नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-6 की फैक्टशीट जारी करके बताया है कि देश के स्वास्थ्य, पोषण और जनसंख्या से जुड़े कई आंकड़ों में सुधार हुआ है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच देश के आम लोगों तक बढ़ी है, टीकाकरण कवरेज में सुधार हुआ है। प्रसवपूर्व देखभाल के उपयोग में वृद्धि दर्ज की गई है और स्तनपान से जुड़े परिणामों में भी सकारात्मक प्रगति देखने को मिली है। साथ ही वित्तीय समावेशन, बुजुर्ग आबादी की हिस्सेदारी और जनसंख्या संरचना से जुड़े नए आंकड़े भी पहली बार फैक्टशीट में शामिल किए गए हैं।केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने फैक्टशीट में देश के स्वास्थ्य, पोषण और जनसंख्या से जुड़े 101 प्रमुख संकेतकों की स्थिति प्रस्तुत की है। एनएफएचएस-6 में कई नए परिणामों को भी शामिल किया गया है। इनमें जनसंख्या संरचना, बुजुर्ग आबादी का अनुपात, वित्तीय समावेशन, प्रसव पूर्व देखभाल सेवाओं का उपयोग, टीकाकरण कवरेज, गंभीर डायरिया की व्यापकता और स्तनपान से जुड़े विस्तारित संकेतक शामिल हैं।अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि परिवार नियोजन, बाल स्वास्थ्य, महिलाओं के स्वास्थ्य तथा एचआईवी से जुड़े कई विस्तृत परिणामों को हटाया नहीं गया है। इन्हें आगामी राष्ट्रीय रिपोर्ट में विस्तार से प्रस्तुत किया जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि एनएफएचएस देश का सबसे बड़ा और व्यापक घरेलू स्वास्थ्य सर्वेक्षण बना हुआ है और साक्ष्य आधारित नीति निर्माण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका जारी रहेगी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि यह केवल प्रारंभिक चरण का प्रकाशन है और विस्तृत राष्ट्रीय रिपोर्ट बाद में जारी की जाएगी, जिसमें अधिक संकेतक, विस्तृत विश्लेषण और कार्यप्रणाली संबंधी जानकारी शामिल होगी।मंत्रालय ने कुछ मीडिया रिपोर्टों में उठाए गए सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिन संकेतकों को फैक्टशीट में शामिल नहीं किया गया है, उनमें से कई पहले से ही विशेष राष्ट्रीय प्रणालियों के माध्यम से नियमित रूप से निगरानी में हैं। स्वच्छता और स्वच्छ ईंधन उपयोग से जुड़े आंकड़े स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सर्वेक्षणों के माध्यम से उपलब्ध हैं। इसी प्रकार मृत्यु दर, जन्म पंजीकरण और जनसंख्या संबंधी कई आंकड़े सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस), सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) और जनगणना व्यवस्था के जरिए संकलित किए जाते हैं।अधिकारियों ने बताया कि एनएफएचएस-6 में एनीमिया के लिए हीमोग्लोबिन परीक्षण नहीं किया गया। इसका कारण पूर्व सर्वेक्षणों में उपयोग की गई कैपिलरी ब्लड सैंपलिंग पद्धति को लेकर उठी चिंताएं हैं। एनीमिया से संबंधित आंकड़े अब भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के डाइट एंड बायोमार्कर्स सर्वेक्षण से लिए जाएंगे, जिसमें अधिक सटीक मानी जाने वाली वेनस ब्लड सैंपलिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है।
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