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मप्र के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बढ़ी भारतीय गौर की संख्या, सतपुड़ा से 6 गौरों को सुरक्षित छोड़ा गया

भारतीय गौर पुनर्स्थापना कार्यक्रम से जंगल का संतुलन लौटाने की बड़ी पहलभोपाल/उमरिया : भारतीय गौर पुनर्स्थापना और ट्रांसलोकेशन योजना के तहत रविवार को मध्य प्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से एक नर और पांच मादा गौर को लाकर प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सफलतापूर्वक खुले जंगल में छोड़ा गया। हाथी के बाद सबसे शक्तिशाली माने जाने वाले इस वन्यजीव की वापसी से क्षेत्र की जैव विविधता को मजबूती मिली है।बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डाक्टर अनुपम सहाय ने बताया कि भारतीय गौर की आबादी में आनुवंशिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से यह गौर पुनर्स्थापना कार्यक्रम भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्‍ल्‍यूआईआई) और मध्य प्रदेश वन विभाग के संयुक्त प्रयास से संचालित किया जा रहा है। यह परियोजना वैज्ञानिक निगरानी और योजनाबद्ध तरीके से लागू की जा रही है, ताकि गौर की स्थायी और स्वस्थ आबादी विकसित की जा सके।उन्‍होंने बताया कि इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के दूसरे चरण के तहत रविवार को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से 01 नर एवं 05 मादा भारतीय गौर को सुरक्षित रूप से लाकर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया है। यह कार्यक्रम 23 जनवरी से प्रारंभ हुआ था और अब तक इसके अंतर्गत कुल 19 भारतीय गौर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लाकर बांधवगढ़ में सफलतापूर्वक पुनर्स्थापित किए जा चुके हैं। आगामी दो से तीन दिनों में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से 8 और गौर बांधवगढ़ लाए जाने की योजना है। उन्‍होंने बताया कि इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के पहले चरण में फरवरी 2025 के दौरान 22 भारतीय गौरों को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सफलतापूर्वक बसाया जा चुका है। वहीं, दूसरे चरण के तहत सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से कुल 27 गौरों को बांधवगढ़ लाने की योजना प्रस्तावित है।गौरों के सुरक्षित परिवहन और निगरानी के लिए कुल 9 विशेष ट्रांसपोर्ट टीमें गठित की गई हैं। प्रत्येक दल का नेतृत्व उप वनमंडल अधिकारी या वन क्षेत्रपाल कर रहे हैं। हर टीम में एक विशेष गौर परिवहन वाहन, दो वन्यप्राणी चिकित्सक, वनपाल और वनरक्षक सहित लगभग 10 सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा, ऑपरेशन को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए प्रत्येक दल के साथ चार सहायक वाहन भी लगाए गए हैं। इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य गौरों को बिना किसी तनाव या जोखिम के उनके नए आवास तक सुरक्षित पहुंचाना है।गौरतलब है कि भारतीय गौर, हाथी के बाद बांधवगढ़ क्षेत्र का सबसे बड़ा शाकाहारी वन्यजीव माना जाता है। जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह कठोर और ऊँची घास को चरता है, जिसे हिरण, चीतल और अन्य छोटे शाकाहारी प्राणी आमतौर पर नहीं खाते। इससे वन क्षेत्र में प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। 1990 के दशक तक बांधवगढ़ के गौर भोजन और मौसमी जरूरतों के लिए अमरकंटक के जंगलों तक आवागमन किया करते थे। लेकिन समय के साथ बांधवगढ़ और अमरकंटक के बीच के प्राकृतिक कॉरिडोर में सड़कें, रेलवे ट्रैक, बिजली लाइनें और अन्य मानवीय गतिविधियां बढ़ने से यह मौसमी प्रवास बाधित हो गया। नतीजतन, वर्ष 1998 तक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से भारतीय गौर पूरी तरह विलुप्त हो गए। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मध्य प्रदेश वन विभाग एवं वन्यजीव संस्थान, भारत के संयुक्त तत्वावधान में वर्ष 2010-11 से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गौर पुनर्स्थापना कार्यक्रम की शुरुआत की गई।