लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। अभिनय और पत्रकारिता के क्षेत्र में फर्रुख जफर और मेहरु जफर का योगदान अविस्मरणीय है। फर्रुख जफर ने अपने सशक्त अभिनय से हिंदी सिनेमा में विशिष्ट पहचान बनाई, वहीं मेहरु जफर ने अपनी बेबाक लेखनी और पत्रकारिता के माध्यम से महिलाओं के मुद्दों तथा सामाजिक सरोकारों को प्रभावशाली ढंग से उठाया। शुक्रवार को संचित स्मृति न्यास ने लोक संस्कृति शोध संस्थान के सहयोग से गोमती नगर स्थित लिटिल फ्रेंड्स स्कूल में यादें फर्रुख व मेहरु की कार्यक्रम आयोजित कर दोनों के जीवन, संघर्ष और योगदान को याद किया।
कार्यक्रम में डॉ. दीक्षा नागर ने विषय प्रवर्तन किया। परवीन तलहा ने मेहरु जफर की लेखन यात्रा और पत्रकारिता से जुड़े संस्मरण साझा किए। दिल्ली से आईं प्रख्यात लेखिका एवं आकाशवाणी की सेवानिवृत्त अधिकारी सलमा हुसैन ने लखनऊ, दिल्ली और पुणे से जुड़ी यादें साझा करते हुए कहा कि लोग कहां से कहां चले जाते है लेकिन उनकी यादें दिलों में नक्श बनकर रह जाती हैं।
ताहिरा हसन ने कहा कि मेहरु जफर महिलाओं के मुद्दों पर प्रखरता से अपनी बात रखती थीं। उन्हें लखनऊ की पहली महिला पत्रकार के रूप में याद करते हुए वक्ताओं ने पत्रकारिता और महिला सरोकारों के क्षेत्र में उनके योगदान को रेखांकित किया। शाहीन अहमद ने अपनी मां और बहन से जुड़ी स्मृतियां साझा कीं।

इस दौरान फर्रुख जफर के जीवन-संघर्ष और अभिनय यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया गया कि 14 वर्ष की उम्र में उनका विवाह हुआ था। उनके पति स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने रेडियो में अधिकारी के रूप में काम किया और बाद में गांव में रहकर ग्राम प्रधान की जिम्मेदारी भी निभाई।
शाखा बंद्योपाध्याय ने बताया कि फर्रुख जफर ने गमन, उमराव जान, पीपली लाइव और गुलाबो सिताबो जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान आकर्षित किया। उन्हें फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा और रचनात्मकता के लिए उम्र बाधा नहीं होती।
कार्यक्रम में डॉ. ऋचा नागर, प्रतुल जोशी, रंगकर्मी तरुण कुमार, लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव डॉ. सुधा द्विवेदी, आभा शुक्ला और डॉ. एसके गोपाल, अजीत पाल, अम्बरीश सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
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