नई दिल्ली (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। सेरा वीक के दौरान वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने विश्वस्तरीय साझेदारियों, टेक्नोलॉजी एवं निर्णायक कार्यान्वयन के माध्यम से भारत की ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को गति प्रदान करने पर ज़ोर दिया।
इस प्लेटफॉर्म के अनूठे महत्व पर रोशनी डालते हुए उन्होंने कहा, ‘‘सेरा वीक जिस तरह से लोगों को एक मंच पर लाता है, ऐसा बहुत कम फोरम कर पाते हैं। जिन चीज़ों को हासिल करने में कंपनियों को शायद सालों लग जाएं, यहां वे कुछ ही दिनों में उन उपलब्धियों को हासिल कर लेती हैं। सेरा में एनर्जी, प्रतिभा और ‘आओ एक साथ मिलकर कर इसे अंजाम दें’ की सोच ही इन उपलब्धियों में योगदान देती है, जो कहीं ओर देखने को नहीं मिलती।’’
भारत को विकास के दीर्घकालिक मार्केट के रूप में प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘भारत की भू-संरचना बेहद मजबूत है, देश के पास अपार भंडार और गहन तकनीकी प्रतिभा है। यहां ढेरों अवसर मौजूद हैं।’’
प्राकृतिक संसाधनों के प्रति सोच में बदलाव का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “एक समय था जब संसाधनों के विकास को नकारात्मक नज़रिए से देखा जाता था। आज हम इस बात को समझते हैं कि विकास और स्थिरता के लिए खनिज, तेल और गैस बेहद महत्वपूर्ण हैं।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वेदांता विश्वस्तरीय सहयोग के माध्यम से अपने तेल और गैस कारोबार का विस्तार करेगी। उन्होंने कहा, “हम 5 बिलियन डॉलर खर्च करने की योजनाओं के साथ अमेरिका आए हैं। हम सम्पत्तियों के निर्माण, टेक्नोलॉजी को हासिल करने और उद्योग जगत के सर्वश्रेष्ठ प्लेयर्स के साथ साझेदारी करने के लिए लगभग 5 बिलियन डॉलर के निवेश के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम इस क्षमता के सदुपयोग के लिए पार्टनर्स, कॉन्ट्रैक्टर्स और टेक्नोलॉजी लीडर्स के साथ मिलकर काम करने के लिए तत्पर हैं।’’
अमेरिका में अपने अनुभवों की बात करते हुए उन्होंने कहा, “अमेरिका में जो बात सबसे ज़्यादा उभरकर सामने आती है, वह है एनर्जी और कुछ कर दिखाने की इच्छाशक्ति। कंपनियाँ तब भी आगे बढ़ने के लिए तैयार रहती हैं, जब चीजें पूरी तरह से ठीक न हों।’’
कंपनी की यात्रा पर बात करते हुए श्री अग्रवाल ने कहा, ‘‘हमने पिछले 12 सालों में यह कारोबार खड़ा किया है, आज हमारे पर कर्ज़ से मुक्त मजबूत प्लेटफॉर्म है और हम आगे निवेश के लिए तैयार हैं।’’ अपनी महत्वाकांक्षी विकास योजनाओं को दोहराते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हमने एक मिलियन बैरल उत्पादन का लक्ष्य रखा है और आने वाले सालों में अपने कारोबार का पैमाना काफी बढ़ाएंगे।’’
भारत के बदलते नीतिगत माहौल पर रोशनी डालते हुए उन्होंने कहा, “डीजीएच अब विनियामक पक्ष से आगे बढ़कर फेसिलिटेटर के रूप में उभर रहा है और निजी कंपनियों को सहयोग देते हुए लोगों को अपना कारोबार शुरू करने की अनुमति दे रहा है।” उन्होंने व्यापक नीतिगत समर्थन पर बात करते हुए कहा, “हमारे प्रधानमंत्री जी का दृष्टिकोण कारोबार के अनुकूल है। वे टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देते हैं। अगर आप दुनिया भर में विकसित हो रही किसी भी चीज़ पर नज़र डालें, तो उसमें कहीं न कहीं ‘भारतीयता’ की झलक ज़रूर देखने को मिलेगी।”
भारत अपनी विशाल हाइड्रोकार्बन क्षमता के सदुपयोग की दिशा में बढ़ रहा है। इस बीच सेरा वीक में में अग्रवाल का संदेश एकदम स्पष्ट था- स्केल, गति और सशक्त विश्वस्तरीय साझेदारियाँ ही देश के ऊर्जा भविष्य को साकार करने में सबसे महत्वपूर्ण होंगी।
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