लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के निर्माण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बसंतकुंज से ठाकुरगंज तक पांच एलिवेटेड स्टेशनों के निर्माण का टेंडर जारी करने के बाद अब मेट्रो डिपो के निर्माण के लिए दूसरा बड़ा टेंडर भी जारी कर दिया गया है। इस डिपो के निर्माण की अनुमानित लागत लगभग ₹150 करोड़ है। 11 फरवरी 2026 को प्रस्तुत उत्तर प्रदेश के बजट के बाद मेट्रो परियोजना के प्री-कंस्ट्रक्शन कार्यों में भी तेजी लाई गई है, जिससे ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के कार्यों को गति मिलेगी।
यह डिपो ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर पर चलने वाली मेट्रो ट्रेनों के रखरखाव, जांच और खड़ी करने के लिए बनाया जाएगा। इसे आधुनिक और तकनीक आधारित सुविधा के रूप में विकसित किया जाएगा। यह डिपो लखनऊ मेट्रो के ट्रांसपोर्ट नगर डिपो की तर्ज पर बनाया जाएगा, जो पहले से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है।
डिपो में ट्रेन मेंटेनेंस के लिए लगेंगी ये आधुनिक मशीनें
- पिट व्हील लेथ मशीन (पहियों की मरम्मत के लिए)
- फुली ऑटोमैटिक सिंक्रोनाइज्ड पिट जैक मशीन (मेंटेनेंस के दौरान कोच को लिफ्ट करने और नीचे करने के लिए)
- फुली ऑटोमैटिक सिंक्रोनाइज्ड मोबाइल जैक मशीन (कोच को जरूरत के अनुसार आसानी से लिफ्ट करने के लिए)
- बोगी टर्न टेबल (बोगियों को एक ट्रैक से दूसरे ट्रैक पर शिफ्ट करने के लिए)
- ऑटोमैटिक ट्रेन वॉशिंग प्लांट (मेट्रो कोच की मशीन से तेज और प्रभावी सफाई के लिए)
- इलेक्ट्रिक बोगी शंटर (डिपो परिसर में ट्रेनों को नियंत्रित तरीके से आगे-पीछे करने के लिए)
- री-रेलिंग एवं रेस्क्यू वाहन (तकनीकी खराबी की स्थिति में कोच को जल्दी पटरी पर लाने के लिए)

इन सभी सुविधाओं से मेट्रो ट्रेनों का संचालन सुरक्षित और सुचारु बना रहेगा। वहीं पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। डिपो में सोलर पावर यूनिट लगाई जाएगी। वर्तमान में लखनऊ मेट्रो में 3.122 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है।
डिपो में ये सुविधाएं भी होंगी
- जीरो डिस्चार्ज सुविधा (डिपो से बाहर गंदा पानी नहीं छोड़ा जाएगा)
- ड्यूल प्लंबिंग सिस्टम (ताजे और रीसाइकल पानी के लिए अलग-अलग पाइपलाइन)
- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (वॉशरूम, किचन और सफाई से निकलने वाले पानी को साफ करने के लिए)
- एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ट्रेन वॉशिंग और मेंटेनेंस से निकलने वाले पानी के उपचार के लिए)
- संयुक्त STP-ETP यूनिट (जमीन और ऊर्जा की बचत के लिए दोनों प्लांट एकीकृत रूप में काम करेंगे, जिससे पानी का दोबारा उपयोग किया जा सके)
- जल भंडारण प्रणाली (डिपो में ट्रांसपोर्ट नगर डिपो की तरह व्यापक जल भंडारण व्यवस्था भी होगी)
गौरतलब है कि 12 किलोमीटर लंबा ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर चारबाग से वसंतकुंज तक बनाया जाएगा। इसमें 7 भूमिगत और 5 एलिवेटेड स्टेशन होंगे। इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹5801.05 करोड़ है और निर्माण शुरू होने के बाद इसे 5 वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है।
इस अवसर पर यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहा, “दूसरे बड़े टेंडर के जारी होने और प्री-कंस्ट्रक्शन कार्यों में तेजी से लखनऊ मेट्रो का ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर कार्यान्वयन की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। यह शहर को एक मजबूत और बेहतर सार्वजनिक परिवहन प्रणाली प्रदान करेगा।”
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