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जल स्रोतों की दशा सुधारने की दिशा में उठाए जाएंगे ठोस कदम

गोमती के संरक्षण के लिए लखनऊ कनेक्शन-वर्ल्डवाइड परिवार के बढ़ते कदम

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। लखनऊ कनेक्शन-वर्ल्डवाइड (LCWW) परिवार ने गोमती नदी के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सशक्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन किया। यह कार्यक्रम लखनऊ से 150 किमी दूर स्थित धोबिया आश्रम में आयोजित किया गया। जहां गोमती नदी को रिचार्ज करने वाले जलस्रोतों पर विचार-विमर्श किया गया।

इस अवसर पर LCWW के संस्थापक सुनील मिश्र, वरिष्ठ एडमिन अनिल शुक्ला तथा समूह के अन्य सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल उपस्थित रहा। कार्यक्रम में सुशील सीतापुरी (गोमती नदी के संरक्षण को समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता), डॉ. मीनू खरे (पूर्व कार्यक्रम निदेशक, आकाशवाणी लखनऊ), पवन कुमार जैन (पंजाब एण्ड सिंध बैंक से वरिष्ठ प्रबंधक पद से सेवानिवृत्त) व आर जे शोभित गुप्ता (फाउंडर मेंबर, रेडियो जॉकी क्लब) भी मौजूद थे।

गोष्ठी में धोबिया आश्रम और गोमती नदी के जल स्रोतों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि धोबिया के जल स्रोत गोमती को सालभर जलापूर्ति करने वाले सबसे बड़े स्रोत हैं।

धोबिया आश्रम का प्रतिनिधित्व कर रहे अरुण कपूर ने LCWW के वरिष्ठ सदस्यों के दौरे पर प्रसन्नता व्यक्त की और आशा जताई कि अब इन जल स्रोतों की दशा सुधारने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। डॉ. मीनू खरे ने गोमती की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए धोबिया आश्रम और विशेष रूप से सुशील सीतापुरी के प्रयासों की सराहना की और इसके संरक्षण के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। 

LCWW के फाउंडर सुनील मिश्र ने गोमती की संपूर्ण यात्रा को वीडियो मैपिंग के माध्यम से डॉक्यूमेंट करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे नदी के संरक्षण की दिशा में प्रभावी कार्ययोजना बनाई जा सके। वरिष्ठ एडमिन अनिल शुक्ला ने लखनऊ कनेक्शन-वर्ल्डवाइड की इस पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए समूह की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

समाजसेवी एवं सुप्रसिद्ध लेखक नागेन्द्र बहादुर सिंह ने कहा कि गोमती के उद्गम से लखनऊ तक नदी के किनारे बसे लोगों को नदी के संरक्षण के लिए जागरूक किया जाए। उन्होने एक प्रतिनिधिमंडल सरकार के पास भी ले चलने के लिए कहा। गोष्ठी के दौरान सभी सदस्यों ने धोबिया आश्रम के जल स्रोतों का दौरा कर उनकी स्थिति का जायजा लिया।

कार्यक्रम के अंत में गोमती नदी और जल संरक्षण को समर्पित मंगल गीतों और भावुक संगीतमय प्रस्तुतियों के माध्यम से जागरूकता का संदेश दिया गया।