Sunday , September 13 2026

सेंसर से खतरे की पहचान, वाहनों तक पहुंचेगा रियल-टाइम अलर्ट

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। सड़क सुरक्षा के लिए तकनीक आधारित पहल के तहत ईस्ट प्वाइंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (ईपीसीईटी), बेंगलुरु के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के छात्रों ने आईओटी आधारित वाहन-से-वाहन संचार प्रोटोटाइप विकसित किया है। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि वाहन सड़क पर संभावित खतरों का पता लगाकर दूसरे वाहनों को वास्तविक समय में चेतावनी भेज सकें।

‘आईओटी बेस्ड व्हीकल-टू-व्हीकल कम्युनिकेशन यूजिंग चेन कोलिजन प्रिवेंशन’ नामक इस परियोजना को अक्षिता कृष्णा, गली यशवंत सिन्हा, जाह्नवी के. और एस. लेखना प्रिया ने असिस्टेंट प्रोफेसर कंचना आर. के मार्गदर्शन में विकसित किया है। ईएसपी32 आधारित वाहनों वाले इस प्रोटोटाइप में अल्ट्रासोनिक, एलडीआर, एक्सेलेरोमीटर और अल्कोहल सेंसर का इस्तेमाल किया गया है, जो सड़क सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न परिस्थितियों का पता लगाने में सक्षम हैं।

यह प्रणाली दूरी, दृश्यता या तेज रोशनी, दुर्घटना और अल्कोहल से जुड़े जोखिमों का पता लगाकर दूसरे वाहन को चेतावनी भेज सकती है। प्रोजेक्ट ब्रीफ के अनुसार, अलर्ट वाहन की एलसीडी स्क्रीन पर प्रदर्शित होते हैं, जबकि दुर्घटना की स्थिति में तत्काल लोकेशन साझा करने के लिए जीपीएस जानकारी टेलीग्राम के माध्यम से भेजी जा सकती है।

परियोजना टीम के अनुसार, परीक्षण के दौरान प्रोटोटाइप ने दूरी, तेज रोशनी, दुर्घटना और अल्कोहल स्तर का सफलतापूर्वक पता लगाया तथा रियल-टाइम में अलर्ट साझा किए। एलसीडी पर चेतावनियां तत्काल प्रदर्शित हुईं और जीपीएस जानकारी भी सही तरीके से भेजी गई।

ईस्ट प्वाइंट ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के सीईओ राजीव गौड़ा ने कहा, “सड़क सुरक्षा ऐसा क्षेत्र है, जहां तकनीक को दुर्घटना होने से पहले काम करना चाहिए। वाहनों का एक-दूसरे से संवाद करना और चालक को संभावित खतरे के बारे में चेतावनी देना तकनीकी रूप से दिलचस्प और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे प्रोजेक्ट दिखाते हैं कि हमारे छात्र उभरती तकनीकों को रोजमर्रा की चुनौतियों के समाधान से जोड़ सकते हैं।”

यह परियोजना तेज खतरे की सूचना और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए कनेक्टेड एम्बेडेड सिस्टम की संभावनाओं को दर्शाती है। हालांकि, यह अभी एक प्रोटोटाइप है और इसे उत्पादन स्तर की वाहन सुरक्षा प्रणाली नहीं माना जा सकता। बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से पहले वास्तविक परिस्थितियों में व्यापक परीक्षण और ऑटोमोटिव प्रणालियों के साथ एकीकरण आवश्यक होगा।