लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के तहत देश की सबसे बड़ी पेंशन फंड मैनेजर एसबीआई पेंशन फंड्स प्राइवेट लिमिटेड ने रिटायरमेंट योजना की बढ़ती आवश्यकता और एनपीएस इकोसिस्टम में हालिया विकासों पर प्रकाश डाला।
उत्तर प्रदेश, जहां कार्यबल तेजी से बढ़ रहा है और असंगठित क्षेत्र के कामगारों की बड़ी संख्या मौजूद है। सामाजिक सुरक्षा और पेंशन कवरेज को बढ़ाने की अपार संभावनाएं रखता है। एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और आर्थिक केंद्र के रूप में लखनऊ वित्तीय जागरूकता बढ़ाने और टियर-2 व टियर-3 शहरों तक पेंशन लाभ पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा है, जिससे व्यापक स्तर पर रिटायरमेंट सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
एसबीआई पेंशन फंड्स खुदरा और कॉरपोरेट दोनों वर्गों में एनपीएस अपनाने को बढ़ाने पर लगातार ध्यान दे रहा है। इसके लिए कंपनी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के व्यापक नेटवर्क का इस्तेमाल कर रही है, डिजिटल क्षमताओं को मजबूत कर रही है और वित्तीय साक्षरता व भविष्य की तैयारी को बढ़ावा दे रही है।
कंपनी एक अनुशासित और दीर्घकालिक निवेश रणनीति का पालन करती है, जिसमें विविधीकृत इक्विटी निवेश, स्थिर फिक्स्ड इनकम रणनीतियां और नए एसेट क्लासेस का चयनात्मक समावेश कर विकास और पूंजी संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जाता है।

एसबीआई पेंशन फंड्स के एमडी और सीईओ प्रणय द्विवेदी ने कहा, “रिटायरमेंट प्लानिंग अब विकल्प नहीं, बल्कि वित्तीय आवश्यकता बन चुकी है। कम लागत, लचीलापन और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के कारण एनपीएस लाखों भारतीयों के लिए डिफॉल्ट रिटायरमेंट समाधान बनने की क्षमता रखता है, खासकर तब जब उभरते शहरों में इसकी जागरूकता बढ़ रही है।”
बुधवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय नागरिकों को भविष्य के लिए आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाना है। वर्तमान समय में भारत में सेवानिवृत्त होने वाली आबादी तेजी से बढ़ रही है और आने वाले 20 वर्षों में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना है। साथ ही, लोगों की औसत आयु बढ़ने के कारण रिटायरमेंट के बाद चिकित्सा और अन्य खर्चों में भी वृद्धि हो रही है।
इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए NPS के माध्यम से लोग अपने कार्यकाल के दौरान नियमित और अनुशासित तरीके से थोड़ी-थोड़ी राशि निवेश करते हैं। रिटायरमेंट के बाद यही निवेश उन्हें पेंशन के रूप में प्राप्त होता है, जिससे उनका जीवन सुरक्षित और स्थिर बना रहता है। इस योजना की एक खास विशेषता यह है कि इसमें निवेश विभिन्न एसेट क्लास में किया जा सकता है, जैसे—इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड, सरकारी प्रतिभूतियां और अन्य वैकल्पिक निवेश। इससे निवेश पोर्टफोलियो संतुलित (डाइवर्सिफाइड) रहता है और बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
बढ़ती जीवन प्रत्याशा, स्वास्थ्य खर्चों में वृद्धि और पारिवारिक संरचनाओं में बदलाव के कारण रिटायरमेंट योजना बेहद जरूरी हो गई है। हालांकि, भारत के गैर-सरकारी कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा अब भी संगठित पेंशन व्यवस्था से वंचित है।
एनपीएस एक कम लागत, पारदर्शी, कर-अनुकूल और लचीला रिटायरमेंट बचत प्लेटफॉर्म के रूप में लगातार मजबूत हो रहा है। जिसे पेंशन निधि नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा किए गए हालिया सुधारों का समर्थन प्राप्त है।
प्रमुख बदलाव
- मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (एमएसएफ) की शुरुआत, जिससे निवेश विकल्प बढ़े
- दीर्घकालिक निवेशकों के लिए इक्विटी में अधिक निवेश की अनुमति
- एआईएफ और गोल्ड/सिल्वर ईटीएफ जैसे नए एसेट क्लास में विस्तार
- निजी क्षेत्र के कर्मचारियों, स्व-रोजगार और गिग वर्कर्स पर बढ़ता फोकस
- ये बदलाव निवेशक-केंद्रित और अधिक लचीली रिटायरमेंट सुरक्षा प्रणाली की ओर बढ़ते कदम को दर्शाते हैं।
लखनऊ में आयोजित यह पहल एसबीआई पेंशन फंड्स की देशभर में रिटायरमेंट तैयारी को मजबूत करने और पेंशन कवरेज का विस्तार करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
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