मुंबई (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। एकीकृत बिजली कंपनी, टाटा पावर ने अपने प्रमुख ‘पे ऑटेंशन’ (Pay Autention) अभियान के तहत ‘विश्व ऑटिज़म जागरूकता दिवस’ के अवसर पर सब को साथ मिलाकर मनाए जाने वाले उत्सव का आयोजन किया। नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विद इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटीज (NIEPID) के सहयोग से चेंबूर के ट्रॉम्बे कम्युनिटी हॉल में आयोजित यह कार्यक्रम दिन भर चला। इसके साथ ही ऑटिज़म जागरूकता और समावेश को बढ़ावा देने के लिए महीने भर चलने वाली राष्ट्रव्यापी पहलों की शुरूआत की गई।
इस कार्यक्रम में न्यूरोडाइवर्स व्यक्तियों, उनकी देखभाल करने वालों, एनजीओ भागीदारों और विशेषज्ञों सहित 300 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम दिखाता है कि टाटा पावर इस समुदाय की मदद के लिए कितनी गंभीर है। साल 2022 से शुरू हुए ‘पे ऑटेंशन’ अभियान ने अब तक देश के 45,000 से भी ज़्यादा परिवारों की ज़िंदगी में बदलाव लाया है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा मददगार सिस्टम बनाना है जो न केवल लोगों को जागरूक करे, बल्कि उन्हें सही इलाज और सलाह भी दिलाए, देखभाल करने वालों की क्षमता बढ़ाए और संस्थागत भागीदारी को मज़बूत करे। इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘ई-सानिध्य’ पोर्टल है। यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जहाँ कोई भी घर बैठे विशेषज्ञों की मदद ले सकता है और मुफ्त में स्क्रीनिंग और परामर्श पा सकता है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय और टाटा एलेक्सी (Tata Elxsi) के सहयोग से विकसित यह प्लेटफॉर्म 14,000 से ज़्यादा लोगों की मदद कर रहा है, ताकि छोटे शहरों और गाँवों में भी ऑटिज़म की पहचान और इलाज समय रहते किए जा सकें।
मदद पाना और भी आसान बनाने के लिए, टाटा पावर एक खास टोल-फ्री ऑटिज़म हेल्पलाइन (1800 2099 488) चलाता है। इसके जरिए माता-पिता, टीचर और देखभाल करने वाले लोगों को विशेषज्ञों से सही समय पर और पेशेवर सलाह मिल सकती है।
ट्रॉम्बे में आयोजित इस कार्यक्रम ने टाटा पावर की इसी प्रतिबद्धता को दर्शाया। इस विशेष रूप से तैयार किए गए कार्यक्रम में न्यूरोडाइवर्स व्यक्तियों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, साथ ही ‘डांस मूवमेंट’ और योग-आधारित उपचारात्मक (therapeutic) सत्र भी आयोजित किए गए। वहां मौजूद ‘सेंसरी रूम’ और ‘एक्सपीरिएंशियल ज़ोन’ में स्टोन पेंटिंग, टेक्टाइल और मंडाला आर्ट, और लेगो-आधारित ‘प्ले थेरेपी’ जैसी गतिविधियाँ शामिल थीं। इन गतिविधियों ने बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने और अभिव्यक्त करने का अवसर दिया, जबकि माता-पिता और डॉक्टरों को भी बच्चों के विकास के नए और बेहतर तरीकों के बारे में जानने का मौका मिला।
इस कार्यक्रम में टाटा पावर के वरिष्ठ नेतृत्व की गरिमामयी उपस्थिति रही। जिनमें हिमल तिवारी (सीएचआरओ और चीफ – सस्टेनेबिलिटी एवं सीएसआर), पंकज कुमार सिंह (चीफ – कम्युनिटी इम्पैक्ट), ममता मलपानी साबू (हेड – बिजनेस एचआर, सीएफएंडआई), डाइवर्सिटी, इक्विटी एंड इंक्लूजन अनुपमा रत्ता (चीफ – ह्यूमन रिसोर्सेस और ईएसएंडए, रिन्यूएबल्स) और फोरम नागोरी (हेड – सीएसआर प्रोग्राम्स, गवर्नेंस और अलायन्सेस) शामिल थे।
उनके साथ क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉ. रवि प्रकाश सिंह (ऑफिसर इन-चार्ज, NIEPID), समीर रावल (मेंटर, टीसीएस डिजिटल इम्पैक्ट स्क्वायर) और कमांडर श्रीरंग बिजुर (प्रेसिडेंट, परिवार AWMH) भी मौजूद थे। टाटा समूह की कंपनियों—टीसीएस, ताजसैट्स (TajSATS) और टाटा क्लासएज (Tata ClassEdge)—के प्रतिनिधियों के साथ-साथ NIEPID के अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
इस अवसर पर हिमल तिवारी ने कहा, “अपने अनुभवों के माध्यम से हमने यह महसूस किया है कि ऑटिज़म से जूझ रहे परिवारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती केवल जागरूकता नहीं, बल्कि संसाधनों तक पहुँच (एक्सेस) है। सही जानकारी तक पहुँच, समय पर निदान (diagnosis), और निरंतर सहायता। इन कमियों को दूर करने के लिए केवल जागरूकता ही काफी नहीं है। इसके लिए हमें एक ऐसा सिस्टम बनाने की ज़रूरत है जो हर किसी के लिए आसान हो, सबको साथ लेकर चले और हमेशा मदद के लिए तैयार रहे। टाटा पावर की ‘पे ऑटेंशन’ पहल इसी दिशा में एक अनोखी कोशिश है। NIEPID जैसे संस्थानों और ‘ई-सानिध्य’ जैसे पोर्टल्स के साथ मिलकर हम शुरूआती जांच, विशेषज्ञों की सलाह और परिवार की मदद जैसी सुविधाओं को उन लोगों तक सीधे पहुँचा रहे हैं, जिन्हें इनकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, हमारा ध्यान तकनीक और साझेदारियों के इस्तेमाल पर है ताकि इस मदद को समाज के हर वर्ग, खासकर उन इलाकों तक पहुँचाया जा सके जहाँ सुविधाओं की कमी है। हमारा लक्ष्य है कि समावेश हर परिवार के लिए एक भरोसेमंद और हर दिन की वास्तविकता बन जाए।”
इस गति को और आगे बढ़ाते हुए, टाटा पावर ने ‘पे ऑटेंशन’ के अगले चरण की घोषणा की है। इसके तहत पहुँच को बेहतर बनाने के लिए ‘ई-सानिध्य’ प्लेटफॉर्म का हिंदी, ओड़िया, तमिल, मराठी और तेलुगु जैसी कई भाषाओं में विस्तार किया जाएगा। साथ ही, कंपनी ‘संडे ब्रिक्स’ (Sunday Bricks) के सहयोग से लेगो फाउंडेशन की ‘सिक्स ब्रिक्स’ (Six Bricks) पद्धति का उपयोग करते हुए अपने खेलों के ज़रिए शिक्षा कार्यक्रम को भी बढ़ाएगी। इसके लिए ‘केयरगिवर मास्टरक्लास’ और ‘ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स’ कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
अपनी जागरूकता कोशिशों के तहत, टाटा पावर ने एकजुटता दिखाने और लोगों को इस मुहिम से जोड़ने के लिए मुंबई के कार्नैक, महालक्ष्मी और बोरीवली स्थित अपने दफ्तरों के साथ-साथ ओडिशा और दिल्ली में अपने प्रमुख स्थानों को नीली रोशनी से रोशन किया—जो ऑटिज़म जागरूकता का एक वैश्विक प्रतीक है।
तमिलनाडु में, कंपनी ने टीएन राइट्स प्रोजेक्ट के तहत विकलांग कल्याण आयुक्तालय के सहयोग से विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से इस दिन को मनाया। चेन्नई में आयोजित इस कार्यक्रम में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों सहित 300 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसमें प्रदर्शनों, कार्यशालाओं और रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया—जिसने जागरूकता, रचनात्मकता और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया।
‘पे ऑटेंशन’ के माध्यम से, टाटा पावर न्यूरोडाइवर्सिटी समुदाय के लिए लंबी अवधि के सहायता तंत्र को मजबूत करने वाले स्केलेबल और सहयोगी मॉडल बनाकर विविधता, समानता और समावेश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को लगातार आगे बढ़ा रहा है।
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