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आम जनता के लिए बैरिकेडिंग, महापौर के लिए खुला रास्ता! पुलिस के डायवर्जन पर सवाल

लखनऊ (शम्भू शरण वर्मा/टेलीस्कोप टुडे)। राजधानी में यातायात व्यवस्था सुधारने और आम जनता को जाम से राहत दिलाने के नाम पर पुलिस द्वारा जगह-जगह की जा रही बैरिकेडिंग और रूट डायवर्जन अब लोगों के लिए राहत के बजाय मुसीबत बनता जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि यातायात नियमों और डायवर्जन की सख्ती आम नागरिकों के लिए तो दिखाई देती है, लेकिन खास लोगों के आने-जाने पर यही व्यवस्था पलभर में बदल जाती है। इसका नजारा शुक्रवार सुबह जानकीपुरम स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे से श्री लक्ष्मण गौशाला की ओर जाने वाले मार्ग पर देखने को मिला, जहां महापौर के कार्यक्रम में पहुंचने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग हटा दी, लेकिन उनके लौटते ही रास्ता फिर से बंद कर दिया गया।

दरअसल, नगर निगम की ओर से श्री लक्ष्मण गौशाला के बगल में करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से पब्लिक लाइब्रेरी का निर्माण कराया जाना प्रस्तावित है। शुक्रवार सुबह इसके भूमिपूजन कार्यक्रम में महापौर सुषमा खर्कवाल को शामिल होना था। महापौर के आगमन को देखते हुए पुलिस ने इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे से गौशाला की ओर जाने वाले मार्ग पर लगाई गई बैरिकेडिंग हटा दी, जिससे वाहन आसानी से कार्यक्रम स्थल तक पहुंच सके। लेकिन जैसे ही महापौर कार्यक्रम में शामिल होकर वापस लौटीं, पुलिस ने एक बार फिर उसी मार्ग पर बैरिकेडिंग लगा दी।

इस पूरी कवायद ने यातायात पुलिस की डायवर्जन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि महापौर भी उस वैकल्पिक मार्ग से कार्यक्रम स्थल तक पहुंच सकती थीं, जिसे डायवर्जन के बाद आम जनता के लिए निर्धारित किया गया है। इसके बावजूद उनके लिए बैरिकेडिंग हटाई गई और आम लोगों के लिए रास्ता दोबारा बंद कर दिया गया।

वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे से श्री लक्ष्मण गौशाला की ओर जाने वाले मार्ग पर बैरिकेडिंग के चलते उन्हें अनावश्यक रूप से घूमकर जाना पड़ता है। पुलिस का तर्क है कि इस मार्ग पर यातायात का दबाव और जाम की आशंका देखते हुए डायवर्जन किया गया है। हालांकि शुक्रवार सुबह बैरिकेडिंग हटने के दौरान भी इस मार्ग पर जाम की स्थिति नजर नहीं आई।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि यदि बैरिकेडिंग हटने से यातायात बाधित नहीं हुआ तो फिर आम जनता के लिए रास्ता बंद रखने की जरूरत क्या है? क्या यातायात नियम और डायवर्जन केवल आम नागरिकों के लिए हैं, जबकि खास लोगों की सुविधा के लिए व्यवस्था तत्काल बदल दी जाती है? पुलिस की इस दोहरी व्यवस्था ने लोगों के बीच नाराजगी और असमानता की भावना को बढ़ा दिया है।