Monday , October 26 2026

चरित्र निर्माण और अनुशासन से होगा राष्ट्र निर्माण : राज्यपाल आर्लेकर

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। “शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना, नौकरी पाना या एक सफल करियर बनाना नहीं है। शिक्षा को पाठ्यपुस्तकों और कक्षाओं से आगे बढ़कर अनुशासन, समर्पण और सबसे महत्वपूर्ण, चरित्र का निर्माण करना चाहिए। जब हम चरित्र का निर्माण करते हैं, तो हम जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण करते हैं और राष्ट्र निर्माण स्वतः ही होता है। उक्त बातें तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी, पुणे के 8वें दीक्षांत समारोह में स्नातकों को संबोधित करते हुए कही।

समारोह में वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी गोवा के मानद कुलाधिपति एवं यूनिवर्सिटी एट बफ़ेलो (यूएसए) के अध्यक्ष प्रो. डॉ. सतीश के. त्रिपाठी, माईर्स एमआईटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के प्रबंध न्यासी व कार्यकारी अध्यक्ष और एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल वी. कराड तथा एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के कुलपति प्रो. (डॉ.) रविराजा एन. सीताराम सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

भारत के भविष्य को आकार देने में युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए मुख्य अतिथि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा, “आज की ‘जेन जी हमारे देश की वास्तविक युवा शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है। भारत का भविष्य आपके हाथों में है और आपके ज्ञान, कौशल, अनुभव तथा विशेषज्ञता का योगदान समाज और राष्ट्र को मिलना चाहिए। जैसे-जैसे भारत ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहा है, हर युवा को खुद से पूछना चाहिए कि वे इस परिवर्तन में कैसे अपना योगदान दे सकते हैं। यदि हम अपना जीवन न केवल अपने लिए बल्कि समाज और देश के बड़े हित के लिए समर्पित करते हैं, तभी शिक्षा सही मायनों में अपना उद्देश्य पाती है।”

एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के 8वें दीक्षांत समारोह में स्नातक छात्रों की शैक्षणिक उपलब्धियों का जश्न मनाने और उनकी शैक्षिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर अंकित करने के लिए विश्वविद्यालय नेतृत्व, संकाय सदस्य, स्नातक छात्र, अभिभावक और विशिष्ट अतिथि एक साथ आए। इस समारोह ने शिक्षा, नवाचार, नेतृत्व और विश्व शांति के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दोहराया। 

समारोह का मुख्य आकर्षण 17 पीएचडी शोधार्थियों सहित 7,806 स्नातक छात्रों को उपाधि प्रदान करना था, जिसमें विभिन्न संकायों में उनके शैक्षणिक योगदान को मान्यता दी गई। डॉक्टरेट स्नातकों को उनके शोध योगदान के लिए सम्मानित किया गया। समारोह में 345 पदक विजेताओं का भी सम्मान किया गया, जिनमें 135 स्वर्ण पदक विजेता, 105 रजत पदक विजेता और 105 कांस्य पदक विजेता शामिल थे। स्कूल ऑफ साइंस एंड एनवायरनमेंटल स्टडीज की धनश्री राजेंद्र म्हसे को उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धि के लिए ‘फाउंडर प्रेसिडेंट मेडल’ से सम्मानित किया गया।