लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। टाटा समूह के भारत के नंबर 1 एसी ब्रांड, वोल्टास ने अपना ‘समर 2026’ पोर्टफोलियो पेश किया है। इसकी अगुवाई AI-इनेबल्ड वर्टिस स्प्लिट एसी सीरीज कर रही है, जो विशेष रूप से भारतीय परिस्थितियों के लिए तैयार की गई इंटेलिजेंट कूलिंग की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
भारतीय परिस्थितियों के लिए तैयार AI-संचालित कूलिंग
समर 2026 रेंज का मुख्य आकर्षण वोल्टास का AI पावर्ड इन्वर्टर स्प्लिट एसी पोर्टफोलियो है। इसमें सिर्फ मैनुअल टेम्परेचर कंट्रोल से आगे जाकर एक ऐसा सिस्टम बनाया गया है जो लगातार सीखकर खुद को बेहतर बनाता रहता है। नई वर्टिस AI सीरीज भारत के बेहद अलग और गर्म मौसम के अनुसार खुद को ढालती है। यह तापमान, नमी और इस्तेमाल के पैटर्न को समझकर काम करती है।
· AI एडाप्टिव कूलिंग : यह कूलिंग की तीव्रता को अपने आप एडजस्ट करती है, ताकि जरूरत से ज्यादा ठंडक न हो और परिवार के हर सदस्य को उनकी पसंद के अनुसार व्यक्तिगत आराम मिले।
· AI एनर्जी मैनेजर : वोल्टास इंटेलिजेंस ऐप के साथ एकीकृत यह फीचर यूज़र्स को महीने की बिजली खपत का लक्ष्य तय करने की सुविधा देता है। इसके बाद, एसी रियल-टाइम में अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाता है ताकि आराम और बिजली की बचत के बीच सही संतुलन बना रहे—यह भारतीय घरों की सबसे बड़ी चिंता का सीधा समाधान है।
· AI जियोफेंसिंग : यह फीचर यूज़र के घर पहुंचने से पहले ही कमरे को ठंडा करना शुरू कर देता है, ताकि उन्हें घर पहुंचते ही तुरंत आराम मिले। साथ ही, जब घर में कोई नहीं होता, तो यह अनावश्यक बिजली की खपत को रोकता है।
समर 2026 का यह अभियान तकनीक के इस बड़े बदलाव को एक ऐसी पृष्ठभूमि में पेश करता है, जिसे हर भारतीय परिवार पहचान सके। वोल्टास माँ-बेटे के बीच के वास्तविक प्रेम और स्नेह के माध्यम से पीढ़ियों के उस अटूट भरोसे को और मजबूत करता है, जो उसने सालों में कमाया है। सुपरस्टार रणबीर कपूर और नीतू कपूर द्वारा अभिनीत यह फिल्म घर के एक हल्के-फुल्के, लेकिन बहुत ही चिर-परिचित पल को खूबसूरती से दर्शाती है।
फिल्म में नीतू कपूर याद करती हैं कि बचपन में रणबीर को एसी चलने पर हमेशा ठंड लगती थी, जिससे तापमान को कम-ज्यादा करने की वह चिर-परिचित ‘नोंक-झोंक’ शुरू हो जाती थी जो देश के लगभग हर घर की कहानी है। रोज़मर्रा की यह बातचीत अब इस बात का एक सशक्त प्रतीक बन गई है कि कूलिंग तकनीक कितनी विकसित हो चुकी है।
वर्टिस AI सीरीज के साथ अब एसी को बार-बार रिमोट से एडजस्ट करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। यह तकनीक न केवल समझती है, बल्कि कमरे की स्थिति को महसूस करती है, यूज़र की पसंद को सीखती है और बिना किसी समझौते के अलग-अलग पीढ़ी के लोगों के आराम के बीच अपने आप तालमेल बिठाती है।
इस प्रासंगिक कहानी के पीछे एक गहरी तकनीकी बुनियाद है। फिल्म का हर पल उस ‘AI’ द्वारा संचालित है, जिसे विशेष रूप से भारत के मौसम, इस्तेमाल के पैटर्न और बिजली की खपत के प्रति संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर इंजीनियर किया गया है। स्क्रीन पर दिखाई गई यह समझदारी केवल एक कॉन्सेप्ट नहीं है, बल्कि यह वोल्टास पोर्टफोलियो के डिजाइन का ही हिस्सा है—जो भारतीय वास्तविकताओं के लिए ‘AI-पावर्ड कूलिंग’ के एक नए युग की शुरुआत कर रही है।
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