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फलों के कचरे से बनी वेजिबैक्ट एन तकनीक पर एएमए हर्बल को पेटेंट

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। एएमए हर्बल ग्रुप को कपड़ा उद्योग के लिए विकसित अपनी महत्वपूर्ण तकनीक ‘वेजिबैक्ट एन’ के लिए भारत सरकार से पेटेंट मिल गया है। यह पेटेंट उस प्रक्रिया के लिए दिया गया है जिसमें फल के कचरे से एंटीबैक्टीरियल और डियोडोरेंट फॉर्मुलेशन तैयार किया जाता है और इसे कपड़ों पर सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।

कंपनी की यह तकनीक पूरी तरह भारत में विकसित की गई है। एएमए हर्बल का मानना है कि कपड़ा उद्योग को ऐसे विकल्पों की जरूरत है जो सेहत के लिहाज़ से साफ हों, कपड़ों पर सुरक्षित हों और पर्यावरण पर कम असर डालें। वेजिबैक्ट एन इसी दिशा में एक मजबूत कदम है, क्योंकि यह हानिकारक रसायनों की जगह प्रकृति-आधारित सॉल्यूशन देता है। यह तरीका उन ब्रांडों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है जो कपड़ा उत्पादन में जिम्मेदार और सुरक्षित विकल्प अपनाना चाहते हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए एएमए द्वारा कॉर्पोरेट ऑफिस से लेकर बच्चों और घर में इस्तेमाल होने वाले टेक्सटाइल का निर्माण करता है।

एएमए हर्बल ने इसे सिर्फ कंपनी की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की ओर से एक सकारात्मक संदेश बताया है कि यहां तैयार होने वाली पर्यावरण हितैषी तकनीकें अब वैश्विक स्तर पर भी मान्यता पा रही हैं। यह दर्शाता है कि हमारी वैज्ञानिक सोच और संसाधन अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह मजबूत कर सकते हैं।

पहले कपड़ों को धुलने के लिए जो प्रॉडक्ट आते थे, उनमें मेटल बेस होने के कारण उनमें खतरनाक नैनो पार्टिकल्स होते थे जो त्वचा में जाकर खून में मिल जाते थे और इससे शरीर में दिक्कतें होती थीं। कपड़ों के धुलने पर ये पार्टिकल्स पानी में चले जाते थे और जल जीवन को नुकसान पहुंचाते थे क्योंकि सूक्ष्म जीव इसमें मरने लगते थे। 

वेजिबैक्ट एन एक प्राकृतिक और मेटल फ्री प्रॉडक्ट है। इसका भारत में ही पेटेंट भी है। इसकी लागत बहुत कम है। यह कपड़ों को लंबे समय तक ताजा रखने में मदद करता है। यह सेब, गन्ना, अंगूर और संतरे जैसे फलों के कचरे से बना है और कपड़ों पर एक हल्की परत बनाता है जो बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया को रोकती है। इससे कपड़ों में आने वाली गंध कम होती है और कपड़े ज्यादा समय तक साफ महसूस होते हैं। इसका असर 40 से अधिक धुलाइयों तक बना रहता है, जिससे बार-बार कपड़ों को धोने की जरूरत घटती है। यह 98 प्रतिशत प्लांट आधारित है और पर्यावरण के अनुकूल है। 

कपड़ा बनने में या अंतिम लॉन्ड्री रिंस में इसे आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए पहले से मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर ही काम आता है, इसलिए कोई नया खर्च नहीं होता। यह रोजमर्रा के कपड़ों, बच्चों के कपड़ों, इनरवियर और होम टेक्सटाइल में समान रूप से उपयोगी है। जिन देशों में पानी की समस्या है, वहां यह प्रॉडक्ट बहुत फायदेमंद हो सकता है। इसके साथ ही फलों के कचरे का कलेक्शन करने वालों को इससे रोज़गार भी मिलता है।

एएमए हर्बल ने कहा कि पेटेंट मिलने से उनका भरोसा और मजबूत हुआ है। कंपनी का लक्ष्य आगे भी ऐसे समाधान विकसित करना है जो कपड़ा उद्योग को सुरक्षित, टिकाऊ और प्रकृति के अनुकूल रास्ते पर आगे बढ़ाने में मदद करें। यह पेटेंट उनके लिए आगे की और बड़ी योजनाओं की प्रेरणा है।

इस अवसर पर एएमए हर्बल के को फाउंडर और सीईओ यावर अली शाह ने कहा, “प्राकृतिक उत्पादों के फायदे को लेकर लोगों को जागरूक करने और उन्हें लाभान्वित करने के अपने विजन को ध्यान में रखते हुए हमने वेजिबैक्ट को तैयार किया है। यह बिना किसी मेटलिक कंटेंट वाला लेकिन उतना ही असरदार प्रोडक्ट है। इतना ही नहीं वेजिबैक्ट मेटलिक कंटेंट से तैयार प्रोडक्ट्स की तुलना में किफायती भी है। यही खूबियां इसकी स्वीकार्यता बढ़ाती हैं और कॉस्ट इफेक्टिव होने के कारण इससे जुड़े उद्योगों में किसी भी तरह की समस्या नहीं होगी।