लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। विश्व स्वास्थ्य दिवस इस बात पर जोर देता है कि आज स्वास्थ्य सेवा का अर्थ केवल उपचार तक पहुंच नहीं, बल्कि बिना किसी वित्तीय संकट के उपचार की उपलब्धता है। भारत में, यह चुनौती लगातार गंभीर होती जा रही है। ‘एऑन की ग्लोबल मेडिकल ट्रेंड रेट्स रिपोर्ट 2026’ के अनुसार, भारत में चिकित्सा संबंधी महंगाई 11-14% के बीच रहने का अनुमान है, जो विश्व स्तर पर सबसे अधिक है।
वहीं, ‘विश्व बैंक/डब्ल्यूएचओ ग्लोबल हेल्थ एक्सपेंडिचर डेटाबेस’ के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवा पर होने वाले कुल खर्च का लगभग 44% हिस्सा आज भी लोगों को अपनी जेब से वहन करना पड़ता है। तेजी से हो रहे मेडिकल विकास और परिवारों की वित्तीय तैयारी के बीच बढ़ती इस खाई ने स्वास्थ्य बीमा को पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। आज हेल्थकेयर केवल अस्पताल में भर्ती तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें उन्नत सर्जरी, विशेष उपचार (थेरेपी) और पुरानी बीमारियों का लंबे समय तक प्रबंधन भी शामिल है, जिनमें अक्सर लंबा रिकवरी समय लगता है।

राकेश जैन (सीईओ, इंडसइंड जनरल इंश्योरेंस) के अनुसार, इस वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए, स्वास्थ्य बीमा को केवल आपात स्थिति में सहारा देने वाले साधन से आगे बढ़कर एक व्यापक वित्तीय सुरक्षा तंत्र के रूप में विकसित होना होगा, जो पूरे इलाज की प्रक्रिया में लोगों का साथ दे सके। वास्तविक स्वास्थ्य सुरक्षा जागरूकता, रोकथाम और वित्तीय तैयारी के संगम में निहित है। ग्राहक-प्रथम दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, हम इंडसइंड जनरल इंश्योरेंस में हमेशा वास्तविक स्वास्थ्य जरूरतों के अनुसार सुरक्षा समाधान तैयार करने पर केंद्रित हैं, जहां दीर्घकालिक ग्राहक कल्याण हमारी हर पहल का मुख्य आधार है।
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