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बच्चों ही नहीं वयस्कों के लिए भी ज़रूरी है टीकाकरण

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। टीकाकरण केवल बच्चों तक सीमित विषय नहीं है। बढ़ती उम्र के साथ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है और कई ऐसी बीमारियां घेर लेती हैं, जिनसे समय पर टीका लगवाकर बचा जा सकता है। अक्सर देखा गया है कि 50 या 60 की उम्र के बाद फ्लू, निमोनिया, शिंगल्स जैसी बीमारियां गंभीर रूप ले लेती हैं और कई बार अस्पताल में भर्ती तक की नौबत आ जाती है। इनमें से कई स्थितियां समय पर टीकाकरण से टाली जा सकती हैं। बावजूद इसके, देश में वयस्क टीकाकरण को लेकर जागरूकता बेहद कम है और बड़ी संख्या में लोग इस सरल लेकिन असरदार बचाव से वंचित रह जाते हैं।

भारत को भले ही एक युवा देश के रूप में देखा जाता हो, जहाँ औसत आयु लगभग 28 वर्ष है, लेकिन इसके साथ-साथ देश की जनसंख्या संरचना तेज़ी से बदल भी रही है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक भारत में बुज़ुर्गों की संख्या 19.3 करोड़ तक पहुँच जाएगी, जो कुल आबादी का लगभग 13 प्रतिशत होगी। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के अनुसार, 2022 से 2050 के बीच 80 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या में 279 प्रतिशत तक की वृद्धि होगी, जो यह स्पष्ट करता है कि भारत में स्वस्थ वृद्धावस्था को बढ़ावा देने के लिए ठोस पहल की अत्यंत आवश्यकता है।

बढ़ती उम्र के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता स्वाभाविक रूप से कम होती जाती है, जिससे बुज़ुर्ग संक्रमणजनित बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। पहले से मौजूद बीमारियाँ (को-मॉर्बिडिटी) इस जोखिम को और बढ़ा देती हैं। इसी कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी जीवन के हर चरण में टीकाकरण को स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए बेहद आवश्यक बताया है।

इसके बावजूद भारत में वयस्क टीकाकरण को लेकर जागरूकता बेहद कम है। देश में किए गए विभिन्न अध्ययनों से सामने आया है कि 80 प्रतिशत से अधिक वयस्कों को यह जानकारी ही नहीं है कि बचपन के बाद भी टीकाकरण की आवश्यकता होती है, और आज भी बड़ी संख्या में लोग टीकाकरण को केवल बच्चों तक सीमित मानते हैं। न केवल आम जनता बल्कि चिकित्सा एवं स्वस्थ्य के क्षेत्र से जुड़े लोगों में भी वयस्क टीकाकरण को ले कर जागरूकता की अत्यधिक कमी है जिससे वयस्क टीकाकरण सेंटर की आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। 

इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए अपोलो हॉस्पिटल लखनऊ ने वयस्कों के लिए विशेष इम्यूनाइजेशन सेंटर की शुरुआत की है। अपोलो का यह नया इम्यूनाइजेशन सेंटर वयस्कों और बुज़ुर्गों को एक ही जगह पर वैज्ञानिक सलाह, सही उम्र के अनुसार विशेषज्ञों की निगरानी में सुरक्षित टीकाकरण की सुविधा दे रहा है। 

बढ़ती उम्र में होने वाली कई जटिलताएं जैसे लंबे समय तक कमजोरी, काम करने की क्षमता में कमी और बार बार अस्पताल के चक्कर, टीकाकरण से काफी हद तक रोकी जा सकती हैं। इससे न केवल व्यक्ति स्वस्थ रहता है, बल्कि परिवार पर पड़ने वाला मानसिक और आर्थिक बोझ भी कम होता है। टीकाकरण कोई एक बार का पड़ाव नहीं, बल्कि पूरी ज़िंदगी की सुरक्षा है। यदि समय रहते वयस्क और बुज़ुर्ग टीकाकरण कराएं, तो कई गंभीर बीमारियों व अस्पताल में भर्ती जैसी परेशानियों को रोका जा सकता है।

इस वैक्सीनेशन सेण्टर का उद्घाटन अपोलो हॉस्पिटल लखनऊ के चेयरमैन इंटरनल मेडिसिन प्रो. आरसी आहूजा द्वारा किया गया। 

अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के एमडी और सीईओ डॉ. मयंक सोमानी ने कहा, “उम्र बढ़ने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, ऐसे में वयस्क टीकाकरण बेहद ज़रूरी हो जाता है। अपोलो में शुरू किया जा रहा इम्यूनाइजेशन सेंटर इसी सोच का हिस्सा है, ताकि लोग बीमारी होने के बाद नहीं, बल्कि पहले ही खुद को सुरक्षित कर सकें और एक सक्रिय, स्वस्थ जीवन जी सकें। इस वैक्सीनेशन सेण्टर में फ्लू, न्यूमोकोकल, शिंगल्स (हर्पीस जोस्टर), टेटनस और डिप्थीरिया, एच पी वी, हेपेटाइटिस ए व बी आदि जैसे जरूरी टीकों के बारे में न केवल जानकारी दी जाएगी, बल्कि व्यक्ति की उम्र, लाइफस्टाइल और पहले से मौजूद बीमारियों को ध्यान में रखकर व्यक्तिगत सलाह एवं टीकाकरण की सुविधा भी दी जाएगी।”