नई दिल्ली (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। दिग्गज अभिनेता और फिल्म निर्माता अनुपम खेर ने फिल्म उद्योग के बदलते परिदृश्य पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सिनेमा को वास्तविक भावनाओं और सांस्कृतिक सच्चाइयों पर आधारित प्रामाणिक कहानी कहने की ओर लौटने की आवश्यकता है। उनके अनुसार भारतीय सिनेमा का वर्तमान दौर प्रामाणिक, पैन-इंडियन क्षेत्रीय कहानियों के उभार और पारंपरिक स्टार सिस्टम पर निर्भरता के कम होने से परिभाषित हो रहा है।
अनुपम खेर भारतीय सिनेमा में प्रतिभा, प्रशिक्षण और परिवर्तन पर एक संवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे। जिसका आयोजन FICCI Ladies Organisation (फ्लो) द्वारा किया गया। फ्लो देश की प्रमुख व्यवसायिक महिला संस्था है।

अनुपम खेर ने कहा, “आज दर्शक अर्थपूर्ण और भावनाओं से जुड़ी कहानियां चाहते हैं, जिससे फिल्म उद्योग को विकसित होने और स्थापित मानदंडों को चुनौती देने की आवश्यकता पड़ रही है। सिनेमा और दर्शकों की अपेक्षाओं के इस बदलते दौर में वही फिल्म सफल होती है जो दर्शकों से सच्चा जुड़ाव बना सके। आजकल अधिकांश सितारे सुरक्षित खेलने की कोशिश करते हैं, लेकिन अब स्वयं को नए रूप में प्रस्तुत करने का समय है। सिनेमा केवल व्यावसायिक रुझानों का पीछा करने के बजाय ‘दिल से’ निकलना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “मैं हमेशा महिलाओं के प्रति गहरी प्रशंसा व्यक्त करता रहा हूं और अक्सर कहता हूं कि महिलाएं पुरुषों से श्रेष्ठ हैं क्योंकि उनमें जीवन को जन्म देने की नैसर्गिक शक्ति होती है। महिलाएं समाज की आधारशिला हैं, जो परिवारों और समुदायों को आकार देती हैं।” उन्होंने माताओं, बहनों और कामकाजी महिलाओं के प्रति अपना सर्वोच्च सम्मान व्यक्त करते हुए कहा, “मेरी मां और अन्य महिलाओं ने अपने अद्भुत धैर्य और शक्ति से मेरे जीवन को गहराई से प्रभावित किया है।”
इस संवाद का संचालन उभरती हुई अभिनेत्री Shubhangi Dutt ने किया। यह आयोजन फ्लो परफॉर्मिंग आर्ट्स इनिशिएटिव के तहत आयोजित किया गया, जिसका नेतृत्व शिखा सरीन कर रही हैं। यह पहल कला को प्रोत्साहित करने, रचनात्मकता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देने तथा रचनात्मक क्षेत्र में महिलाओं के लिए सार्थक मंच और संवाद तैयार करने का प्रयास है।

फ्लो की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूजा गर्ग ने इस अवसर पर कहा, “कुछ अभिनेता हमारा मनोरंजन करते हैं, कुछ हमें प्रभावित करते हैं, लेकिन कुछ दुर्लभ कलाकार ऐसे होते हैं जो पीढ़ियों तक हमारे जीवन का हिस्सा बन जाते हैं। अनुपम खेर जी निश्चित रूप से उन दुर्लभ कलाकारों में से एक हैं, जिनका काम हमेशा साहस, विश्वास और भावनात्मक सच्चाई को दर्शाता है।”
उन्होंने कहा, “फ्लो में हमारा मानना है कि रचनात्मक उद्योग अब केवल जुनून के occasional क्षेत्र नहीं रह गए हैं, बल्कि वे अपार आर्थिक और नेतृत्व क्षमता वाले सशक्त उद्योग बन चुके हैं। आज महिलाएं केवल कैमरे के सामने ही नहीं, बल्कि निर्देशक, निर्माता, लेखक, उद्यमी और क्रिएटर के रूप में कैमरे के पीछे भी कहानियों को आकार दे रही हैं।”
इस कार्यक्रम में फ्लो सदस्य, पूर्व अध्यक्ष, रचनात्मक पेशेवर, उद्यमी और उभरते कलाकार शामिल हुए। कार्यक्रम में सिनेमा, कहानी कहने की कला, संघर्ष और आधुनिक भारत को आकार देने में रचनात्मक उद्योगों की बदलती भूमिका पर विचारोत्तेजक चर्चा हुई।
इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख लोगों में आभा डालमिया (पूर्व अध्यक्ष, फ्लो), रितिका सरना (गवर्निंग बॉडी सदस्य, फ्लो) तथा रश्मि सारिता (महासचिव, फ्लो) शामिल थीं।
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