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श्रीमदभागवत कथा संग रासलीला के प्रसंगों से कृष्णमय हुआ पंडाल

  

डालीगंज के प्राचीन श्री बंदी माता मंदिर का 41वां वार्षिक अनुष्ठान

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। वैदिक मंत्रोच्चार और शंख की ध्वनियों के बीच श्री सप्तचंडी महायज्ञ में श्रद्धालुओं ने आहुतियां देकर जनकल्याण की कामना हुई। श्रद्धालुओं ने श्रीमद्भागवत कथा सुनी और मथुरा के कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण के प्रसंगों का प्रभावपूर्ण मंचन किया। डालीगंज के प्राचीन श्री बंदी माता मंदिर के 41वें वार्षिक अनुष्ठान के दूसरे दिन की शुरुआत सुबह श्री सप्तचण्डी महायज्ञ से हुई। दिन में श्रीमद भागवत कथा और शाम को रासलीला में श्रद्धालुओं की खूब भीड़ रही। सात दिवसीय कार्यक्रम ब्रह्मलीन श्री महंत कपिलेश्वर पुरी जी महाराज की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है।

शाम को श्रीमदभावगत कथा का वृंदावन धाम की श्रीमद्भगवद व्यास रोली शास्त्री ने बखान किया। उन्होंने शिवचरित्र, दक्ष का यज्ञ, सती जी का जलना व पुन: जन्म लेना और शिव-सती विवाह के प्रसंग सुनाए। इसके बाद मथुरा के नित्यानंद और साथी कलाकारों ने पारंपरिक रासलीला का मंचन किया। कलाकारों ने रासलीला में श्रीकृष्ण जन्म से लेकर कंस का अत्याचार, देवकी विदाई, देवकी पुत्रों का वध जैसे प्रसंगों से पूरा वातावरण कृष्णमय कर दिया।

कार्यक्रम में मुख्य संयोजक पार्षद रणजीत सिंह, श्री बंदी माता मंदिर अखाडा समिति की संगठन मंत्री और पंचदशनाम जूना अखाडा की महंत- श्री महंत पूजापुरी, पूर्व पार्षद रेखा रोशनी, बंदीमाता मंदिर अखाड़ा समिति के मंत्री महंत मनोहर पुरी, श्री पंचदशनाम जूना अखाडा के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष देवेंद्र पुरी जी महाराज सहित अन्य साधुसंत मौजूद रहे। सप्तचंडी यज्ञ बंदीमाता मंदिर महाराज रोशनपुरी, जूना अखाड़ा के थानापुरी महंत राजपुरी, सप्तचण्डी यज्ञाचार्य महंत शिवानन्द पुरी व आचार्य प्रदीप मिश्र सहित अनेक  ब्राह्मणों के सानिध्य में यज्ञ हुआ।