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संस्कृत को जीवंत बनाए रखने के लिए आधुनिक शोध और तकनीक जरूरी

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ और विश्वेश्वर दयाल माध्यमिक विद्यालय समिति लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में ‘संस्कृत भाषा की आधुनिक प्रासंगिकता और संरक्षण’ विषय पर व्याख्यान गोष्ठी आयोजित की गई। मदरलैंड स्कूल, सर्वोदय नगर में आयोजित गोष्ठी में संस्कृत के प्राचीन वैभव को आधुनिक संदर्भ से जोड़ने पर जोर दिया गया। जिसमें बड़ी संख्या में विद्वान, शिक्षक, छात्र और संस्कृत प्रेमी उपस्थित हुए।

बतौर मुख्य अतिथि मौजूद डॉ. आनंद दीक्षित (विषय विशेषज्ञ वास्तु, ए.के.टी.यू.) ने कहा, संस्कृत भाषा सभी भाषाओं की जननी है। इसमें सभी विज्ञानों के मूल तत्व समाहित हैं। आधुनिक तकनीकी से जोड़कर भाषा के अनुप्रयोगों का अध्ययन ही संस्कृत को जीवंत बनाए रखेगा और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाएगा। उन्होंने संस्कृत को एआई, कम्प्यूटिंग और वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़ने के उदाहरण दिए, जो उपस्थितजनों के बीच उत्साह बढ़ाने वाले सिद्ध हुए।

विशिष्ट वक्ताओं डॉ. आनंद मिश्र और डॉ. मोहित शुक्ल ने भी अपने विचार रखे। डॉ. मिश्र ने संस्कृत ग्रंथों की दार्शनिक गहराई पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. शुक्ल ने भाषा संरक्षण के लिए शैक्षिक नीतियों की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनिल कुमार ने किया। 

अंत में विश्वेश्वर दयाल माध्यमिक विद्यालय समिति के सचिव एच.एन. श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में सुमन लता मिश्रा, बीना श्रीवास्तव, डॉ. सीता देवी, दिनेश कुमार, सुरेश श्रीवास्तव आदि लोग मौजूद रहे।