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‘मेड इन पुणे’ से वैश्विक बाजार तक : सीएनएच का अत्याधुनिक विनिर्माण केंद्र


लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। कृषि और निर्माण उपकरण क्षेत्र की वैश्विक अग्रणी कंपनी सीएनएच ने अपने अत्याधुनिक पुणे विनिर्माण संयंत्र में ‘मेड इन पुणे’ उन्नत कृषि मशीनीकरण उत्पादों का प्रदर्शन किया। यह संयंत्र सीएनएच की मजबूत अनुसंधान एवं विकास (R&D), इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षमताओं का केंद्र है। जहां विश्वस्तरीय हार्वेस्टिंग और फसल समाधान उपकरणों का डिजाइन, विकास और निर्माण किया जाता है। यहां बने उत्पाद घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में भी भेजे जाते हैं।

2,80,000 वर्ग मीटर में फैले इस संयंत्र में कंबाइन हार्वेस्टर, गन्ना हार्वेस्टर, स्मॉल स्क्वेयर बेलर, ट्रैक्टर, हेडर, कैब और कृषि उपकरणों का निर्माण होता है। अत्याधुनिक फैब्रिकेशन सुविधाएं, स्वचालित पेंट सिस्टम, सुव्यवस्थित असेंबली लाइन और कड़े परीक्षण मानकों से लैस यह संयंत्र देशभर में विभिन्न फसलों के लिए मशीनीकरण को समर्थन देता है और अपने उत्पादन का एक हिस्सा निर्यात भी करता है।

सीएनएच इंडिया क्षेत्र के प्रेसिडेंट एवं मैनेजिंग डायरेक्टर नरेंद्र मित्तल ने कहा, “सीएनएच का पुणे संयंत्र भारत में हमारे निर्माण कार्य का एक मजबूत आधार है और देश में कृषि मशीनीकरण को आगे बढ़ाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जैसे-जैसे भारत विकसित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, खेती में मशीनीकरण उत्पादकता, दक्षता और स्थिरता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। गन्ना हार्वेस्टर, कंबाइन हार्वेस्टर और बेलर के क्षेत्र में हमारी तकनीकी बढ़त उन मशीनों से दिखाई देती है, जो आधुनिक तकनीक से लैस, ईंधन की बचत करने वाली, भरोसेमंद हैं और खासतौर पर भारतीय मिट्टी व खेती की परिस्थितियों के अनुसार तैयार की गई हैं। हमें गर्व है कि हम ये समाधान भारतीय किसानों के लिए डिजाइन और निर्मित कर रहे हैं।”

वर्ष 2023 में सीएनएच ने इसी संयंत्र से भारत का पहला TREM-V उत्सर्जन मानक अनुरूप गन्ना हार्वेस्टर पेश किया था। भारत में गन्ना हार्वेस्टर और स्मॉल स्क्वेयर बेलर श्रेणी में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 50% से अधिक है, जबकि कैब कंबाइन हार्वेस्टर श्रेणी में वह बाजार की अग्रणी कंपनी है।

उन्नत मशीनरी के साथ-साथ कंपनी जमीनी स्तर पर कौशल और क्षमताओं के विकास पर भी ध्यान दे रही है, जिससे भारतीय कृषि में समग्र चौतरफा बदलाव लाया जा सके। महाराष्ट्र में युवाओं के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण, ड्रोन और डिजिटल तकनीक के उपयोग सहित कृषि विस्तार शिक्षा, सतत गन्ना खेती और फसल अवशेष प्रबंधन कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

पुणे संयंत्र को स्थिरता और सुरक्षा मानकों के लिए भी मान्यता मिली है। इसे आईजीबीसी (इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल) प्रमाणन प्राप्त है, वर्ष 2022 और 2023 में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए औद्योगिक सुरक्षा पुरस्कार मिले हैं, और यह कंपनी के 2030 स्थिरता रोडमैप के अनुरूप ऊर्जा और जल संरक्षण प्रथाओं का पालन करता है। आसपास के गांवों में स्कूल अवसंरचना सहयोग और मोबाइल स्वास्थ्य सेवाएं जैसी सामुदायिक पहल भी चलाई जा रही हैं।

गन्ना कटाई में मशीनीकरण स्तर अभी 5% से कम, अनाज कटाई में 30% से कम और फसल अवशेष प्रबंधन में मात्र 2% है, जिससे भारत में विकास की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। इस परिवर्तन के केंद्र में स्थित पुणे संयंत्र ऐसी मशीनें तैयार कर रहा है, जो किसानों, कृषि उद्यमियों और बायोमास संग्राहकों को अधिक दक्षता के साथ उत्पादकता बढ़ाने में सक्षम बनाती हैं।