लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। अनुदीप फाउंडेशन ने माइक्रोसॉफ्ट एलिवेट इंडिया के सहयोग से यूपी एजुकेटर कैटलिस्ट – बिल्डिंग एआई रेडी क्लासरूम प्रोग्राम की शुरुआत की। इस कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य के स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों में 52,000 से अधिक शिक्षकों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की समझ बढ़ाना, इसके व्यावहारिक उपयोग को प्रोत्साहित करना और कक्षाओं में एआई के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उन शिक्षण संस्थानों के प्रिंसिपल और शिक्षक शामिल हुए, जो इस पहल का हिस्सा रहे हैं। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण गोरखपुर और प्रयागराज के एक्सपर्ट टीचर्स रहे, जो इस पहल के पहले कैटेलिस्ट कैटलिस्ट हैं। कक्षाओं में एआई के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और अन्य शिक्षकों को प्रेरित करने में उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ समग्र शिक्षा (माध्यमिक शिक्षा) के अपर राज्य परियोजना निदेशक विष्णु कांत पांडेय, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया डेवलपमेंट सेंटर में प्रोडक्ट ग्रोथ के निदेशक एवं चीफ ऑफ स्टाफ अपूर्व सेठ और अनुदीप फाउंडेशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष तनमय मुखर्जी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अनुदीप फाउंडेशन की टीम ने कार्यक्रम की आगे की योजना और शुरुआती प्रभावों की जानकारी दी।
कार्यक्रम तीन प्रमुख स्तंभों, शिक्षकों में एआई विशेषज्ञता विकसित करना, शिक्षण संस्थानों में एआई को अपनाने में मदद करना और मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से इस पहल का व्यापक विस्तार करना पर आधारित है। स्कूलों के प्रिंसिपल ने अपने संस्थानों पर कार्यक्रम के प्रभाव के बारे में बताया। इसके बाद एक्सपर्ट शिक्षकों ने साझा किया कि एआई टूल्स उनके पढ़ाने के तरीकों में किस तरह बदलाव ला रहे हैं।

गोरखपुर और प्रयागराज के एक्सपर्ट शिक्षकों को एआई में उनकी विशेषज्ञता के लिए प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। मास्टर ट्रेनर्स के रूप में अब वे अन्य शिक्षकों और अपने संस्थानों तक यह जानकारी पहुँचाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
एआई शिक्षक का विकल्प नहीं, सहयोगी है : विष्णुकांत पाण्डेय
उत्तर प्रदेश सरकार के समग्र शिक्षा (माध्यमिक शिक्षा) के अपर राज्य परियोजना निदेशक विष्णु कांत पांडेय ने कहा, “उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने और विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। यूपी एजुकेटर कैटिलिस्ट प्रोग्राम शिक्षकों को कक्षा में एआई के उपयोग के लिए सक्षम बनाकर इस लक्ष्य को आगे बढ़ाएगा। इससे कक्षा में सीखने की प्रक्रिया बेहतर होगी और राज्यभर में एआई प्रज्ञा मिशन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।”
विष्णुकांत पाण्डेय ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों के साथ शिक्षकों को भी स्वयं को लगातार अपडेट करना होगा। तकनीकी विकास और बदलते समय ने शिक्षण की पद्धतियों में व्यापक परिवर्तन किया है। ऐसे में शिक्षकों को नई तकनीक सीखने के साथ विद्यार्थियों की बदलती जरूरतों को समझना होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक की भूमिका अब केवल विद्यार्थियों को जानकारी देने तक सीमित नहीं है। आज विद्यार्थियों के पास ज्ञान हासिल करने के अनेक माध्यम उपलब्ध हैं। इसलिए शिक्षक को अपने अनुभव और विशेषज्ञता के साथ तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए सीखने का बेहतर वातावरण तैयार करना होगा।
उन्होंने शिक्षकों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर झिझक छोड़ने की अपील करते हुए कहा कि एआई शिक्षक का विकल्प नहीं, बल्कि सहयोगी है। इसके माध्यम से पाठ योजना, प्रश्नपत्र तैयार करने और अन्य शैक्षणिक कार्यों में समय की बचत की जा सकती है। इससे शिक्षक अपना अधिक समय विद्यार्थियों के साथ संवाद और रचनात्मक गतिविधियों में दे सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई से तैयार सामग्री को बिना जांचे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। शिक्षक अपनी विषय विशेषज्ञता और अनुभव के आधार पर उसमें आवश्यक संशोधन करें। एआई का इस्तेमाल काम को आसान बनाने के लिए हो, न कि शिक्षक की अपनी सोच और विशेषज्ञता को खत्म करने के लिए। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक के दौर में लगातार सीखना ही शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी जरूरत है।
माइक्रोसॉफ्ट इंडिया डेवलपमेंट सेंटर के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं प्रेसिडेंट राजीव कुमार ने कहा, “हमें उत्तर प्रदेश सरकार, समग्र शिक्षा, उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा विभाग और अनुदीप फाउंडेशन के साथ यूपी एजुकेटर कैटेलिस्ट प्रोग्राम पर काम करने की खुशी है। जब शिक्षकों को सही टूल्स और जानकारी से सक्षम बनाया जाता है, तो वे विद्यार्थियों को ऐसे भविष्य के लिए बेहतर ढंग से तैयार कर पाते हैं।”
कार्यक्रम के शुभारंभ पर अनुदीप फाउंडेशन की सीईओ मोनिशा बनर्जी ने कहा, “एआई को समझने और इस्तेमाल करने में सक्षम एक शिक्षक पूरी कक्षा में बदलाव ला सकता है—चाहे विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाना हो या उनमें जिज्ञासा विकसित करना। भारत का एआई भविष्य सिर्फ लैब और बोर्डरूम में नहीं बनेगा, बल्कि गोरखपुर, प्रयागराज और उत्तर प्रदेश के हर जिले की कक्षाओं में भी आकार लेगा। यूपी एजुकेटर कैटेलिस्ट प्रोग्राम के माध्यम से हम केवल शिक्षकों को एआई टूल्स का इस्तेमाल करना नहीं सिखा रहे हैं, बल्कि ऐसे कैटलिस्ट का समुदाय तैयार कर रहे हैं, जो इस जानकारी को दूसरे शिक्षकों तक पहुँचाएंगे। हमारा उद्देश्य है कि हर विद्यार्थी एआई के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार हो और भारत को इस क्षेत्र में अग्रणी बनाने में योगदान दे सके।”
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