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ग्रामीण भारत में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई राह बना रहे टाटा पावर के माइक्रोग्रिड्स

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। द टाटा पावर कंपनी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी टीपी रिन्यूएबल माइक्रोग्रिड लिमिटेड विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों के अपने एकीकृत पोर्टफोलियो के जरिए ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त ग्रामीण समुदायों के निर्माण की दिशा में अपने प्रयासों को और गति दे रही है।

TPRMG घरों, किसानों और गांव स्तर के उद्यमों को भरोसेमंद और स्वच्छ बिजली उपलब्ध करा रही है। इन समाधानों से कृषि की उत्पादकता बढ़ रही है, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घट रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ आजीविका व स्थानीय उद्यमों के लिए नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

TPRMG का एकीकृत मॉडल सौर ऊर्जा आधारित माइक्रोग्रिड, सौर सिंचाई, ऊर्जा कुशल  उपकरणों और आजीविका बढ़ाने वाले उपकरणों को एक साथ जोड़कर भारत के दूरदराज़ गांवों में बदलाव और विकास को नई दिशा दे रहा है। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले का सुनहरी चौराहा गांव इसका एक आदर्श उदाहरण बन चुका है। कृषि अवशेषों और जैविक कचरे से ऊर्जा उत्पादन पर आधारित बायोएनर्जी समाधानों को भी उन क्षेत्रों में विकसित और लागू किया जा रहा है, जहां उनकी तकनीकी और व्यावसायिक व्यवहार्यता सुनिश्चित है।

TPRMG के माइक्रोग्रिड ग्रामीण उद्यमों को डीजल आधारित बिजली से हरित और भरोसेमंद ऊर्जा की ओर बढ़ने में मदद कर रहे हैं। विभिन्न व्यवसायों की जरूरतों के अनुरूप तैयार किए गए ये समाधान डीजल की खपत में उल्लेखनीय कमी लाने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन, वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण को भी कम करते हैं। नवीकरणीय ऊर्जा की निरंतर उपलब्धता से ग्रामीण उद्यम अपनी कार्यक्षमता और उत्पादकता बढ़ा सकते हैं। साथ ही, डीजल से चलने वाली मशीनों की जगह माइक्रोग्रिड से संचालित बिजली आधारित मशीनों का उपयोग करके परिचालन लागत में 20 से 30 प्रतिशत तक की बचत भी कर सकते हैं।

भरोसेमंद बिजली उपलब्ध होने से दुकानों और अन्य ग्रामीण उद्यमों को अधिक समय तक और बिना रुकावट के संचालित किया जा सकता है। इससे ग्रामीण उद्यमियों को आधुनिक उपकरण अपनाने का अवसर भी मिलता है, जिससे उनकी उत्पादकता बढ़ती है, उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होता है और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिलती हैं।

कृषि और डेयरी उद्यमों को मिल रहा है सहयोग

सौर ऊर्जा से संचालित सिंचाई समाधान किसानों को डीजल से चलने वाले पंपों का बेहतर विकल्प उपलब्ध करा रहे हैं। इससे सिंचाई की लागत कम होती है और खेती के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर बनती है।

TPRMG डेयरी उद्यमियों को बल्क मिल्क कूलर (Bulk Milk Coolers) और अन्य ऊर्जा कुशल दुग्ध प्रसंस्करण उपकरण जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से भी सहयोग प्रदान कर रही है। ये समाधान दूध की गुणवत्ता बनाए रखने, ऊर्जा की खपत कम करने और ग्रामीण डेयरी क्षेत्र की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

कंपनी का विकेन्द्रीकृत ऊर्जा तंत्र गांव स्तर पर कई तरह की गतिविधियों और व्यवसायों को सहयोग प्रदान कर सकता है। इनमें डेयरी मूल्य श्रृंखला से जुड़ी गतिविधियां—जैसे दूध संग्रह, दूध को ठंडा रखना और दुग्ध प्रसंस्करण शामिल हैं। इसके अलावा, कृषि प्रसंस्करण क्षेत्र में गुड़ निर्माण, मसाला प्रसंस्करण, तेल निकालने की इकाइयां, आटा चक्की जैसी गतिविधियों के साथ-साथ अन्य छोटे ग्रामीण व्यवसायों को भी यह ऊर्जा समाधान समर्थन प्रदान करता है।

ऊर्जा कुशल उपकरणों को मिल रहा है बढ़ावा

माइक्रोग्रिड के माध्यम से उपलब्ध कराई जाने वाली बिजली ऊर्जा कुशल तकनीकों को अपनाने को भी बढ़ावा देती है। इनमें BLDC पंखे, IE3 और IE4 मोटर, LED लाइटिंग, ऊर्जा कुशल रेफ्रिजरेशन सिस्टम, मोटर, पंप और आजीविका से जुड़े उपकरण शामिल हैं। इनका उपयोग करके उपभोक्ता बिजली की खपत कम कर सकते हैं, साथ ही अपनी कार्यक्षमता और उत्पादकता में भी सुधार कर सकते हैं। 

योग्य ग्राहकों के लिए कंपनी चयनित ऊर्जा कुशल उपकरणों की खरीद हेतु आसान वित्तीय सुविधा और ईएमआई (EMI) विकल्प भी उपलब्ध कराती है। यह सुविधा आवश्यक दस्तावेजों, पात्रता और वित्तीय साझेदार की अंतिम स्वीकृति के अधीन होती है। इस पहल के माध्यम से ग्राहकों को ऊर्जा कुशल उपकरणों और पारंपरिक उपकरणों के बीच अंतर को समझने में मदद मिलती है। साथ ही, वे कम बिजली खपत, बेहतर प्रदर्शन और लंबे समय में होने वाली बचत जैसे लाभों को भी आसानी से समझ पाते हैं।

स्थानीय आजीविका को मिल रहा है बढ़ावा

TPRMG की स्वच्छ ऊर्जा पहलों से उत्तर प्रदेश में 18,000 से अधिक ग्राहकों और ग्रामीण उद्यमों को लाभ मिला है। कंपनी की गतिविधियों ने ग्रामीण स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आजीविका और रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए हैं।

सौर ऊर्जा और बायोएनर्जी पर आधारित TPRMG का एकीकृत मॉडल सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा को भी बढ़ावा देता है। इसके तहत स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि अवशेषों और जैविक कचरे को उपयोगी ऊर्जा में बदला जाता है। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होती है और किसानों, ग्रामीण उद्यमियों तथा स्थानीय समुदायों के लिए आय और विकास के नए अवसर पैदा होते हैं।

इस अवसर पर टीपी रिन्यूएबल माइक्रोग्रिड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार गुप्ता ने कहा, “ऊर्जा स्वतंत्रता का अर्थ केवल बिजली उपलब्ध कराना नहीं है। इसका उद्देश्य ग्रामीण समुदायों को कृषि उत्पादकता बढ़ाने, स्थानीय उद्यमों को ऊर्जा उपलब्ध कराने और टिकाऊ आजीविका के अवसर सृजित करने के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। सौर ऊर्जा, ऊर्जा कुशल तकनीकों, बायोएनर्जी समाधानों और स्थानीय उद्यमिता को एक साथ जोड़कर हमारा लक्ष्य मजबूत और आत्मनिर्भर ग्रामीण इकोसिस्टम तैयार करना है तथा स्वच्छ ऊर्जा को समावेशी विकास का एक प्रभावी माध्यम बनाना है।”

उत्तर प्रदेश में लगभग 4.5 मेगावाट क्षमता वाले माइक्रोग्रिड नेटवर्क के साथ TPRMG हर वर्ष 57.4 लाख से अधिक यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन कर रही है। कंपनी के वर्तमान प्रभाव आकलन (Impact Assessment) के अनुसार, इन परिचालनों से प्रतिवर्ष लगभग 23.6 लाख लीटर डीजल की खपत और लगभग 6,400 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के उत्सर्जन को रोका जा सका है।

स्थानीय स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े कौशल का विकास

TPRMG ने ‘RE Tech Mitra’ पहल भी शुरू की है, जो ग्रामीण उद्यमिता और कौशल विकास को बढ़ावा देने वाला एक कार्यक्रम है। इसके तहत स्थानीय युवाओं को नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों तथा ऊर्जा कुशल मशीनों और उपकरणों की स्थापना, संचालन और रखरखाव का प्रशिक्षण दिया जाता है। इस तरह की पहलें स्थानीय स्तर पर आजीविका और रोजगार के अवसर पैदा करने के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा परिसंपत्तियों के दीर्घकालिक संचालन, बेहतर रखरखाव और प्रभावी कार्यक्षमता को भी मजबूत बनाती हैं।

अपने विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा तंत्र के माध्यम से TPRMG ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने, उत्पादकता में सुधार लाने और भारत को अधिक स्वच्छ, समावेशी तथा ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर समुदायों की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।