जगहों पर मास्क पहनना, अच्छी वेंटिलेशन बनाए रखना और लक्षण होने पर घर पर रहना संक्रमण के प्रसार को कम करने में महत्वपूर्ण हैं।