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पॉलीहाउस सब्सिडी में कटौती से आक्रोशित किसानों ने किया प्रदर्शन

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की पॉलीहाउस योजना से जुड़े किसानों और उद्योग प्रतिनिधियों ने सहायता में कटौती, पात्रता के नए नियमों और लंबित मंजूरियों को लेकर विरोध दर्ज कराया है। किसानों के अनुसार जून 2026 से NHB की ओर से पॉलीहाउस परियोजनाओं के लिए नई जीओसी जारी नहीं की गई है और नए जीओसी आवेदन भी बंद हैं। उनका कहना है कि इससे नई परियोजनाओं पर काम शुरू करने वाले किसान, निर्माता, आपूर्तिकर्ता और निर्माण टीमें प्रभावित हो रही हैं।

शुक्रवार को भीषण बारिश के बावजूद पॉलीहाउस किसान हजरतगंज में सप्रू मार्ग पर स्थित राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड कार्यालय पर एकत्र हुए। इस दौरान उन्होंने अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में लखनऊ, बाराबंकी, आगरा, कानपुर, सहारनपुर, बिजनौर सहित विभिन्न जिलों के प्रभावित पॉलीहाउस एवं नेट-हाउस किसान शामिल हुए।

किसानों और उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, परियोजनाओं में देरी बढ़ने पर पहले से मंजूर बैंक ऋण की समय-सीमा प्रभावित हो सकती है। इससे ऋण का दोबारा मूल्यांकन, नई शर्तें या कुछ मामलों में मंजूरी रद्द होने जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। उद्योग प्रतिनिधियों ने आशंका जताई कि यदि परियोजनाओं की मंजूरी और क्रियान्वयन की प्रक्रिया जल्द बहाल नहीं हुई तो पॉलीहाउस निर्माण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार भी प्रभावित हो सकता है।

10 राज्यों के किसानों ने दर्ज कराया विरोध

आयोजकों के अनुसार, पॉलीहाउस किसानों ने साझा अभियान के तहत 11 शहरों में NHB कार्यालयों के समक्ष शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इसमें अहमदाबाद, जयपुर, भोपाल, लखनऊ, बेंगलुरु, देहरादून, चंडीगढ़, रायपुर, चेन्नई तथा महाराष्ट्र के पुणे और नाशिक में हुए कार्यक्रम शामिल रहे। महाराष्ट्र में स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम अलग-अलग होने के बावजूद उन्हें इसी साझा अभियान का हिस्सा बताया गया। प्रदर्शन में किसानों के साथ ग्रीनहाउस निर्माता, फिल्म एवं नेट आपूर्तिकर्ता तथा निर्माण से जुड़ी टीमें भी शामिल हुईं।

21 अगस्त के सर्कुलर को वापस लेने की मांग

किसानों ने साझा ज्ञापन के माध्यम से NHB से 21 अगस्त को जारी सर्कुलर वापस लेने, पॉलीहाउस परियोजनाओं के लिए 50 प्रतिशत सहायता बहाल करने और भविष्य में नए नियम लागू करने से पहले संबंधित पक्षों के साथ चर्चा करने की मांग की है। प्रदर्शन के दौरान जीओसी का इंतजार कर रहे आवेदकों, बैंक ऋण मंजूर करा चुके किसानों, निर्माणाधीन परियोजनाओं तथा सहायता की प्रतीक्षा कर रहे तैयार फार्मों की समस्याओं को उठाया गया।

किसानों का कहना है कि जब उन्होंने सरकारी योजना के आधार पर निवेश, ऋण और निर्माण की तैयारी की है, तो सरकारी प्रक्रिया में उत्पन्न अनिश्चितता का आर्थिक बोझ उन पर नहीं डाला जाना चाहिए।

सात दिन में लिखित जवाब की मांग

आंदोलन से जुड़े किसानों ने NHB को सात दिन का समय देते हुए लिखित जवाब देने और 21 अगस्त के सर्कुलर को वापस लेने की मांग की है। मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में किसानों ने NHB मुख्यालय, गुरुग्राम में दोबारा बड़ी संख्या में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। आयोजकों ने इसे 15 और 16 सितंबर को हुई लामबंदी की अगली कड़ी बताया है। 15 सितंबर को गुरुग्राम में प्रदर्शन और 16 सितंबर को कृषि मंत्रालय के समक्ष अपनी बात रखने के बाद अब किसान दोबारा NHB मुख्यालय पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं।

पुराने निवेश और लंबित परियोजनाओं की सुरक्षा की मांग

किसानों ने मांग की है कि 21 अगस्त से पहले के पात्र आवेदन, जारी एवं लंबित जीओसी तथा दस्तावेजों से प्रमाणित पुराने वित्तीय दायित्वों को पूर्व व्यवस्था के तहत सुरक्षित रखा जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि बैंक ऋण मंजूरी से लेकर निर्माण, निरीक्षण और अंतिम दावे तक प्रत्येक चरण के नियम लिखित रूप में स्पष्ट किए जाएं। यदि प्रशासनिक देरी के कारण बैंक की मंजूरी, अनुपालन या परियोजना पूरी करने की समय-सीमा प्रभावित हुई है, तो किसानों को उचित अतिरिक्त समय दिया जाए।

भागीरथ चौधरी की सब्सिडी का मुद्दा भी उठा

अभियान के दौरान केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री और NHB के पदेन उपाध्यक्ष भागीरथ चौधरी के खीरा फार्म से जुड़ी सब्सिडी का मामला भी किसानों ने उठाया। किसानों ने सवाल किया कि मंत्री को मिली सहायता से जुड़े विवाद के बाद किए गए नीतिगत बदलावों का आर्थिक बोझ उन किसानों पर क्यों पड़े, जिनका उस मामले से कोई संबंध नहीं है।

किसानों के अनुसार, चौधरी को मिली लगभग 99 लाख रुपये की सहायता सार्वजनिक जांच का विषय बनी थी। चौधरी ने किसी गड़बड़ी से इनकार करते हुए कहा था कि आवेदन मंत्री बनने से पहले किया गया था। बाद में संसद को बताया गया कि उन्होंने बैंक को राशि लौटाने की सूचना दी थी और बैंक को यह रकम NHB को वापस करने का निर्देश दिया गया था। किसानों ने मांग की है कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद किए गए व्यापक नीतिगत बदलावों का आधार और औचित्य सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए।

सब्सिडी दर और पात्रता नियमों पर भी स्पष्टता की मांग

किसानों ने केवल सहायता की दर ही नहीं, बल्कि परिवार और किसान समूह की पात्रता को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि वास्तविक परियोजना के प्रमाण के आधार पर पात्रता तय हो और दोहरे लाभ पर प्रभावी रोक रहे। इसके अलावा आवेदन शुल्क, उस पर लगने वाले GST तथा जमीन की लागत से जुड़े नियमों को सरल बनाने की मांग भी उठाई गई है। किसानों का प्रस्ताव है कि कोई भी नई व्यवस्था लागू करने से पहले प्रभावित किसानों और उद्योग प्रतिनिधियों से चर्चा की जाए तथा नई व्यवस्था लागू करने के लिए पर्याप्त तैयारी का समय दिया जाए।

सामान्य क्षेत्रों में सहायता 50% से घटकर 35% होने पर आपत्ति

किसानों के अनुसार, अगस्त में किए गए संशोधनों के बाद सामान्य क्षेत्रों में सहायता 50 प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत कर दी गई। उनका कहना है कि इससे किसानों को अतिरिक्त पूंजी जुटाने, बैंक प्रस्ताव में बदलाव कराने या परियोजना का आकार कम करने जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

पुराने पात्र मामलों को पुराने नियमों के अनुसार निपटाने के आश्वासन का स्वागत करते हुए किसानों ने प्रत्येक लंबित चरण के लिए स्पष्ट लिखित दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।

जीओसी प्रक्रिया की समय-सीमा सार्वजनिक करने की मांग

किसानों ने कहा कि जीओसी व्यवस्था में आवेदन शुरू होने की तारीख और निर्णय मिलने की संभावित तारीख दोनों स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने नए आवेदन स्वीकार करने का निश्चित कार्यक्रम, लंबित मंजूरियों और दावों के निपटारे की समय-सीमा तथा दस्तावेजों में कमी होने की स्थिति में तत्काल सूचना देने की व्यवस्था की मांग की है।

किसानों ने यह भी कहा कि यदि निर्धारित समय-सीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो शिकायत निवारण की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि किसान बार-बार कार्यालयों और अधिकारियों से जानकारी लेने के लिए मजबूर न हों।

18% GST को घटाकर 5% करने की मांग

पॉलीहाउस परियोजनाओं को किसानों के लिए अधिक वहनीय बनाने के उद्देश्य से आंदोलन ने निर्धारित पॉलीहाउस आपूर्तियों पर लागू 18 प्रतिशत GST को घटाकर 5 प्रतिशत करने तथा कर श्रेणी को स्पष्ट करने की मांग भी रखी है।

किसानों ने मान्य परियोजना लागत को मौजूदा बाजार कीमतों के अनुरूप संशोधित करने की मांग की है, विशेष रूप से युद्ध और अन्य वैश्विक परिस्थितियों से प्रभावित सामग्री एवं परिवहन लागत को ध्यान में रखते हुए।

इसके साथ ही किसानों ने पॉलीहाउस योजना के लिए प्रतिवर्ष कम से कम 1,000 करोड़ रुपये का अलग बजटीय प्रावधान करने और सार्वजनिक रूप से यह जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है कि कितनी राशि जारी हुई, कितनी खर्च हुई, कितनी राशि लंबित है और योजना के निर्धारित लक्ष्य क्या हैं।

किसानों ने मांगी स्पष्ट जवाबदेही

किसानों ने इस पूरे मामले में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री एवं NHB के पदेन उपाध्यक्ष भागीरथ चौधरी, NHB और कृषि मंत्रालय से स्पष्ट जवाबदेही तय करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि मंत्री से जुड़े सब्सिडी विवाद के बाद यदि नीतिगत बदलाव किए गए हैं, तो उनकी कीमत उन किसानों से नहीं वसूली जानी चाहिए जो पूरी तरह अलग और वास्तविक पॉलीहाउस परियोजनाओं में निवेश कर रहे हैं।

आंदोलन से जुड़े किसानों ने कहा कि अब उनकी प्राथमिक मांग विवाद नहीं, बल्कि लंबित मंजूरियों का समयबद्ध निपटारा, स्पष्ट नियम, पुराने निवेश की सुरक्षा और नई परियोजनाओं के लिए पारदर्शी प्रक्रिया की बहाली है। उन्होंने NHB और कृषि मंत्रालय से जल्द लिखित जवाब और व्यावहारिक समाधान की मांग की है।