- बगैर किसी दुष्प्रभाव वाला वज़न घटाने का नेचुरल उपाय
- नेचुरल GLP -1 विज्ञान पर आधारित, ₹2000 प्रति माह की किफायती कीमत पर उपलब्ध
मुंबई (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। भारत स्वास्थ्य संबंधी एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है और वह है हर आयु वर्ग में मोटापे की दर में बढ़ोतरी। इससे मधुमेह (डायबिटीज), हृदय संबंधी (कार्डियोवैस्कुलर) बीमारियों और कैंसर से जुड़ी प्रारंभिक मृत्यु दर चिंताजनक स्तर पर बढ़ रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) के अनुसार, लगभग 24% महिलाएं और 22.9% पुरुष अब मोटापे से ग्रस्त हैं।
भारत में एक अग्रणी गट हेल्थ (आंत्र स्वास्थ्य) ब्रांड, द गुड बग ने वज़न घटाने के लिए उल्लेखनीय वैज्ञानिक नवोन्मेष पेश किया है। द गुड बग का उन्नत मेटाबोलिक सिस्टम नेचुरल GLP -1 विज्ञान के लिहाज़ से ताज़ातरीन उपलब्धि है जो वज़न घटाने के लिए वहनीय और विज्ञान-समर्थित समाधान प्रदान करता है। इस सफलता को वैज्ञानिक रूप से मान्य किया गया है, जिसमें क्लिनिकल परीक्षण के आंकड़ों से पता चला है कि 90 दिन में वज़न में 12.01% की कमी आई, कमर 9.64% पतली हुई और बीएमआई में 12.14% की कमी आई।
द गुड बग के सह-संस्थापक, केशव बियानी ने कहा, “अत्याधुनिक गट माइक्रोबायोम अनुसंधान के ज़रिये विकसित, एडवांस्ड मेटाबोलिक सिस्टम चिकित्सकीय रूप से परखे गए प्रोबायोटिक और प्रीबायोटिक का प्रोप्राइटरी मिश्रण है जो नेचुरल GLP -1 एक्टिवेशन के ज़रिये वज़न घटाने वाली दवाओं से जुड़े आम दुष्प्रभावों के बगैर मोटापा कम करता है। वैज्ञानिक नैदानिक परीक्षणों के माध्यम से मान्य इस उत्पाद के लॉन्च के साथ, हमें अपनी तरह का पहला वैश्विक नवोन्मेषी समाधान पेश करने पर गर्व है जो 90 दिनों में 12% तक वज़न कम करता है। गट हेल्थ खंड में अग्रणी के तौर पर, हमने पहचाना कि मोटापे की मुख्य वजह है, गट बायोम संरचना में असंतुलन। इसके लिए के प्रभावी समाधान तैयार के लिए वर्षों के अनुसंधान एवं विकास के ज़रिये अंततः प्रभावी तरीके से वज़न घटाने के लिए स्वाभाविक रूप से GLP -1और जीआईपी को बढ़ाने में मदद कर सकता है। यह हमारे लिए एक बड़ी वैज्ञानिक सफलता है जिसे भारत में खोजा तथा विकसित किया गया और बनाया गया है। यह वैश्विक स्तर पर वज़न कम करने के प्रक्रिया को पुनर्परिभाषित करेगा।
फार्मास्यूटिकल GLP -1 एगोनिस्ट से आमतौर पर दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट) और इसकी आदत पड़ जाने का डर रहता है। लेकिन इसके विपरीत, द गुड बग का एडवांस्ड मेटाबोलिक सिस्टम शरीर में GLP -1 के स्तर को स्वाभाविक रूप से बढ़ाता है, आंत में पुरानी सूजन को कम करता है, जिससे भूख नियंत्रित होती है और वज़न और स्वास्थ्य के स्थायी परिणाम देने के लिए लालसा कम होती है। स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों का भरोसेमंद यह उत्पाद, वज़न घटाने के लिए वहनीय और प्राकृतिक दृष्टिकोण प्रदान करता है। द गुड बग इस उत्पाद को अमेरिका सहित वैश्विक बाज़ारों में ले जाने की योजना बना रहा है।
मणिपाल हॉस्पिटल्स के सीनियर कंसल्टेंट और इस ट्रायल के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर, डॉ. एम.के.एन. मनोहर ने कहा, “क्लिनिकल परीक्षणों में, परिणाम न केवल सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण थे, बल्कि चिकित्सकीय रूप से भी सार्थक थे। इसकी तुलना अब तक उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ दवाओं से किया जा सकती है। परीक्षण में जो बात सामने आई वह थी खाने की लालसा में अपने-आप कमी दर्ज हुई और तृप्ति बढ़ी। 90% से अधिक लोगों ने कहा कि उनकी अधिक खाने की लालसा कम हुई; 95% ने भूख दबने की बात कही। यह सिंथेटिक GLP -1 दवाओं के साथ देखी गई चीज़ों को दर्शाता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई बड़ी प्रतिकूल घटना नहीं हुई और परीक्षणों में भूख, तृप्ति और ऊर्जा के स्तर में स्पष्ट सुधार दिखा।”
उन्होंने कहा, “मोटापा एक मूक महामारी बन गया है, जिसे कोविड ने और बढ़ा दिया। जीवन शैली में बदलाव और सर्जरी जैसे उपचारों के बीच बहुत फर्क है। वैज्ञानिक प्रमाण गट के माइक्रोबायोम को मेटाबॉलिक (चयापचय) स्वास्थ्य और वज़न के वहनीय प्रबंधन की आधारशिला के रूप में पेश कर रहे हैं। सिंथेटिक हस्तक्षेपों से अक्सर दुष्प्रभावों सामने आते हैं, लेकिन द गुड बग जैसा विस्तृत शोध आधारित प्रोबायोटिक फॉर्मूलेशन गट बैक्टीरिया और शरीर के मेटाबोलिज्म के बीच प्राकृतिक ताल-मेल का लाभ उठाता है।”
मात्र ₹2000 प्रति माह या तीन महीने के लिए ₹5000 पर उपलब्ध, द गुड बग का समाधान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और खुदरा दुकानों पर उपलब्ध है। द गुड बग शोध-आधारित प्रभावकारिता और पारदर्शिता पर ध्यान केंद्रित कर समग्र कल्याण में गट हेल्थ की भूमिका को पुनर्परिभाषित कर रहा है।
द गुड बग के सह-संस्थापक, प्रभु कार्तिकेयन ने कहा, “हम न केवल पाचन स्वास्थ्य पर बल्कि मेटाबॉलिक स्वास्थ्य, महिलाओं के स्वास्थ्य और संज्ञानात्मक तंदुरुस्ती पर भी माइक्रोबायोम विज्ञान के प्रभाव को समझते हैं। जैसे-जैसे माइक्रोबायोम पर शोध बढ़ रहा है, यह स्वास्थ्य सेवा के एक नए आयाम को सामने लाता है और हम इसकी क्षमता का लाभ उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम उन्नत प्रोबायोटिक नवोन्मेष के ज़रिये उपभोक्ता स्वास्थ्य समाधान बनाने का निरंतर प्रयास करते हैं और लोगों को विज्ञान-आधारित उत्पादों के माध्यम से अपने स्वास्थ्य पर नियंत्रण रखने के लिए सशक्त बनाते हैं। हम यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि यह नया लॉन्च देश में मोटापे के परिदृश्य में कैसे बदलाव लाता है।”
मोटापा एक बड़ी परेशानी के रूप में उभरा है और इस उभरते परिदृश्य के मद्देनज़र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में मोटापा विरोधी अभियान शुरू किया है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के आंकड़ों के अनुसार, 2021 में 180 मिलियन से अधिक भारतीयों को अधिक वज़न या मोटापे के दायरे में रखा गया था, लेकिन ताज़ा अध्ययन के मुताबिक यह संख्या 2050 तक बढ़कर 400 मिलियन तक हो सकती है। यह द गुड बग जैसे प्रभावी, चिकित्सकीय रूप से सिद्ध और किफायती समाधानों की तत्काल आवश्यकता को और उजागर करता है।