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एएम ग्रुप और इन्वेस्ट यूपी के बीच एमओयू, 2030 तक पूर्ण क्षमता से संचालन का लक्ष्य

  • यीडा के सीईओ ने एएम ग्रुप के प्रतिनिधियों को सौंपा लेटर ऑफ इंटेंट
  • 289 एकड़ भूमि पर विकसित होगा कार्बन-फ्री डेटा सेंटर, हजारों उच्च-कुशल रोजगार सृजन की संभावना

अयोध्या (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी एआई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत एएम ग्रुप और राज्य सरकार की निवेश प्रोत्साहन एजेंसी ‘इन्वेस्ट यूपी’ के बीच सहमति बनी है। इसके तहत 1 गीगावॉट (GW) हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूट (HPC) एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) हब की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। गुरुवार को यीडा के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने एएम ग्रुप के प्रतिनिधियों को लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया है। 

289 एकड़ भूमि के लिए एलओआई जारी

यीडा द्वारा सेक्टर 28 में 114 एकड़ और सेक्टर 8डी में 175 एकड़, कुल 289 एकड़ भूमि के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) जारी किया गया है। यह अत्याधुनिक हब लगभग पांच लाख हाई-परफॉर्मेंस चिपसेट्स से लैस होगा और 24×7 कार्बन-फ्री ऊर्जा (पवन, सौर एवं पम्प्ड स्टोरेज) से संचालित होगा। यह परियोजना यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में स्थापित की जाएगी, जिसमें लगभग 25 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश प्रस्तावित है। इसे चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। वर्ष 2028 तक प्रथम चरण का संचालन शुरू होगा, जबकि 2030 तक पूर्ण 1 गीगावॉट क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

एआई और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग को नई गति

भारत में एआई और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की तेजी से बढ़ती मांग को देखते हुए यह हब वैश्विक हाइपरस्केलर्स, अनुसंधान संस्थानों, उद्यमों और संप्रभु एआई पहलों की जरूरतों को पूरा करेगा। एएमजी एआई लैब्स ‘एआई के लोकतंत्रीकरण’ के तहत ऊर्जा से लेकर इंटेलिजेंट टोकन तक संपूर्ण वैल्यू चेन विकसित करने की दिशा में कार्यरत है। यह सुविधा भारतीय डेवलपर समुदाय को अत्याधुनिक चिपसेट्स तक व्यापक पहुंच देगी, जिससे घरेलू और वैश्विक स्तर पर एआई समाधान विकसित करने में तेजी आएगी।

आर्थिक और औद्योगिक प्रभाव

इस परियोजना से बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित होने की संभावना है। साथ ही हजारों उच्च-कुशल रोजगार सृजित होंगे। हार्डवेयर निर्माण, सॉफ्टवेयर विकास और विशेषीकृत कूलिंग तकनीकों के क्षेत्र में स्थानीय इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार का मानना है कि यह पहल उत्तर प्रदेश को डिजिटल अर्थव्यवस्था के अग्रिम पंक्ति के राज्यों में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।