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एसआईआर इतना सख्त कि नेताजी जीवित होते तो उन्हें भी नोटिस मिलता : ममता बनर्जी

कोलकाता : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का यह पुनरीक्षण इतना सख्त हो गया है कि यदि नेताजी सुभाष चंद्र बोस आज जीवित होते तो उन्हें भी सुनवाई के लिए नोटिस भेज दिया जाता।ममता बनर्जी कोलकाता के रेड रोड पर नेताजी की 129वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियों के नाम पर सुनवाई के नोटिस अंधाधुंध तरीके से जारी किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें पूरा संदेह है कि नेताजी जीवित होते तो उन्हें भी सुनवाई के लिए बुलाया जाता, और यह भी याद दिलाया कि पहले ही नेताजी के परपोते को नोटिस भेजा जा चुका है।मुख्यमंत्री ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर भारत के इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश करने और नेताजी के योगदान को कमतर आंकने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि योजना आयोग नेताजी की परिकल्पना थी, लेकिन मौजूदा केंद्र सरकार ने उसे समाप्त कर नीति आयोग बना दिया, जिसके उद्देश्य और भूमिका को लेकर आम लोगों में स्पष्टता नहीं है।ममता बनर्जी ने नेताजी के जन्मदिन को राष्ट्रीय अवकाश घोषित न किए जाने को भी दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह और भी दुखद है कि देश के लोग आज तक नेताजी की मृत्यु की सही तारीख तक नहीं जानते। एसआईआर को लेकर अपनी आपत्ति दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने राज्यव्यापी आंदोलन का आह्वान किया और दावा किया कि इस प्रक्रिया के कारण आम लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस पुनरीक्षण प्रक्रिया से लोगों को जो कष्ट हुआ है, उसके लिए जिम्मेदार लोगों को किसी न किसी दिन इसका जवाब देना होगा, हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति या संस्था का नाम नहीं लिया।मुख्यमंत्री ने एसआईआर को लेकर मौतों और आत्महत्याओं से जुड़ने के गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में अब तक करीब 110 लोगों की मौत हो चुकी है और डर के कारण रोजाना तीन या चार लोग आत्महत्या कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग के खिलाफ मामला क्यों नहीं दर्ज किया जाना चाहिए और कहा कि इसके लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदारी लेनी होगी।——————-