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पंजाब की संस्कृति पर आधारित भावपूर्ण पिता–पुत्र की कहानी है “शबद – रीत और रिवाज़”

ज़ी5 ने जारी किया “शबद – रीत और रिवाज़” का ट्रेलर

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। ज़ी5 ने अपनी आने वाली हिंदी ओरिजिनल सीरीज़ “शबद – रीत और रिवाज़” का ट्रेलर जारी किया। यह छह एपिसोड की भावनात्मक ड्रामा सीरीज़ है, जो पिता–पुत्र के रिश्ते की नाज़ुक भावनाओं, पीढ़ियों की अपेक्षाओं और अपनी अलग पहचान बनाने के साहस को दर्शाती है। रस्क मीडिया द्वारा निर्मित और अमीत गुप्ता के निर्देशन में बनी इस सीरीज़ में मिहिर आहूजा और सुविंदर विक्की मुख्य भूमिकाओं में नज़र आएंगे। इस सीरीज़  का प्रीमियर 6 फ़रवरी को, विशेष रूप से हिंदी ज़ी5 पर किया जाएगा।

पंजाब की भावनात्मक पृष्ठभूमि पर आधारित शबद 16 वर्षीय घुप्पी सिंह की कहानी है, जो हकलाने की समस्या के साथ जीता है और ऐसे सपने देखता है जो उसके परिवार की गहरी परंपराओं से बिल्कुल अलग हैं। उसके पिता हरमिंदर सिंह, जो एक सम्मानित रागी गायक हैं और साथ ही कॉरपोरेट दुनिया से भी जुड़े हैं, चाहते हैं कि घुप्पी भक्ति संगीत की इस पवित्र परंपरा को आगे बढ़ाए। लेकिन घुप्पी को अपनी असली आज़ादी और खुद को व्यक्त करने का सच्चा एहसास भजनों में नहीं, बल्कि फुटबॉल के मैदान पर मिलता है।

जैसे-जैसे पीढ़ियों के बीच तनाव बढ़ता है और भावनात्मक दूरियां गहरी होती जाती हैं, शबद विरासत और आकांक्षाओं, परंपरा और व्यक्तिगत पहचान के बीच के टकराव को बेहद संवेदनशीलता से दिखाता है। यह सीरीज़ एक अहम सवाल उठाती है—क्या विरासत हमें जन्म से मिलती है, या हम खुद उसे चुनते हैं? आस्था, डर, प्रेम और महत्वाकांक्षा के इस टकराव में पिता और पुत्र दोनों को अपनी सबसे गहरी कमजोरियों का सामना करना पड़ता है। अंततः वे समझते हैं कि साथ-साथ जीने की राह अधिकार से नहीं, बल्कि सहानुभूति और समझ से निकलती है।

अपने किरदार के बारे में बात करते हुए मिहिर आहूजा ने कहा, घुप्पी उन सबसे संवेदनशील और सच्चे किरदारों में से एक है, जिन्हें मैंने निभाया है। उसका हकलाना सिर्फ बोलने की समस्या नहीं है, बल्कि उन सभी भावनाओं को दिखाता है जिन्हें वह व्यक्त नहीं कर पाता—डर, चाहत, महत्वाकांक्षा और स्वीकार किए जाने की ज़रूरत। शबद हर युवा की ज़िंदगी के उस अहम मोड़ को दिखाता है, जब इंसान एक अच्छा बच्चा बनने और खुद के प्रति सच्चा रहने के बीच उलझ जाता है। मुझे उम्मीद है कि दर्शक घुप्पी के सफ़र में अपनी ख़ामोश लड़ाइयों की झलक ज़रूर देख पाएंगे।”

सुविंदर विक्की ने कहा, हरमिंदर एक ऐसा पिता है, जिनकी सोच विश्वास, अनुशासन और विरासत खो देने के डर से बनी है। वह सच्चे मन से मानता है कि वह अपने बेटे के भले के लिए ही सब कुछ कर रहा है, भले ही कभी-कभी उसका प्रेम दबाव में बदल जाता है। शबद की जो बात मुझे सबसे ज़्यादा छू गई, वह यह है कि यह माता-पिता को खलनायक नहीं बनाता, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे अनकही भावनाएँ और अधूरे सपने हमारे फैसलों को किस तरह प्रभावित करते हैं। यह कहानी बेहद गहरी, भावनात्मक है और कई भारतीय परिवारों की सच्ची तस्वीर पेश करती है।”

निर्देशक अमीत गुप्ता ने कहा, “शबद सुनने की एक कहानी है—बच्चों की, माता-पिता की और उनके बीच मौजूद उस ख़ामोशी की भी। यह दिखाती है कि जब प्रेम अपेक्षाओं से जुड़ जाता है, तो वह दबाव बन सकता है, और कैसे संवेदना उस चीज़ को ठीक कर सकती है जिसे अधिकार ठीक नहीं कर सकता।”

अपने प्रामाणिक पंजाबी परिवेश, भावनात्मक बारीकियों से भरपूर अभिनय और गहराई से छू लेने वाली कहानी के साथ ‘शबद – रीत और रिवाज़’ दर्शकों को एक एक दिल को छू लेने वाला और पूरी तरह खो जाने वाला देखने का अनुभव देने का वादा करती है।