लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। टाटा पावर ने वर्ष 2030 तक ₹1 लाख करोड़ राजस्व और ₹10,000 करोड़ शुद्ध लाभ हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। वार्षिक आम बैठक (AGM) में चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि कंपनी ‘एनर्जी ऐज़ ए सर्विस’ मॉडल के माध्यम से आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं को स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा अपनाने में सक्षम बना रही है। कंपनी बिजली उत्पादन, पारेषण, वितरण, अक्षय ऊर्जा, रूफटॉप सोलर, ईवी चार्जिंग और विनिर्माण क्षेत्रों में तेजी से विस्तार कर रही है तथा जल्द ही ओडिशा में नए सौर विनिर्माण संयंत्र की घोषणा करेगी।
उन्होंने कहा कि AI, जलवायु परिवर्तन और बढ़ती बिजली मांग के बीच ऊर्जा सुरक्षा के लिए स्वच्छ, सशक्त और विकेंद्रीकृत ऊर्जा प्रणाली अनिवार्य हो गई है। भारत की स्थापित बिजली क्षमता 533 GW तक पहुंच चुकी है, जिसमें 53% स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी है। वर्ष 2030 तक देश की क्षमता 770 GW और स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी 64% होने का अनुमान है।
चंद्रशेखरन ने बताया कि टाटा पावर की स्थापित उत्पादन क्षमता 26 GW हो गई है, जिसमें 66% स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से है और कंपनी 2030 तक 30 GW क्षमता के लक्ष्य पर कायम है। इस वर्ष 2.5 GW अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं चालू की गई हैं, 5.1 GW परियोजनाएं विकासाधीन हैं, जबकि तिरुनेलवेली का 4.3 GW सोलर विनिर्माण संयंत्र पूर्ण क्षमता पर संचालित हो रहा है।
कंपनी की रूफटॉप सोलर क्षमता 4 GW से अधिक, 3 लाख से अधिक ग्राहक और 2 लाख से अधिक घरेलू EV चार्जर स्थापित हो चुके हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का समेकित राजस्व ₹63,681 करोड़, कर पश्चात शुद्ध लाभ ₹5,212 करोड़ और EBITDA ₹16,090 करोड़ रहा, जिसके आधार पर ₹1 अंकित मूल्य के प्रत्येक शेयर पर ₹2.50 (250%) लाभांश की सिफारिश की गई है। पर्यावरण संरक्षण, नेट-ज़ीरो 2045, ‘गज संरक्षण’, ‘प्रोजेक्ट आलुगान’ तथा CSR के तहत 21 राज्यों में 52 लाख से अधिक लोगों तक पहुंच जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि टाटा पावर भविष्य में भी सतत विकास और देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।
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