सेक्टर-‘ए’ सीतापुर रोड योजना में 16 अक्टूबर से पांच दिवसीय रामलीला का 34वां मंचन
लखनऊ (शम्भू शरण वर्मा/टेलीस्कोप टुडे)। रामलीला मंचन की तारीख नजदीक आते ही सेक्टर-‘ए’ सीतापुर रोड योजना का माहौल राममय हो गया है। विश्वनाथ मंदिर परिसर में रात आठ बजते ही कलाकारों की आवाजों में राम, लक्ष्मण, सीता, रावण और अन्य पात्रों के संवाद गूंजने लगते हैं। “हे राजन आप व्यर्थ की चिन्ता करते हैं, ये योगीराज कहाते हैं, तू इनसे कुछ संकोच न कर, ये बड़े विचारशील मुनि हैं, तू किसी बात की सोच न कर। ये तेरे युगल कुमारों को, रण-विद्या-धर्म सिखायेंगे, फर्जन्द- दुचन्द वहाँ होकर, आनन्द सहित घर आयेंगे…”। सेक्टर-‘ए’ सीतापुर रोड योजना में 16 अक्टूबर से शुरू होने वाले पांच दिवसीय रामलीला के 34वें मंचन के लिये चल रहे रिहर्सल में इन दिनों कुछ ऐसे ही संवाद सुनाई पड़ रहे है।

रामलीला में बखूबी मंचन के लिये जहां कलाकारों में काफी उत्साह है। वहीं कई बाल कलाकार ऐसे है जो छमाही परीक्षा की तैयारी के साथ ही रिहर्सल के लिये भी वक्त निकाल रहे है। बच्चों में इस कदर उत्साह है कि वह न सिर्फ प्रतिदिन रिहर्सल में आ रहे है बल्कि अपनी प्रतिभा भी दिखा रहे है।
इस बार फिर गूंजेगी संजय सिंह की रावण के रूप में गर्जना
रामलीला में इस वर्ष रावण के किरदार में एक बार फिर संजय सिंह नजर आएंगे। एक दशक से अधिक समय तक रावण की भूमिका निभा चुके संजय सिंह ने वर्ष 2023 तक लगातार यह किरदार निभाया था। उनकी व्यस्तता के चलते वर्ष 2024 और 2025 में शाश्वत पाठक ने रावण का मंचन किया। दो वर्ष बाद संजय सिंह की वापसी से दर्शकों को रावण की उनकी दमदार गर्जना फिर सुनने को मिलेगी।

श्रीराम लीला समिति के अध्यक्ष सुरेश कुमार तिवारी ने बताया कि सूर्य प्रताप सिंह और सत्यम वर्मा श्रीराम वन गमन तक क्रमश: राम और लक्ष्मण की भूमिका निभाएंगे। इसके बाद लक्ष्य मिश्रा और राज सिंह क्रमश: राम और लक्ष्मण का किरदार निभाएंगे। अंश मिश्रा माता सीता, निर्देशक जितेंद्र मिश्रा हनुमान व सुमंत्र, शांति स्वरूप शुक्ला अंगद व सुषेण वैद्य, प्रभाकर तिवारी राजा दशरथ, शिव प्रकाश सिंह जनक, हर्ष वर्मा भरत, हेमंत गुप्ता शत्रुघ्न और संजय सिंह रावण की भूमिका में होंगे। निर्देशक उमाशंकर राठौर केवट व जोगी रावण, शाश्वत पाठक परशुराम व वशिष्ठ तथा अभय वर्मा सुग्रीव, सूर्पनखा और कैकेयी का किरदार निभाएंगे। वहीं सिद्धार्थ वर्मा बंदीजन, मंत्री सहित कई किरदारों में नजर आएंगे।

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम न केवल आस्था बल्कि भारतीय संस्कृति, सभ्यता व समर्पण के प्रेरणा श्रोत भी हैं। उनके चरित्र को जीवन में उतारने व वर्तमान समय में उनके चरित्र को दिखाने की उत्सुकता कलाकारों में साफ नजर आ रही है। श्रीरामलीला पार्क में स्थित विश्वनाथ मंदिर परिसर में चल रहे रिहर्सल में ”सच्चे योद्धा सच्चे क्षत्रिय अपमान नहीं सह सकते है, इनको सुनने का ताव नहीं, चुप कैसे रह सकते है…” व ‘‘शिव धनुष तोड़ने वाला भी, कोई शिव प्यारा ही होगा। जिसने ऐसा अपराध किया, वह दास तुम्हारा ही होगा…’’ जैसे संवाद गुंजायमान हो रहे है। रिहर्सल के दौरान पुराने कलाकारों के साथ ही नए कलाकारों के चेहरे पर अपने किरदारों का बखूबी मंचन करने की झलक साफ दिखाई दे रही है।


वरिष्ठ कलाकार भी करते हैं मार्गदर्शन
श्रीरामलीला पार्क में स्थित विश्वनाथ मंदिर परिसर में रात्रि के आठ बजते ही सभी कलाकार एकत्र होकर श्रीगणेश स्तुति के पश्चात रामलीला की रिहर्सल में जुट जाते हैं। निर्देशक उमाशंकर राठौर व जितेंद्र मिश्र प्रतिदिन कलाकारों को मंचन के तौर तरीके और उनके द्वारा किये जाने वाले दृश्यों की बारीकियों को बखूबी समझा रहे हैं। तबला व हारमोनियम पर गीत किस प्रकार से गाना है, एक्टिंग किस प्रकार से करनी है, इसके बारे में कलाकारों को बताया जा रहा है। रामलीला में बहुत से कलाकार ऐसे हैं जिन्हें अपने संवाद पहले से ही याद हैं। फिर भी कलाकार चाहे वरिष्ठ हो या कनिष्ठ अपने तरीके से सभी रिहर्सल कर रहे हैं, जिससे वह बखूबी मंचन कर सके। इस दौरान अगर कनिष्ठ कलाकार से कोई गलती होती है तो वरिष्ठ कलाकार उनका मार्गदर्शन भी करते हैं।

बेटियां निभाएंगी सीता की सखियों की भूमिका
रामलीला में बाल कलाकारों को राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और सीता जैसे महत्वपूर्ण पात्र निभाने का अवसर मिलेगा। वहीं बेटियां माता सीता की सखियों की भूमिका निभाने के साथ प्रतिदिन लोकनृत्य और गायन की प्रस्तुतियां भी देंगी। आस्था, आशी, मनु, परी और अनन्या इसके लिए नियमित अभ्यास कर रही हैं।

मंचन के साथ बच्चों को मिलती है पौराणिक पात्रों की सीख
रामलीला की खासियत यह है कि इसमें बाहरी या पेशेवर कलाकारों के बजाय स्थानीय कलाकार ही विभिन्न पात्र निभाते हैं। इससे बच्चों को मंच पर अभिनय का अवसर मिलने के साथ ही रामायण के पात्रों, उनके चरित्र और भारतीय संस्कृति के बारे में जानने-समझने का अवसर मिलता है। समिति के अनुसार, रामलीला का उद्देश्य मनोरंजन के साथ नई पीढ़ी को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों और भारतीय संस्कृति से जोड़ना भी है।
श्री रामलीला कार्यक्रम
16 अक्टूबर – भगवान श्रीगणेशजी की वन्दना, श्रीराम जन्म, ताड़का वध, धनुष यज्ञ, परशुराम लक्ष्मण संवाद।
17 अक्टूबर – श्रीराम लक्ष्मण एंव सीता जी की आरती, कैकेयी-मंथरा, कैकेयी-दशरथ संवाद, राम वन गमन, केवट राम संवाद, दशरथ मरण, भरत मिलाप।
18 अक्टूबर – भगवान शंकर जी की आरती, पंचवटी दृश्य, खरदूषण वध, सीताहरण, जटायु मरण, श्रीराम हनुमान भेंट, सुग्रीव मित्रता, बालि वध।
19 अक्टूबर – मां दुर्गा जी की आरती, सीता की खोज, लंका दहन, विभीषण शरणागति, अंगद का लंका प्रस्थान, राजकुमार वध, अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति।
20 अक्टूबर – हनुमान जी की आरती, कुम्भकरण, मेघनाद, अहिरावण व रावण वध, श्रीराम राज्याभिषेक एंव आरती और पारितोषिक वितरण।
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