लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के अटल बिहारी वाजपेयी स्टेडियम में रविवार को विश्वविद्यालय एवं गीता परिचय अभियान के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय श्रीमद्भगवद्गीता सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में देश-विदेश के विभिन्न स्थानों से आए 1200 से अधिक साधकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने सहभागिता की।
सेमिनार का प्रमुख विषय आधुनिक जीवन प्रबंधन, मानसिक शांति, करियर निर्माण, पारिवारिक संतुलन तथा जीवन के उद्देश्य की प्राप्ति में श्रीमद्भगवद्गीता की उपयोगिता* रहा।वक्ताओं ने गीता के श्लोकों एवं सिद्धांतों को वर्तमान जीवन की व्यावहारिक चुनौतियों से जोड़ते हुए उनके समाधान प्रस्तुत किए।
गीता परिचय अभियान के संस्थापक एवं वरिष्ठ आचार्य संतोष कुमार गुप्ता ने मनुष्य जीवन के उद्देश्य और मनुष्य तथा पशु के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल अध्ययन का ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला व्यावहारिक मार्गदर्शन है। उन्होंने वर्तमान जीवन की परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए गीता के माध्यम से सार्थक एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा दी।

गीता परिचय अभियान के निदेशक महावीर प्रसाद बंसल ने दैनिक जीवन में गीता के नियमित अध्ययन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गीता के संदेशों का अध्ययन एवं मनन व्यक्ति को जीवन की परिस्थितियों में संतुलित दृष्टि प्रदान करता है।
वरिष्ठ आचार्य जी. लालजी ने जीवन के उद्देश्य की प्राप्ति में आने वाली बाधाओं एवं उनके समाधान पर चर्चा करते हुए कहा कि गीता व्यक्ति को विवेक, धैर्य एवं कर्तव्यबोध के साथ चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देती है।
राहुल जोशी ने कर्मयोग पर आधारित अपने उद्बोधन में कर्म के प्रति निष्ठा एवं कर्तव्यपालन की महत्ता बताई। वहीं वरिष्ठ आचार्या अपर्णा वर्मा ने मन पर नियंत्रण एवं आत्मसंयम के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मन को सही दिशा देने से जीवन में सकारात्मक एवं विलक्षण परिवर्तन संभव हैं।

युवाओं के प्रश्नों का गीता के माध्यम से समाधान
सेमिनार के विशेष सत्र में संतोष कुमार गुप्ता, जी. लालजी, भारती शर्मा एवं प्रदीप कुमार तिवारी के विशेषज्ञ पैनल ने प्रतिभागियों से सीधा संवाद किया। युवाओं ने करियर, मानसिक तनाव, पारिवारिक संतुलन, नैतिक द्वंद्व एवं जीवन से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका समाधान गीता के श्लोकों एवं व्यावहारिक जीवन-सूत्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में शशिमॉल तिवारी, सुधीर बोरा, कौशिक बनर्जी, प्रमिल द्विवेदी एवं चिंतामणि कौशिक सहित अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
वर्षभर चलेंगी निःशुल्क साप्ताहिक गीता कक्षाएं
कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने कहा कि यह सेमिनार का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। “जीवन के ढंग, गीता के संग” के संकल्प के साथ वर्षभर लखनऊ एवं अन्य प्रमुख स्थानों पर निःशुल्क साप्ताहिक गीता कक्षाओं, संगोष्ठियों एवं सेमिनारों का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, श्रीमद्भगवद्गीता व्यक्ति को कर्तव्य, आत्मसंयम, विवेक, धैर्य एवं संतुलन के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देती है। यही संदेश इस राष्ट्रीय सेमिनार के माध्यम से समाज एवं विशेषकर युवा पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
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