लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। आरबीआई एमपीसी की नीति पर टिप्पणी करते हुए साक्षी गुप्ता (प्रधान अर्थशास्त्री, एचडीएफसी बैंक) ने कहा कि आरबीआई और सरकार ने आज रुपये पर दबाव कम करने के लिए भारतीय परिसंपत्तियों में पूंजी प्रवाह को बढ़ाने की दिशा में किए गए समन्वित प्रयास को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इन उपायों में अल्पकालिक समाधानों के साथ-साथ व्यापक संरचनात्मक सुधार भी शामिल थे, जैसे कि जी-सेक में एफपीआई निवेश पर कराधान में परिवर्तन। इन सभी के संयुक्त प्रभाव से वित्त वर्ष 2027 के लिए अनुमानित 40-50 अरब डॉलर के भुगतान संतुलन के अंतर को पाटने में मदद मिल सकती है। हमें आने वाले महीनों में रुपये के मूल्य में वृद्धि की संभावना दिख रही है क्योंकि इन उपायों के कारण वास्तविक धन प्रवाह धीरे-धीरे शुरू हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस नीतिगत घोषणा में विकास और मुद्रास्फीति के आकलन भी उल्लेखनीय थे। केंद्रीय बैंक ने आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और मूल्य दबाव में वृद्धि के कारण विकास के लिए संभावित जोखिमों को पहचाना। साथ ही, वित्त वर्ष 2027 के लिए मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान में 50 बीपीएस की वृद्धि करके इसे 5.1% कर दिए जाने को देखते हुए, इस नीति को थोड़ा आक्रामक माना जा सकता है। इससे अक्टूबर की नीति के साथ ब्याज दर में वृद्धि का चक्र शुरू होने की संभावना बढ़ जाती है। हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में कुल मिलाकर 50 बीपीएस की ब्याज दर वृद्धि होगी।
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