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शादी टूटने के दर्द से जीवनसाथी मिलने तक, मनोज मुंतशिर का भावुक खुलासा

मुंबई (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। तुम हो ना – घर की सुपरस्टार, जिसे राजीव खंडेलवाल होस्ट कर रहे हैं, का आने वाला एपिसोड दर्शकों को एक भावनात्मक सफ़र पर ले जाएगा। इस एपिसोड में मशहूर गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर अपनी पत्नी नीलम के साथ अपने प्यार और एक-दूसरे के प्रति अटूट समर्पण की अनोखी कहानी साझा करेंगे।

बातचीत के दौरान मनोज ने बताया कि नीलम उन्हें बहुत पहले से जानती थीं, जब उनका रिश्ता शुरू भी नहीं हुआ था। किस तरह किस्मत ने धीरे-धीरे उन्हें एक-दूसरे के करीब लाया, यह साझा करते हुए उन्होंने याद किया, “वो मुझे पहले से जानती थी। ये मैं बताना चाहता हूं कि मेरी और नीलम की मुलाकात कैसी हुई। नीलम मेरी चचेरी बहन की सबसे करीबी दोस्त थी, तो मेरे घर इनका आना-जाना बहुत पहले से था। तो मुझसे कोई रिश्ता नहीं था। कौन है? मेरी बहन की दोस्त है, ये है।”

मनोज ने इसके बाद अपनी ज़िंदगी के एक अहम मोड़ को याद किया। 21 साल की उम्र में उनके परिवार ने उनकी शादी तय कर दी थी और सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। शादी की तारीख़ फिक्स हो गई थी, निमंत्रण पत्र बांटे जा चुके थे और यहां तक कि शादी की गाड़ी भी बुक हो चुकी थी। मनोज ने प्यार से याद किया कि उनके पिता ने नीलम के पिता चौहान जी को 500 रुपये दिए और कहा हमारा बेटा सिर्फ़ आपकी गाड़ी में ही जाएगा।

आने वाले महीनों में मनोज ने अपनी मंगेतर के साथ लंबी बातचीतों के ज़रिए एक गहरा रिश्ता बना लिया, भले ही आर्थिक सीमाएँ थीं। उन्होंने साझा किया कि जिस लड़की से उनकी शादी तय हुई थी, वह एक फ़ैशन डिज़ाइनर थीं। उनके पास ज़्यादा पैसे नहीं थे, लेकिन रात 9 बजे के बाद कॉल्स का रेट सामान्य से एक चौथाई हो जाता था। इसलिए वे आधे घंटे तक बातें करते थे। यह सिलसिला चलता रहा और उन तीन महीनों में मनोज अपनी मंगेतर से और भी ज़्यादा प्यार करने लगे।

लेकिन, मामला तब एक अनचाहे मोड़ पर पहुँच गया जब लड़की के परिवार वालों ने उसके प्लान के बारे में पूछा। मनोज ने साफ़-साफ़ बताया कि जब उसने मुंबई जाकर फ़िल्मों के लिए गाने लिखने का अपना सपना बताया, तो उसे बिल्कुल भी अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला। मनोज ने कहा, “इसके बाद मैं मुंबई जाऊँगा, फ़िल्मों के लिए गाने लिखूँगा।” बाद में उसने बताया कि लड़की का भाई उस पर हँसने लगा।

मनोज ने आगे खुलासा किया कि सिर्फ़ दो दिन बाद ही शादी कैंसिल कर दी गई, जबकि शादी के कार्ड छप चुके थे और तारीख़ भी तय हो चुकी थी। उस दिल तोड़ देने वाले पल को याद करते हुए मनोज ने साझा किया कि दुल्हन के पिता ने क्या कहा था, “आपका लड़का आवारा है, नालायक है। हमको तो पता ही नहीं था। हमको तो लगा बीएससी, कर रहा है, फर्स्ट क्लास है, कुछ करेगा, लेकिन इसको फिल्मों में जाना है और बड़ी गलती हुई हमसे। हम शादी तोड़ रहे हैं।” मनोज ने आगे याद किया कि जब उनके पिता को शादी टूटने की ख़बर मिली तो वह बेहद टूट गए थे। उन्होंने बताया कि इस गहरे दुख के बावजूद उनके परिवार ने हमेशा अपनी गरिमा बनाए रखी और बस यही स्वीकार कर लिया कि उन्हें चुना नहीं गया।

मनोज ने अपनी ज़िंदगी के सबसे कठिन दौरों में से एक को याद करते हुए बताया कि नीलम चुपचाप उनके लिए सहारा और हौसला बन गईं। अपनी बहन की करीबी दोस्त होने के नाते वह अक्सर उनके घर आती थीं और मनोज के दर्द को महसूस करती थीं। वह बार-बार उनकी हिम्मत बढ़ाने की कोशिश करती थीं। जो शुरुआत में सिर्फ़ सहारा था, धीरे-धीरे कुछ और गहराई में बदल गया। अपनी ज़िंदगी को बदल देने वाली उस सच्चाई को याद करते हुए मनोज ने कहा और इससे पहले कि मैं समझ पाता, मुझे लगा मैं क्या ढूंढ रहा हूँ, यही तो है वो। हमारा रिश्ता दर्द का रिश्ता है।

नीलम ने भी इस भावनात्मक एहसास को अपने दिल से जुड़ी एक सच्ची स्वीकारोक्ति के साथ साझा किया, जिसने वहाँ मौजूद सभी को भावुक कर दिया। उन्होंने कहा “हम तब भी दर्द बाँट रहे थे, आज भी दर्द बाँट रहे हैं, और मैं चाहती हूँ कि बस ऐसे ही हम दुनिया से जाएँ।

मनोज ने खुलासा किया कि उनकी ज़िंदगी का निर्णायक पल 1999 में आया, जब उन्होंने अपनी माँ को यह चर्चा करते हुए सुना कि मुंबई जाने के बाद नीलम और उनके बीच दूरी आ सकती है। मनोज ने ठान लिया कि वह अपनी मोहब्बत को खोने नहीं देंगे। उन्होंने तुरंत हालात का सामना किया और नीलम को एक अल्टीमेटम दिया। उस नाटकीय पल को याद करते हुए मनोज ने बताया कि उन्होंने नीलम से कहा उनके पास सिर्फ़ एक घंटा है यह तय करने के लिए कि वे शादी करेंगे या हमेशा के लिए रिश्ता ख़त्म कर देंगे। अपने दिल पर पूरा भरोसा करते हुए नीलम ने जवाब दिया कि प्यार कभी तर्क की सीमाएँ नहीं देखता, प्यार तो बस प्यार होता है।

नीलम ने आगे यह भी बताया कि किस तरह उन्होंने अपने परिवार को इस रिश्ते को स्वीकार करने के लिए मनाने में संघर्ष किया। उन्होंने कहा “मुझे पूरे 17 साल लग गए, राजीव, मम्मी-पापा को मनाने में। और यही सारी दिक्कतें छोटे शहरों में होती हैं। एक चीज़ मेरे साथ अच्छी थी कि मेरी सासू माँ बहुत प्यारी थीं।”

ईमानदारी, भावनाओं और संघर्ष व साथ निभाने की प्रेरणादायक झलकियों से भरा ‘तुम हो ना – घर की सुपरस्टार’ इस बार एक ऐसी प्रेम कहानी का जश्न मनाता है, जो सिर्फ़ रोमांस पर नहीं बल्कि साझा संघर्षों, अटूट सहारे और हर चुनौती में एक-दूसरे के साथ खड़े रहने के साहस पर बनी है।