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निक ने रिपब्लिक डे पर बच्चों को दिया अपना ‘किड्स्टिट्यूशन’ पेश करने का मौका

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। गणतंत्र दिवस के मौके पर निक ने बच्चों और उनके परिवारों को एक खास मंच दिया, जहां बच्चों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपनी खुद की ‘किड्स्टिट्यूशन’ पेश की। इस अनोखी पहल के ज़रिए बच्चों ने भारत को और खुशहाल व दयालु बनाने के लिए अपने विचार खुलकर सामने रखे। 

चीकू और बंटी के साथ, उत्साह से भरे बच्चों ने मज़ेदार लेकिन अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी। थाली में लौकी से छुट्टी की मांग से लेकर खेलने के लिए ज्यादा जगह, पढ़ाई का कम दबाव, माता-पिता के साथ ज्यादा समय और सभी जीवों के प्रति दया—ये सब बच्चों की ‘किड्स्टिट्यूशन’ का हिस्सा रहे। बच्चों की यह प्रस्तुति महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल के चेयरमैन एडवोकेट हर्षद वी. निम्बालकर सहित वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखी गई। 

इस दौरान एडवोकेट डॉ. उदय वरुणजीकर (वाइस चेयरमैन, बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्रस एंड गोवा, बीसीएमजी), एडवोकेट सुदीप पासबोला (सदस्य और पूर्व चेयरमैन, बीसीएमजी), एडवोकेट विठ्ठल कोंडे देशमुख (सदस्य एवं पूर्व चेयरमैन-बीसीएमजी) और शरद बागुल (सेक्रेटरी बीसीएमजी) मौजूद रहे। यह गणतंत्र दिवस बच्चों की आवाज़ को समर्पित रहा, जहां निक के साथ बच्चों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ मंच संभाला। 

महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल के चेयरमैन एडवोकेट हर्षद वसंतराव निंबालकर ने कहा, “‘द किडस्टिट्यूशन’ एक बेहद अनोखी पहल है। यह देखकर खुशी होती है कि बच्चे, भारत के संविधान में रुचि दिखा रहे हैं। बच्चों द्वारा रखी गई बातें भी उतनी ही दिलचस्प और ज़रूरी हैं—जैसे अपनी बात रखने की आज़ादी, लौकी से न्याय, होमवर्क में लचीलापन, खेलने के लिए ज़्यादा जगह, पढ़ाई का दबाव कम करना और सभी के प्रति दयालु होना। इसमें यह बात भी सामने आई कि बच्चों को अपने माता-पिता के साथ ज़्यादा समय मिलना चाहिए, जो आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है। बच्चों की सही परवरिश के लिए परिवार के साथ समय बिताना बेहद जरूरी है। यह पहल वाकई सराहनीय है।”