नई दिल्ली (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। सबको साथ लेकर चलने और तकनीक के जरिए विकास की अपनी कोशिशों को आगे बढ़ाते हुए, टाटा ग्रुप ने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में ‘टाटा एआई सखी’ कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें दिखाया गया कि कैसे एआई ग्रामीण भारत की महिला कलाकारों और छोटे बिज़नेस चलाने वाली महिलाओं के लिए तरक्की और आत्मनिर्भरता का एक आसान और बहुत ही काम आने वाला ज़रिया बन सकता है।
यह कार्यक्रम स्मृति इरानी (अध्यक्ष, अलायंस फॉर ग्लोबल गुड, जेंडर इक्विटी एंड इक्वालिटी, सीआईआई) और आरती सुब्रमण्यन (कार्यकारी निदेशक और सीओओ, टीसीएस) की गरिमामयी उपस्थिति में एक विशेष एआई इम्पैक्ट वर्कशॉप के रूप में आयोजित किया गया। इसमें झारखंड, बिहार, ओडिशा, राजस्थान, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर जैसे छह राज्यों की 1,553 महिलाओं ने भाग लिया।
इन प्रतिभागियों को उनकी दक्षता के आधार पर तीन श्रेणियों—शिल्पकार, बुनियादी डिजिटल साक्षर और उन्नत डिजिटल साक्षर—में बांटा गया था। इस समूह में ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़ी कलाकार, ज़मीनी स्तर की उद्यमी, स्वयं सहायता समूह की लीडर्स और सामुदायिक सहायक शामिल थीं, जिन्होंने व्यावहारिक रूप से एआई की शक्ति को सीखा।
यह पहल एक गहन मेंटरशिप मॉडल पर आधारित थी, जिसमें हर पाँच प्रतिभागियों पर एक मेंटर नियुक्त किया गया था। ताकि उन्हें व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिल सके और वे अपनी समस्याओं का तुरंत समाधान पा सकें। अपने मेंटर्स की मदद से, प्रतिभागियों ने अपने ही फोन पर और अपनी स्थानीय भाषाओं में एआई का उपयोग करके उत्पादों के नए डिज़ाइन तैयार किए, मार्केटिंग सामग्री बनाई, सरकारी योजनाओं को समझा, दस्तावेजों का अनुवाद किया और आवेदन पत्र तैयार किए। कार्यक्रम के आखिर तक, सभी प्रतिभागियों ने मिलकर 2.5 घंटों में कुल 4,727 एआई-आधारित कार्य पूरे किए, जिसमें उन्नत डिजिटल साक्षर समूह ने 98% टास्क पूरे करने की शानदार सफलता दर हासिल की।
टीसीएस की कार्यकारी निदेशक और सीओओ आरती सुब्रमण्यन ने कहा, “देशभर से हजारों महिलाओं को ‘टाटा एआई सखी’ प्रोग्राम में जुड़ते देखना वाकई दिल को छू लेने वाला है। टाटा ग्रुप और टीसीएस में हम मानते हैं कि तकनीक तभी सार्थक है जब वह समाज की उन्नति में काम आए। हमारा मकसद ग्रामीण भारत की महिलाओं को एआई की ताकत से जोड़ना है, ताकि यह उनके लिए सिर्फ एक तकनीक नहीं, बल्कि उनकी रचनात्मकता और कमाई बढ़ाने का एक मज़बूत ज़रिया बने। हमारा सपना एक ऐसे आत्मनिर्भर भारत का है, जहाँ तकनीक हर किसी की तरक्की का रास्ता आसान बनाए।”
टाटा एआई सखी इमर्शन प्रोग्राम के दौरान तकनीक और परंपरा का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। जहाँ 447 पारंपरिक शिल्पकारों ने पट्टचित्र, मधुबनी और डोकरा जैसी कलाकृतियों के लिए नए डिज़ाइन, प्रोडक्ट फ़ोटो और नवाचार के विचार विकसित करने में एआई का उपयोग किया। इसी तरह, स्वयं सहायता समूहों की 940 महिलाओं ने वस्तुओं की पहचान करने, सरकारी योजनाओं को समझने, मार्केटिंग सामग्री तैयार करने और व्यावसायिक पत्राचार के लिए एआई की मदद ली। साथ ही, 166 उन्नत डिजिटल उद्यमी महिलाएं, जो पहले से ही प्रति माह लगभग ₹20,000 कमा रही हैं, उन्होंने स्वयं कुछ नया सीखने और अपने व्यवसाय के विस्तार के लिए एआई की संभावनाओं का पता लगाया।
आम सत्रों के उलट, टाटा एआई सखी प्रोग्राम का पूरा ज़ोर सिर्फ बताने पर नहीं बल्कि ‘करके दिखाने’ पर था। इसमें महिलाओं को खुद अपने हाथों से एआई का इस्तेमाल करना सिखाया गया, ताकि वे समझ सकें कि कैसे यह तकनीक उनके रोज़ के काम-काज और व्यापार को आसान बना सकती है। सत्रों के दौरान महिलाओं ने एआई की मदद से नए डिज़ाइन बनाना और अपने सामान की मार्केटिंग के लिए तस्वीरें व विज्ञापन तैयार करना सीखा। इसका मकसद यह है कि ये महिलाएं एआई की ताकत को अपनी रोज़ाना की ज़िंदगी में उतार सकें और अपने परिवार व समाज में बदलाव का चेहरा बनें।
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