Friday , July 19 2024

दर्शकों को मार्मिकता में डूबो गई “औरत की जंग”

दूसरा ‘उर्मिल रंग महोत्सव’ प्रारंभ

महिला लोक कलाकार के संघर्ष की गाथा ’औरत की जंग’

राज बिसारिया उर्मिल रंग सम्मान से अलंकृत

लखनऊ। जमीन से जुड़ी एक बेटी जो जीवन यापन के लिए लोक कला नौटंकी को आत्मसात करती है, उसकी संघर्ष गाथा को दर्शाती रंग प्रस्तुति ’औरत की जंग’ दर्शकों को मार्मिकता में डूबो गई। सुप्रसिद्ध लेखक, रंगनिर्देशक, व्यंग्यकार उर्मिलकुमार थपलियाल की स्मृति में रविवार से डा. उर्मिलकुमार थपलियाल फाउण्डेशन द्वारा आयोजित प्रारम्भ दूसरे ‘उर्मिल रंग महोत्सव’ में आसिफ अली की लिखी मूल रचना और डा. थपलियाल द्वारा निर्देशित यह प्रस्तुति रितुन थपलियाल मिश्रा के निर्देशन में फिर से संयोजित कर मंच पर थी। इस अवसर पर प्रबुद्ध रंगनिर्देशक राज बिसारिया को बतौर मुख्य अतिथि डा.अनिल रस्तोगी और संयोजक सत्येंद्र मिश्र ने स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र भेंटकर पहले उर्मिल रंग सम्मान से अलंकृत किया। यह सम्मान राज बिसारिया की पत्नी किरन राज बिसारिया ने ग्रहण किया। उत्सव में 17 जुलाई को रंगनाद संस्था रितेश कुमार अस्थाना के निर्देशन में विभांशु वैभव के लिखे कर्ण के चरित्र पर आधारित नाटक ‘महारथी’ का मंचन होगा। 

मार्च 2018 में दुनिया के आठवें और भारत में हुए पहले थियेटर ओलम्पिक में मंचित होकर चर्चित हो चुकी इस नाटिका में दिखाया गया है कि नौंटकी में जो प्रारंभिक महिलाएं इस क्षेत्र में आई, उन्होंने पुरुषों वाली इस पेशेवर कला में सफलता के कई कीर्तिमान बनाए। मर्दों की बेरहम दुनिया से लगातार धोखा खाने के बावजूद उन्होंने इस कला को नई ऊंचाई दी। ऐसी ही एक महिला कलाकार चम्पाबाई के संघर्ष और सफलता की कहानी कहते इस नाटक में मार्मिकता और भावुकता भरे कई उप पाठ हैं। निजी पेशेवर और पारिवारिक तनाव के माध्यम से कलाकार महिला के जीवन की कई परतें खुलती हैं। इस आईने में आज के समय में एक कलाकार की नियति और पेशेवर रिश्तों के मायने और उसकी कला के सरोकारों को देख सकते हैं। कैसे वह नौटंकी में शामिल हुई, प्रेम और विवाह में धोखा खाया, निरंतर संघर्ष किया, फिर बड़ी कलाकार बनी और शोहरत के शिखर पर पहुंची। सारे चरित्र समाज से ही रचे गये हैं। मूल नाटक के अतिरिक्त डा.थपलियाल ने इसमें पुरानी बंदिशों और दादरा रचनाओं का भी सुंदर समावेश किया है।

नाटक में बड़ी और युवा चंपाबाई बनी अर्चना शुक्ला व दीप्ति सक्सेना के साथ चमेली वा रितुन थपलियाल मिश्रा, देवी- हर्षिता मौर्य, रघु पंडित- आयुष श्रीवास्तव, बिजनौरी लाला तथा तारामती व परसादी सेठ- प्रवीण श्रीवास्तव, बसंती व सेठानी- रोजी मिश्रा, चुमकी व मालती- प्रख्याति जयसवाल, कनछेदी व किशन लाल- सागर, सूत्रधार व हरिश्चंद्र- सिकंदर यादव, रोहित व परदेसिया- ओमकार पुष्कर, खान साहब- अभ्युदय तिवारी, जगमोहन अंकित श्रीवास्तव, जसवंत सिंह व विष्णु- अक्षयदीप गौड, घुरऊ- प्रवर द्विवेदी और कम्मो- तान्या तिवारी मंच पर उतरे। 

नेपथ्य में संगीत संयोजन- मीता पंत का, मार्गदर्शन- पीयूष पाण्डेय का, गायन- मीता पन्त व हर्षिता आर्या का, प्रकाश संयोजन व संचालन- देवाशीष मिश्र का, वेशभूषा- रोजी दूबे मिश्रा की, मंच सामग्री- तान्या, अभ्युदय, प्रखर व ओमकार के द्वारा, मंच निर्माण- मधुसूदन व नंदकिशोर का, मंच प्रबंधन- अंकित का और प्रस्तुति नियंत्रण- प्रवीण श्रीवास्तव का रहा।