मां-बेटी संवाद और जागरूकता से बनेगा स्वस्थ समाज : आनंदीबेन पटेल
लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने छात्राओं के समग्र स्वास्थ्य और जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालयों में महिलाओं से जुड़े स्वास्थ्य विषयों पर विशेष पाठ्यक्रम शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि छात्राओं को मासिक धर्म, मेनोपॉज, प्रजनन स्वास्थ्य तथा अन्य महिला स्वास्थ्य संबंधी विषयों की वैज्ञानिक जानकारी दी जानी चाहिए और समय-समय पर स्त्री रोग विशेषज्ञों द्वारा उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच भी कराई जानी चाहिए।
मंगलवार को डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के दीक्षांत समारोह के उपरांत आयोजित मां-बेटी सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने माताओं से गर्भावस्था के दौरान सकारात्मक वातावरण बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को तनाव, विवाद और नकारात्मक माहौल से दूर रहकर अच्छा साहित्य पढ़ना, मधुर संगीत सुनना तथा चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार नियमित व्यायाम करना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा तैयार गर्भ संस्कार विषयक पुस्तक का अध्ययन छात्र-छात्राओं को भी करने की सलाह दी।
24वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश, लखनऊ में HPV टीकाकरण सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी की गरिमामयी उपस्थिति में पात्र लाभार्थियों का HPV टीकाकरण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से डॉ. नीरज (MOIC, जानकीपुरम), ANMs एवं ASHAs उपस्थित रहीं तथा टीकाकरण गतिविधियों का सफलतापूर्वक संचालन किया गया।
राज्यपाल ने जर्मनी के एक अस्पताल के अपने भ्रमण का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां गर्भवती महिलाओं की चरणबद्ध देखभाल की प्रभावी व्यवस्था है। जिसमें गर्भावस्था के प्रत्येक चरण के अनुसार पोषण, स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन और चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की व्यवस्था मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में अत्यंत उपयोगी है।
उन्होंने विश्वविद्यालय को निर्देश दिए कि आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भावस्था के नौ माह के दौरान प्रत्येक माह आवश्यक पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और भ्रूण के विकास संबंधी जानकारी चित्रों एवं सरल भाषा में प्रदर्शित की जाए, ताकि गर्भवती महिलाओं को आसानी से आवश्यक जानकारी मिल सके।

राज्यपाल ने कहा कि बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समय पर टीकाकरण और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना समाज की जिम्मेदारी है तथा बेटा-बेटी में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी दंपति को संतान प्राप्ति में कठिनाई हो तो केवल महिला को दोषी ठहराना उचित नहीं है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर पुरुष की भी चिकित्सकीय जांच कराई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जागरूक बेटियां अपने परिवार, माता तथा विवाह के बाद नए परिवार को भी स्वास्थ्य और पोषण के प्रति जागरूक बना सकती हैं। स्वस्थ, संवेदनशील और सशक्त समाज के निर्माण के लिए माताओं का स्वस्थ होना अत्यंत आवश्यक है।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने बताया कि गुजरात में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं निराश्रित महिलाओं और पुरुषों के सम्मानजनक पुनर्वास तथा उपचार की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए थे, जिस पर आज भी कार्य किया जा रहा है।
राज्यपाल ने मां और बेटी के बीच निरंतर संवाद बनाए रखने पर बल देते हुए कहा कि माता को अपनी बेटी की गतिविधियों पर संवेदनशील दृष्टि रखनी चाहिए, ताकि वह किसी भी सामाजिक बुराई या गलत तत्वों के प्रभाव से सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच में केवल माता ही नहीं, बल्कि गर्भस्थ शिशु के शारीरिक विकास की भी समुचित निगरानी होनी चाहिए। साथ ही गर्भवती महिलाओं को चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार आवश्यक दवाएं और पौष्टिक आहार नियमित रूप से लेना चाहिए, क्योंकि स्वस्थ माताएं ही स्वस्थ एवं सक्षम नई पीढ़ी का निर्माण करती हैं।
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