लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। उच्च रक्तचाप को अक्सर ‘साइलेंट कंडीशन’ कहा जाता है, क्योंकि इसके कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, फिर भी यह धीरे-धीरे हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी की बीमारी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं के जोखिम को बढ़ा सकता है। अच्छी बात यह है कि डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं के साथ-साथ रोजमर्रा की जीवनशैली से जुड़े विकल्प भी रक्तचाप को स्वस्थ स्तर पर बनाए रखने और हृदय के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
डॉ. राम कीर्ति सरन (डायरेक्टर, क्लिनिकल एवं प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी, मेदांता हॉस्पिटल) ने कहा, सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है हृदय के लिए स्वस्थ आहार लेना। अधिक नमक का सेवन कम करने से कई लोगों को अपने रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। पैकेज्ड स्नैक्स, अचार और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में अक्सर सोडियम की मात्रा अधिक होती है। इनके बजाय, भोजन में अधिक मात्रा में ताज़े फल और सब्ज़िया, साबुत अनाज, दालें, ड्राई फ्रूट्स और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल होने चाहिए। स्वस्थ शरीर का वज़न बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अतिरिक्त वज़न हृदय और रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
उन्होंने कहा कि रक्तचाप को नियंत्रित करने में नियमित शारीरिक गतिविधि भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालांकि, कई लोग इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि कितना व्यायाम सुरक्षित है और क्या हृदय के स्वास्थ्य के लिए बहुत कठिन व्यायाम करना जरूरी है। इसका जवाब है कि व्यायाम व्यक्ति की उम्र, फिटनेस स्तर और किसी मौजूदा स्वास्थ्य समस्या के अनुसार होना चाहिए। नियमित रूप से मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधियां, जैसे तेज चलना, साइकिल चलाना या तैराकी, अधिकांश स्वस्थ वयस्कों को हृदय संबंधी महत्वपूर्ण लाभ प्रदान कर सकती हैं।
शुरुआत हल्के व्यायाम से करना और धीरे-धीरे इसकी अवधि और तीव्रता बढ़ाना एक अच्छा तरीका है। यदि इसे नियमित रूप से जारी रखा जाए, तो रोजाना टहलने की आदत भी काफी बदलाव ला सकती है। हमेशा अत्यधिक व्यायाम करने या शरीर की क्षमता से अधिक जाने का लक्ष्य रखना जरूरी नहीं है। कभी-कभी जरूरत से ज्यादा व्यायाम करना, विशेष रूप से ऐसे लोगों में जिन्हें पहले से हृदय संबंधी बीमारी है या जिनका रक्तचाप अनियंत्रित है, खतरनाक हो सकता है।
व्यायाम के दौरान शरीर द्वारा दिए जाने वाले चेतावनी संकेतों के प्रति सचेत रहें। यदि आपको सीने में दर्द, सामान्य से अधिक सांस फूलना, चक्कर आना, बेहोशी, दिल की धड़कन का असामान्य रूप से तेज या अनियमित होना या अत्यधिक थकान महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। इनमें से कोई भी लक्षण महसूस होने पर व्यायाम तुरंत रोक दें और चिकित्सकीय सलाह लें। जिन लोगों को पहले से हृदय रोग, अनियंत्रित उच्च रक्तचाप, मधुमेह या कोई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें नया या कठिन व्यायाम कार्यक्रम शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
तनाव का प्रबंधन रक्तचाप को नियंत्रित करने का एक अन्य महत्वपूर्ण, लेकिन अक्सर नजरअंदाज किया जाने वाला पहलू है। लंबे समय तक रहने वाला तनाव, पर्याप्त नींद की कमी और अस्वस्थ कार्य-जीवनशैली हृदय स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। पर्याप्त नींद लेना, रिलैक्सेशन तकनीक, ध्यान, योग और अपनी पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालने जैसे सरल उपाय भावनात्मक स्वास्थ्य के साथ-साथ हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हो सकते हैं। इसी तरह, तंबाकू से बचना और अस्वास्थ्यकर खान-पान की आदतों को सीमित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
नियमित निगरानी भी महत्वपूर्ण है। समय-समय पर रक्तचाप की जांच करने से व्यक्ति को यह समझने में मदद मिलती है कि जीवनशैली में किए गए बदलाव और डॉक्टर द्वारा निर्धारित उपचार प्रभावी हैं या नहीं। रक्तचाप बेहतर होने पर भी डॉक्टर की सलाह के बिना दवाओं को बंद या उनकी मात्रा में बदलाव न करें।
अंततः, बेहतर हृदय स्वास्थ्य किसी एक बड़े बदलाव पर निर्भर नहीं करता। जीवनशैली में छोटे, टिकाऊ और लगातार किए जाने वाले बदलाव लंबे समय में बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। प्रभावी रक्तचाप नियंत्रण संतुलित आहार, नियमित और उपयुक्त व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव प्रबंधन और नियमित चिकित्सकीय जांच पर आधारित होता है।
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