लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। क्रिएटिविटी के क्षेत्र में सबसे मजबूत जोड़ियाँ दरअसल ऐसी कहानियों के लिए एक-जैसी समझ पर आधारित होती हैं, जो लीक से हटकर हो। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए, Zee5, जियो स्टूडियोज़ और गोल्डन रेशियो फ़िल्म्स एक ऐसी कहानी लेकर आए हैं, जो अलग और दमदार आवाज़ों का साथ देने, हिम्मत भरे क्रिएटिव फैसले लेने और दर्शकों के मनोरंजन को हमेशा सबसे ज्यादा अहमियत देने के हमारे साझा यकीन को दिखाती है।
Zee5, जियो स्टूडियोज़ और गोल्डन रेशियो फ़िल्म्स ने फ़िल्म घमासान का ट्रेलर रिलीज़ किया। जिसमें प्रतीक गांधी, अरशद वारसी और इशिता दत्ता ने मुख्य किरदार निभाए हैं। जिसका प्रीमियर 11 सितंबर को इसी प्लेटफ़ॉर्म पर होगा। घमासान को ज्योति देशपांडे (जियो स्टूडियोज़), पीयूष सिंह, अभयानंद सिंह, सौरभ गुप्ता और अश्विनी चौधरी (गोल्डन रेशियो फ़िल्म्स) और मितेन शाह (येलस्टार फ़िल्म्स) ने साथ मिलकर प्रोड्यूस किया है।
तिग्मांशु धूलिया के निर्देशन में बनी फ़िल्म, घमासान का ट्रेलर दर्शकों को एक ऐसी दुनिया की झलक दिखाता है, जहां दर्शकों को सत्ता, रस्साकशी और अपना वजूद बचाने की जंग नज़र आती है। हिंदी भाषी क्षेत्र की पृष्ठभूमि पर आधारित फ़िल्म घमासान में धूलिया का वही जाना-पहचाना अंदाज़ नज़र दिखाई देता है। जिसकी कहानी उसूलों की एक ऐसी जटिल दुनिया के इर्द-गिर्द घूमती है जहाँ सत्ता और अपने वजूद की लड़ाई में सही-गलत के जवाब आसानी से नहीं मिलते हैं।
महाराज के रूप में अरशद वारसी और आदित्य के रूप में प्रतीक गांधी के बीच का टकराव पुलिस और मुजरिम के बीच की आम लड़ाई से कहीं बढ़कर है। यह सत्ता, वफ़ादारी, राजनीति और वजूद की इस पूरी दुनिया पर कब्ज़ा करने की एक बड़ी लड़ाई है। जहाँ कोई भी आसानी से हीरो नहीं बनता और नैतिकता के मायने भी सीधे तौर पर सही या गलत में नहीं बंटे होते हैं।
फ़िल्म घमासान MAMI मुंबई फ़िल्म फेस्टिवल, सिनेवेस्चर इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल और शिकागो साउथ एशियन फ़िल्म फेस्टिवल जैसे मशहूर फ़िल्म फेस्टिवल्स में दिखाई जा चुकी है।
इस मौके पर हिंदी Zee5 की बिज़नेस हेड और &TV की चीफ़ चैनल ऑफ़िसर, कावेरी दास ने कहा, “हमारे लिए बेहतरीन कहानियां वही होती हैं जिनमें थोड़ा जोखिम उठाया जाए। दमदार आवाज़ों का साथ दिया जाए और लीक से हटकर कुछ नया सोचने से डर न लगे। यही बात घमासान जैसी कहानी को इतनी दिलचस्प बनाती है। जमीन से जुड़ी यह कहानी बेहद दमदार है जिसके किरदार किसी तय सांचे में फिट नहीं बैठते, और यही खूबी उन्हें खास बनाती है।”
उन्होंने कहा, “अरशद वारसी और प्रतीक गांधी के बीच का टकराव इस कहानी को पुलिस बनाम अपराधी के आम मुकाबले से कहीं आगे ले जाता है। वहीं, तिग्मांशु धूलिया अपनी खास समझ से एक ऐसी दुनिया को पर्दे पर उतारते हैं। जहाँ सत्ता, वफादारी, राजनीति और अपने वजूद की जंग में अक्सर सही या गलत के बीच फर्क का पता नहीं चल पाता। यहाँ कोई भी पूरी तरह हीरो या विलेन नहीं है, और यही बात दर्शकों को फ़िल्म से बांधे रखती है। जियो स्टूडियोज़ के साथ हमारी यह साझेदारी इस सोच का नतीजा है कि, हम ऐसी अनोखी कहानियों का साथ दें जिनमें कुछ अलग कहने का दम हो और बेहतरीन क्रिएटर्स को अपने अंदाज़ में कहानियों को प्रस्तुत करने की पूरी आज़ादी मिले।”
गोल्डन रेश्यो फ़िल्म्स के लेखक एवं प्रोड्यूसर पीयूष सिंह ने कहा, “बुंदेलखंड के बीहड़ इलाकों में कानून और अपराधी के बीच का फ़र्क धूल और खून के बीच कहीं गुम हो जाता है, और ऐसे इलाके पर आधारित फ़िल्म घमासान सिर्फ़ पीछा करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह कभी हार न मानने वाली दो ताकतों के बीच जबरदस्त टकराव की दास्तान है। एक तरफ ऐसा इंसान है जो इंसाफ का बोझ अपने कंधों पर लिए मुजरिमों की तलाश में है। तो दूसरा शख्स अपनी रगों में बगावत की आग लिए उस इलाके पर हुकूमत करता है। यह वही कहानी है जो मैं दर्शकों तक पहुंचाना चाहता था, जो हर कसौटी पर खरी, बेबाक और देश की मिट्टी से जुड़ी हुई है। तिग्मांशु धूलिया के बेहतरीन निर्देशन, प्रतीक गांधी और अरशद वारसी की शानदार अदाकारी और जियो स्टूडियोज़ तथा गोल्डन रेशियो फ़िल्म्स के बैनर तले बनी घमासान एक ऐसी फ़िल्म है, जिससे नज़रें हटाना नामुमकिन है।”

घमासान के निर्देशक, तिग्मांशु धूलिया ने कहा, “घमासान की कहानी उस दुनिया से जुड़ी है जिससे मेरा हमेशा से गहरा लगाव रहा है, यानी ये हिंदी भाषी क्षेत्र, वहाँ के बाशिंदे और उनकी जिंदगी के पेचीदा पहलुओं को दिखाने वाली कहानी है। महाराज और आदित्य के बीच की खींचतान इस कहानी का सबसे अहम हिस्सा है। ये दोनों किरदार बिल्कुल अलग-अलग दुनिया से आते हैं और सत्ता और इंसाफ को लेकर इनकी सोच भी एक-दूसरे से बिल्कुल जुदा है। अरशद और प्रतीक ने इन किरदारों को बहुत ही दमदार तरीके से और पूरी शिद्दत से निभाया है। मेरे ख्याल से जियो स्टूडियोज़ के साथ तैयार की गई इस कहानी के लिए Zee5 एकदम सही प्लेटफ़ॉर्म है, जो इस खरी, ज़मीनी हकीकत से जुड़ी और दमदार किरदारों वाली कहानी को सही मायनों में दर्शकों तक पहुँचा सके।”
अभिनेता अरशद वारसी ने कहा, “महाराज एक ऐसा दिलचस्प किरदार है जिसने बतौर कलाकार मुझे अपने अंदर के एक बिल्कुल अलग पहलू को जानने-समझने का मौका दिया। बुराई की दुनिया में अंदर तक डूबे एक ऐसे खतरनाक किरदार को निभाना आसान नहीं था, जो पता नहीं कब क्या कर दे, लेकिन इसमें मुझे इस किरदार को पर्दे पर उतारने में सच में बहुत मज़ा आया। तिग्मांशु के साथ काम करके मुझे महाराज की दुनिया और उसका नज़रिया अच्छे से समझ आया, और मैंने उनके विज़न पर भरोसा किया। मुझे खुशी है कि घमासान के ज़रिए मेरा यह अंदाज़ दर्शकों को देखने को मिलेगा।”
अभिनेता प्रतीक गांधी ने कहा, “घमासान में मुझे जो बात सबसे ज्यादा पसंद आई, वो था आदित्य का जज्बा और उसका पक्का इरादा। वह हिम्मतवाला और बेखौफ है, और महाराज को सजा दिलाने के अपने मकसद से कभी पीछे नहीं हटता है। लेकिन जैसे-जैसे वह इस मामले की गहराई में उतरता है, उसे पता चलता है कि वह सिर्फ़ एक इंसान से नहीं, बल्कि बहुत अच्छी तरह से बनाए गए एक मज़बूत सिस्टम से लड़ रहा है। इस एहसास के बाद ही उसकी लड़ाई का दायरा बदल जाता है और उसका सफ़र और भी रोमांचक हो जाता है। तिग्मांशु सर के साथ काम करने और अरशद के साथ पर्दे पर आने का अनुभव मेरे लिए बहुत शानदार था। घमासान एक दमदार, ज़बरदस्त और किरदारों के इर्द-गिर्द घूमने वाली कहानी है, और मुझे उम्मीद है कि दर्शकों को Zee5 पर इसे देखकर मज़ा आएगा।”
भारत के कुछ सबसे जाने-माने निर्माताओं और प्रोडक्शन हाउस के साथ यह साझेदारी, Zee5 के उस वादे को और मज़बूत करती है जिसके जरिए वह विविधताओं से भरे मनोरंजन का एक ऐसा शानदार प्लेटफॉर्म बनाना चाहता है। जहाँ अलग-अलग तरह की कहानियों अपने दर्शकों तक आसानी से पहुँच सके। ‘घमासान’, ‘सुमो दीदी’ और ‘इकरूप’ को एक प्लेटफॉर्म पर पेश करने वाला यह कलेक्शन, अलग-अलग जॉनर, आवाज़ों और कहानी कहने के नज़रिए को पेश करता है।
घमासान की नैतिक रूप से उलझी हुई दुनिया और सत्ता व वजूद की आर-पार की जंग से लेकर फ्रेश लाइम प्रोडक्शंस द्वारा बनाई गई ‘सुमो दीदी’, जो हिम्मत और कभी न हार मानने वाले जज्बे की एक प्रेरणादायक कहानी है, और AAZ फिल्म्स की ‘इकरूप’ तक, जिसमें मिथिला पालकर और गौहर खान मुख्य भूमिकाओं में हैं और जो इंसाफ व वजूद की एक दमदार कहानी है। यह साझेदारी ऐसी कहानियों के लिए जगह बनाती है जो लीक से हटकर कहानी कहने के अंदाज़ को चुनौती देते हुए एक अलग नज़रिया पेश करती हैं।
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