नई दिल्ली : देश में निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति हरीश राणा का मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। एम्स ने जारी एक बयान में कहा कि हरीश राणा ने मंगलवार को शाम 4.10 मिनट पर अंतिम सांसें ली। वे समर्पित चिकित्सकों की टीम की देखरेख में थे और उन्हें ऑन्को-एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष, डॉ. (प्रो.) सीमा मिश्रा के नेतृत्व में पैलिएटिव ऑन्कोलॉजी यूनिट (आईआरसीएच) में भर्ती कराया गया था।एम्स ने हरीश राणा के परिवार और प्रियजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।हरीश राणा का मामला देश में ‘गरिमा के साथ मृत्यु के अधिकार’ (राइट टू डाई विद डिग्निटी) पर एक ऐतिहासिक निर्णय माना गया था। हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को विशेष अनुमति देते हुए उनकी सम्मानपूर्वक मृत्यु के लिए एम्स प्रबंधन को जीवनरक्षक उपचार हटाने (लाइफ सपोर्ट विदड्राल) की इजाजत दी थी।13 साल पहले एक हादसे के बाद कोमा में चले गए थे हरीश32 साल के हरीश राणा 13 साल पहले एक हादसे का शिकार हो गए थे। चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी में बीटेक की पढ़ाई कर रहे हरीश राणा 20 अगस्त 2013 को हॉस्टल की चौथी मंजिल से नीचे गिर गए थे। इसके बाद से हरीश कोमा में चले गए थे। परिवार वालों ने खूब इलाज कराया पर हरीश के स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ। 13 साल से बिस्तर पर ही लाइफ स्पोर्ट सिस्टम के सहारे जिंदा थे।परिवार वालों ने इच्छामृत्यु के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया हरीश के पिता अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट से बेटे के लिए इच्छामृत्यु की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों का पैनल गठित कर रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी थी। 15 मार्च को हरीश राणा को दिल्ली एम्स लाया गया था। अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने धीरे धीरे लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाना शुरू किया। मंगलवार को हरीश को हमेशा के लिए दर्द से राहत मिल गई। पैसिव यूथिनिसियाका देश में यह पहला मामला है।
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