लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। मड़ियांव मेला मैदान में इन दिनों एक अनोखा मंजर देखने को मिल रहा है। बढ़ती बेरोजगारी से तंग आकर कई Gen -Z लड़कियों ने सामूहिक रूप से अपने घर छोड़ दिए हैं और यहाँ डेरा जमा लिया है।
उनका कहना है कि शिक्षा पूरी करने के बावजूद उन्हें नौकरी नहीं मिल रही। इससे वे परिवार पर बोझ बन गई हैं। न परिवार में उनकी कोई अहमियत बची है, न समाज में और न ही देश के निर्माण में उनकी कोई भूमिका दिखाई दे रही है। इसी निराशा और गुस्से ने उन्हें घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया।




मेला मैदान में बैठे इन युवाओं का साफ संदेश है—जब तक बेरोजगारी की समस्या का कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकलता, वे घर वापस नहीं जाएंगी। समाज उन्हें जो भी खाना देगा, वही खाएंगी। अगर कोई मदद नहीं करेगा तो भूखे पेट सो जाएगीं पर घर वापस नहीं जाएंगी।

यह खबर जैसे-जैसे फैल रही है, आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में बेरोजगार नौजवान इस आंदोलन को देखने और समर्थन देने के लिए पहुँच रहे हैं। कई युवा इसे सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि व्यवस्था के खिलाफ एक मजबूत आवाज मान रहे हैं। Gen-Z का यह अनोखा आंदोलन बेरोजगारी की गंभीर समस्या को फिर से चर्चा में ला रहा है और समाज तथा सरकार दोनों को सोचने पर मजबूर कर रहा है।
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