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जयपुरिया स्कूल्स : प्रिंसिपल्स मीट में स्कूल लीडर्स ने शिक्षा के भविष्य पर किया मंथन

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल्स ने अपने सालाना प्रिंसिपल्स मीट के 2026 संस्करण का सफल समापन किया। जयपुरिया लीडरशिप प्रोग्राम (जेएलपी) के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में जयपुरिया ग्रुप के 60 से अधिक सीनियर लीडर्स एक मंच पर आए। जिन्होंने देश के 50 से अधिक शहरों में मौजूद परिसरों का प्रतिनिधित्व करते हुए लीडरशिप डेवलपमेन्ट, एकेडमिक प्लानिंग और इंस्टीट्यूशन रीव्यू जैसे विषयों पर चर्चा की।

प्रोग्राम के दौरान हुई चर्चा में स्कूल की संस्कृति, फैकल्टी के विकास, छात्रों के कल्याण, एकेडमिक उत्कृष्टता और एनईपी 2020 के तहत स्कूलों की बदलती उम्मीदों पर विचार-विमर्श किया गया। सत्रों के दौरान अध्ययन, अध्यापन एवं स्कूल प्रशासन में टेक्नोलॉजी के उपयोग पर भी रोशनी डाली गई।

प्रतिनिधियों ने कहा कि किस तरह स्कूल लीडर स्कूल मैनेजमेन्ट के दायरे से बढ़कर आर्टीफिशियल इंटेलीजेन्स की मदद से ऐसा माहौल बना सकते हैं, जो छात्रों के सतत विकास को सुनिश्चित करे और आज की बदलती ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम हो।

कनक गुप्ता (डायरेक्टर, सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल्स) ने कहा, ‘‘आज दुनिया हमारी कल्पना के बजाए कहीं तेज़ी से बदल रही है और आने वाले समय में एआई आज की तुलना में सैकड़ों गुना अडवान्स होगा। ऐसे में ज़रूरी है कि हम इसके साथ कदम से कदम मिलाकर चलें। 2100 की तैयारी संस्कृति से नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी से होगी।’’

पियर-लर्निंग एक्सचेंज एवं इंस्टीट्युशनल रीव्यु- कार्यक्रम का आकर्षण केन्द्र रहे। जहां स्कूल लीडरों को अपने अनुभव साझा करने, चुनौतियों पर चर्चा करने और ऐसी प्रथाओं को जानने का मौका मिला। जो जिन्हें जापानी कहानी कहने की नवीन पेचा कुचा शैली का उपयोग करके प्रस्तुतियों के माध्यम से सभी परिसरों में अपनाया जा सकता है।

इस कार्यक्रम में लीडर्स को इस बात पर विचार करने का मौका भी मिला कि स्कूल संस्कृति, डेटा-आधारित निर्णय-निर्धारण, फ़ीडबैक प्रणालियाँ और अभिभावकों के साथ साझेदारी किस तरह लर्निंग के लिए अनुकूल माहौल बनाकर संस्थागत विकास में योगदान दे सकती हैं।

बैठक के दौरान ‘जयपुरिया क्लासरूम ऐेज’ का अनावरण भी किया गया। क्लासरूम ऑब्ज़र्वेशन का यह नया तरीका ऑडिट-आधारित सिस्टम को रीप्लेस करता है। क्लासरूम ऑब्ज़र्वेशन को मूल्यांकन के बजाय विकास की प्रक्रिया के रूप में स्थापित करता है।

इस बदलाव के बारे में बात करते हुए, सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल्स में वीपी-एकेडमिक्स अरिजीत घोष ने कहा, “हमारे सिस्टम से ऑडिट शब्द अब हट गया है। आज हम स्कूल में कमियाँ ढूँढ़ने के बजाए एक साथ मिलकर चीज़ों को समझने का प्रयास करते हैं। अब शिक्षकों की मॉनिटरिंग का तात्पर्य उनकी परफ़ॉर्मेंस पर निगरानी रखना नहीं है, बल्कि उनके विकास को गति प्रदान करना है।’’

सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूलों ने पिछले चार सालों में तीसरी, पाँचवीं और आठवीं कक्षाओं में बेंचमार्क असेसमेंट किए हैं। चार साल का विश्लेषण पेश करते हुए, वीपी- एकेडमिक्स अरिजीत घोष ने बताया कि शिक्षकों के सहयोग और छात्रों के अभ्यास से, बेसलाइन और एंडलाइन के बीच प्रदर्शन में सुधार पहले साल के 2.9 फीसदी से बढ़कर तीसरे साल में 6.9 फीसदी हो गया। हालाँकि, चौथे साल में कम भागीदारी के कारण कुल सुधार पर असर पड़ा। ये परिणाम लर्निंग के परिणामों और क्लासरूम में हुए सुधार की पुष्टि करते हैं।

इस कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण था “जागृति” का औपचारिक शुभारंभ, जो सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूलों के छात्र नेताओं की काउन्सिल के लिए एक स्टूडेंट लीडरशिप लैब है। इस पहल का उद्देश्य कम उम्र से ही छात्रों में नेतृत्व के गुण विकसित करना और सभी परिसरों में छात्रों की भागीदारी को मज़बूत बनाना है।

कनक गुप्ता ने कहा, “मज़बूत स्कूल, मज़बूत नेतृत्व से ही बनते हैं। सालाना प्रिंसिपल्स मीट हमारे स्कूल लीडर्स को एक-दूसरे से सीखने, विचारों का आदान-प्रदान करने और पूरे नेटवर्क में छात्रों के लिए लर्निंग के परिणामों को बेहतर बनाने की दिशा में काम करने का मंच प्रदान करता है।”