लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर नवयुग कन्या महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के अभिव्यक्ति क्लब ने राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में “मानसिक स्वास्थ्य एवं महिला स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य तथा यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उनके समग्र कल्याण को प्रोत्साहित करना था।
संगोष्ठी का विषय “स्वस्थ मन, स्वस्थ महिलाएँ, स्वस्थ समाज” रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती को पुष्प अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर उपस्थित विशिष्ट अतिथियों एवं वक्ताओं का स्वागत किया गया तथा उन्हें सम्मानस्वरूप सुंदर पौधे भेंट किए गए। संगोष्ठी की मुख्य वक्ता डॉ. सुजाता देव (प्रोफेसर, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय) ने “माइंड मैटर्स: महिलाओं में यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।
डॉ. सुजाता देव ने बताया कि अस्वस्थ जीवनशैली मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं तथा मोटापे के प्रमुख कारणों में से एक है। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि मोटापा महिलाओं में शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी कई जटिलताओं को भी जन्म दे सकता है। उन्होंने मोटापे से बचाव तथा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि किसी भी रिश्ते में स्वस्थ सीमाओं, पारस्परिक सम्मान और प्रभावी संवाद का होना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही, उन्होंने युवा महिलाओं को प्रेरित किया कि वे अपने शारीरिक, मानसिक, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा करने में किसी प्रकार का संकोच या सामाजिक कलंक महसूस न करें तथा उचित मार्गदर्शन और सहायता के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों से संपर्क करें।
संगोष्ठी की मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित डॉ. पूजा महौर (प्रोफेसर एवं क्लिनिकल/बाल मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सा विभाग, KGMU), ने “युवा महिलाओं में सामान्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बच्चों और किशोर-किशोरियों में चिंता एवं अवसाद की बढ़ती समस्याओं पर प्रकाश डाला।
उन्होंने संकट की स्थिति में भावनात्मक सहायता प्रदान करने के लिए मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता के कौशल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। परोपकार के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि दूसरों की सहायता करने से स्वयं के मनोवैज्ञानिक कल्याण में भी सुधार होता है। उन्होंने युवाओं को गहरी साँस लेने का अभ्यास करने, सामाजिक सहयोग को मजबूत बनाने और वास्तविक जीवन में सार्थक संबंध विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने युवाओं में इंटरनेट की लत और अत्यधिक स्क्रीन समय के बढ़ते प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त की तथा बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए वास्तविक जीवन के पारस्परिक संबंधों को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर मंजुला उपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापन में कहा कि एक स्वस्थ समाज का निर्माण तभी संभव है, जब महिलाओं के मानसिक, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य को समुचित महत्व दिया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर खुलकर बात करने, समय पर सहायता प्राप्त करने तथा अपने शारीरिक, भावनात्मक और समग्र कल्याण के लिए जागरूक एवं सूचित निर्णय लेने के लिए सशक्त महसूस करना चाहिए।
संगोष्ठी में महाविद्यालय की छात्राओं ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सोनल अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर 24 अगस्त 2026 को आयोजित “तनाव प्रबंधन” विषयक भाषण प्रतियोगिता की विजेता छात्राओं को विशिष्ट वक्ताओं एवं महाविद्यालय की प्राचार्या द्वारा प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर महाविद्यालय की प्रोफेसर संगीता कोतवाल, प्रोफेसर संगीता शुक्ला, प्रोफेसर सुषमा त्रिवेदी, डॉ. (मेजर) मनमीत कौर सोढी, प्रोफेसर विनीता सिंह, डॉ. सुनीता सिंह, डॉ. अंकिता तिवारी, नीलम यादव, डॉ. स्नेहा चौधरी सहित अन्य शिक्षकगण भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. सोनल अग्रवाल, डॉ. गगनप्रीत कौर, डॉ. सुकन्या तिवारी, मानसी श्रीवास्तव तथा राष्ट्रीय सेवा योजना की टीम के सहयोग से किया गया। NSS टीम में डॉ. मनीषा बारौनिया, डॉ. चंदन मौर्या और दीक्षा शामिल रहे।
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