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महिला सशक्तीकरण से कृषि विकास को नई दिशा, ‘2 मिलियन वूमेन’ के दो साल पूरे

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। दो साल पहले, कॉर्टेवा एग्रीसाइंस ने एक सरल और पूरे यकीन के साथ 2मिलियनवूमेनपहल की शुरुआत की थी, जब महिलाएं आगे बढ़ेंगी, तब खेती-किसानी भी आगे बढ़ेगी। आज, वह विश्वास हकीकत में बदल रहा है। पूरे ग्रामीण भारत में महिलाएं अपनी आजीविका यानि कमाई को मजबूत कर रही हैं। वे खेती के बेहतर और नए तरीके अपना रही हैं। वे नए-नए व्यवसाय शुरू कर रही हैं। वे आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाल रही हैं और अपने समाज में बदलाव ला रही हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की जो शुरुआत एक वादे के साथ हुई थी, वह आज एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुकी है। यह आंदोलन भारत के पूरे कृषि क्षेत्र में एक ऐसा बदलाव ला रहा है जो लंबे समय तक बना रहेगा।

सुब्रतो गीद (प्रेसिडेंट, एपीएसी कॉर्टेवा एग्रिसेंस) ने कहा, महिलाएं लंबे समय से भारतीय कृषि की रीढ़ रही हैं। 2मिलियनवूमेनपहल के जरिए हमने यह सुनिश्चित करने का काम किया है कि उनके योगदान को पहचान और सहयोग मिले। महिलाओं को हुनर, अवसर और सही मंच देकर, हमने उन्हें लीडर्स, बिजनेस ओनर और समाज में बदलाव लाने वाले चेहरों के रूप में उभरते देखा है, जिनका असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है। उनकी सफलता लोगों की कमाई को बढ़ा  रही है, परिवारों को सहारा दे रही है और पूरे समाज को बदल रही है। पिछले दो सालों में जो कुछ भी हासिल हुआ है, उस पर हमें गर्व है। इसके साथ ही हमारा यह वादा आज भी उतना ही पक्का है: महिलाओं के लिए और बड़े अवसर बनाना और भारत के पूरे कृषि क्षेत्र में उनकी पूरी क्षमता को बाहर लाने में मदद करना।

मध्य प्रदेश की बांधवगढ़ कृषि वनोपज प्रोड्यूसर कंपनी की पूनम तिवारी ने कहा, “सबसे बड़ा बदलाव महिलाओं में नेतृत्व करने के आत्मविश्वास का आना है। अब अधिक से अधिक महिलाएँ फैसले लेने, बाज़ारों से जुड़ने और लीडरशिप की भूमिकाएँ निभाने में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। वे न सिर्फ अपने लिए बल्कि अपने आस-पास के दूसरों लोगों के लिए भी आगे बढ़ने के नए मौके बना रही हैं। कॉर्टेवा के सहयोग ने हमारे संगठन को मजबूत बनाने और खेती-किसानी से जुड़े परिवारों में हमारे प्रभाव को बढ़ाने में बहुत मदद की है।”

भारत सरकार के स्मॉल फार्मर्स एग्रिबिजनेस कंसोर्टियम के पूर्व एमडी प्रवेश शर्मा ने कहा, “महिलाएं भारतीय कृषि और ग्रामीण विकास का एक बहुत ही जरूरी हिस्सा हैं। ज्ञान, हुनर और अवसरों तक उनकी पहुँच को मजबूत करके हम उनकी कमाई को बढ़ा  सकते हैं और मजबूत समाज का निर्माण कर सकते हैं। 2मिलियनवूमेनजैसी सामूहिक पहलें महिलाओं को आगे आने, नेतृत्व करने और कृषि के भविष्य में अपना योगदान देने के काबिल बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।”

समुन्नति फाइनेंशियल इंटरमीडिएशन एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के को-फाउंडर श्रीधर ईश्वरन ने कहा, “महिलाएं भारतीय कृषि के केंद्र में हैं और ग्रामीण आजीविका, खाद्य सुरक्षा व समाज के विकास को मजबूत करने में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाती हैं। महिलाओं को ज्ञान, हुनर और नेतृत्व के अवसरों से सशक्त बनाने से ऐसे फायदे होते हैं जो सिर्फ किसी एक खेत तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पूरे समाज को मिलते हैं। 2मिलियनवूमेनजैसी पहलें यह दिखाती हैं कि लगातार मिलकर काम करने से कैसे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ाया जा सकता है, उनकी आजीविका को मजबूत किया जा सकता है और भारत के कृषि क्षेत्र की तरक्की में योगदान देने के लिए उनके लिए बड़े अवसर बनाए जा सकते हैं।”

सितंबर 2024 में शुरू की गई 2 मिलियन वूमेन, कॉर्टेवा की एक खास पहल है। इसका लक्ष्य 2030 तक भारत के पूरे कृषि क्षेत्र में महिलाओं को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाना है। खेती-किसानी में महिलाओं की भागीदारी और उनके नेतृत्व को आगे बढ़ाने के लिए, यह किसी बड़ी कंपनी द्वारा शुरू की गई सबसे पहली और बड़े स्तर की पहलों में से एक है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को वे सभी हुनर, जानकारी और अवसर देना है जिनकी मदद से वे एक सफल किसान, बिजनेस लीडर और समाज में बदलाव लाने वाली मार्गदर्शक बन सकें।