लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। आंचलिक विज्ञान नगरी में विज्ञान संचार को एक नया आयाम प्रदान करते हुए उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने अत्याधुनिक 10-डी थिएटर का उद्घाटन किया। यह नई सुविधा विद्यार्थियों, परिवारों एवं आम जनता के लिए विज्ञान शिक्षा को अधिक रोचक, संवादात्मक और अनुभवात्मक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उद्घाटन समारोह में डॉ. नीरज बोरा (विधायक, लखनऊ उत्तर), डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी (निदेशक, CSIR-CIMAP), विजय शंकर शर्मा (निदेशक, राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली), शतादल घोष (केंद्र प्रमुख, आंचलिक विज्ञान नगरी, लखनऊ), लखनऊ नगर निगम के पूर्व उप सभापति प्रदीप शुक्ला सहित विद्यार्थी एवं शिक्षक उपस्थित रहे।

रजनी तिवारी ने कहा कि 10-डी थिएटर जैसी आधुनिक तकनीकें विद्यार्थियों में जिज्ञासा, रचनात्मकता और नवाचार की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। यह सुविधा बच्चों को विज्ञान की अवधारणाओं को रोचक एवं अनुभवात्मक तरीके से समझने का अवसर प्रदान करेगी तथा उन्हें प्रश्न पूछने और अपने आसपास घटित होने वाली घटनाओं के पीछे छिपे वैज्ञानिक सिद्धांतों को जानने के लिए प्रेरित करेगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो विद्यार्थियों को अपने मूल्यों, प्रौद्योगिकी और नवाचार से जोड़े तथा उनमें जिज्ञासा एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करे। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की शिक्षा युवाओं को सशक्त बनाने और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

नवस्थापित सुविधा की सराहना करते हुए मंत्री ने Journey to the Center of the Earth फिल्म देखने के अपने अनुभव को प्रभावशाली बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे ओर युवा को इस तरह के अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि “यह कैसे हुआ?”, “ऐसा क्यों हुआ?” और “इसे कैसे किया जा सकता है?” जैसे प्रश्न ही वैज्ञानिक सोच की आधारशिला है और प्रगति को गति प्रदान करते हैं।
उन्होंने 10-डी थिएटर प्रणाली के डिजाइन एवं विकास में राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली तथा आंचलिक विज्ञान नगरी, लखनऊ की तकनीकी टीमों के संयुक्त प्रयासों की सराहना की। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के संदर्भ में इस उपलब्धि के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने परियोजना से जुड़े सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डिजाइनरों एवं तकनीशियनों को बधाई दी। उन्होंने विज्ञान को अधिक रोचक, अनुभवात्मक ओर विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने हेतु आंचलिक विज्ञान नगरी के प्रयासों की सराहना की।

विधायक डॉ. नीरज बोरा ने विज्ञान को विद्यार्थियों के लिए सुलभ, रोचक और आकर्षक बनाने की दिशा में आंचलिक विज्ञान नगरी के निरंतर प्रयासों की सराहना की। 10-डी थिएटर में Journey to the Center of the Earth फिल्म देखने के अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने इसके प्रभावशाली दृश्यों, गति के अनुरूप संचालित सीटों तथा विभिन्न संवेदी प्रभावों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ये विशेषताएँ पृथ्वी के आंतरिक भाग की रोमांचक यात्रा का अनुभव कराती हैं और दर्शकों को ऐसी वैज्ञानिक अवधारणाओं से परिचित कराती हैं, जिनकी वे सामान्यतः कल्पना भी नहीं कर पाते।
डॉ. नीरज बोरा ने कहा कि विज्ञान केंद्रों की संवादात्मक एवं अनुभवात्मक सुविधाएँ विद्यार्थियों में जिज्ञासा विकसित करने, रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों को विज्ञान केंद्रों एवं अनुसंधान संस्थानों के शैक्षिक भ्रमण पर ले जाएँ, ताकि उन्हें कक्षा में अर्जित सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ने का अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि विज्ञान को सरल, रोचक और मनोरंजक ढंग से प्रस्तुत करने से विद्यार्थियों की सीखने में रुचि बढ़ती है तथा वे विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में नए विचारों को तलाशने के लिए प्रेरित होते हैं।

उन्होंने इस अभिनव सुविधा के विकास के लिए आंचलिक विज्ञान नगरी की पूरी टीम को बधाई दी और कहा कि 10-डी थिएटर लखनऊ में अनुभवात्मक विज्ञान शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध कराएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नई सुविधा शहर में विज्ञान शिक्षा को और सशक्त बनाएगी तथा अधिकाधिक विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं परिवारों को विज्ञान के विविध आयामों को जानने और समझने के लिए आंचलिक विज्ञान नगरी आने हेतु प्रेरित करेगी।
डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने अभिनव सुविधाओं, संवादात्मक प्रदर्शों और अनुभवात्मक शिक्षण के माध्यम से विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा देने में आंचलिक विज्ञान नगरी के निरंतर योगदान की सराहना की। उन्होंने वैज्ञानिक जिज्ञासा को प्रोत्साहित करने तथा विद्यार्थियों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रति रुचि विकसित करने के लिए विज्ञान केंद्रों, विद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. त्रिवेदी ने विद्यार्थियों को सीएसआईआर एवं आईसीएआर के अनुसंधान संस्थानों तथा चिकित्सा महाविद्यालयों का भ्रमण करने के लिए प्रोत्साहित किया। ताकि वे वहाँ चल रहे वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी प्रगति और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों की प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अनुभव विद्यार्थियों के दृष्टिकोण को व्यापक बनाते हैं, उनमें जिज्ञासा उत्पन्न करते हैं तथा लखनऊ के वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों को समझने में सहायता करते हैं। उन्होंने विज्ञान को आम जनमानस के करीब लाने और बच्चों एवं युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए आंचलिक विज्ञान नगरी के प्रयासों की सराहना की।
विजय शंकर शर्मा (निदेशक, राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली) ने विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा और खोज की भावना विकसित करने में 10-डी थिएटर की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पृथ्वी की आंतरिक संरचना, भूमिगत तापमान और भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं से जुड़े प्रश्न विद्यार्थियों को वैज्ञानिक तथ्यों एवं सिद्धांतों की खोज करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि विज्ञान केंद्र पारंपरिक शिक्षा के पूरक के रूप में कार्य करते हैं तथा रटकर सीखने के स्थान पर वैज्ञानिक अवधारणाओं को रोचक, व्यावहारिक और दैनिक जीवन से संबंधित बनाते हैं।

नवनिर्मित 10-डी थिएटर में 3डी दृश्य, गति के अनुरूप संचालित सीटें, सराउंड साउंड तथा हवा, पानी की बौछार, गर्मी और कोहरे जैसे बहुसंवेदी प्रभावों के माध्यम से एक अनूठा सिनेगाई अनुभव प्रदान किया जाता है। इन सभी प्रभावों के समन्वय से पर्दे पर दिखाई देने वाली घटनाएँ अधिक जीवंत प्रतीत होती हैं और दर्शक दृश्य, ध्वनि तथा शारीरिक संवेदनाओं के माध्यम से फिल्म के अनुभव से जुड़ पाते हैं।
इस थिएटर में प्रदर्शित फिल्म Journey to the Center of the Earth दर्शकों को पृथ्वी की गहराइयों की एक रोमांचक यात्रा पर ले जाती है। इसके माध्यम से भूमिगत भू-दृश्यों, भूवैज्ञानिक संरचनाओं और पृथ्वी के आंतरिक भाग से जुड़े रहस्यों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया जाता है। मनोरंजन के साथ शैक्षिक सामग्री का समन्वय इस सुविधा को वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल, यादगार और आनंददायक तरीके से समड़ाने का प्रभावी माध्यम बनाता है। विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए यह सुविधा कक्षा में अर्जित ज्ञान को अनुभवात्मक गतिविधियों से जोड़ने तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रति रुचि विकसित करने में सहायक होगी।

इस सुविधा का विकास विज्ञान के प्रति जनसामान्य की रुचि बढ़ाने के लिए आंचलिक विज्ञान नगरी की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, यह आधुनिक विज्ञान संचार के अनुभव विकसित करने में तकनीकी प्रगति और संस्थागत सहयोग के महत्व को रेखांकित करता है तथा मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की व्यापक परिकल्पना के अनुरूप है।
कार्यक्रम के अंत में शतादल घोष (केंद्र प्रमुख, आंचलिक विज्ञान नगरी, लखनऊ) ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, सहभागी संस्थानों, तकनीकी टीमों तथा इस सुविधा के सफल उद्घाटन में योगदान देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस नई सुविधा को साकार करने में राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली और आंचलिक विज्ञान नगरी, लखनऊ की तकनीकी टीमों के संयुक्त प्रयासों की भी सराहना की।
इस पहल के माध्यम से आंचलिक विज्ञान नगरी ने औपचारिक शिक्षा और व्यावहारिक समझ के बीच की दूरी को कम करने की अपनी भूमिका को और सुदृढ़ किया है। यह सुविधा विद्यार्थियों एवं अन्य आगंतुकों को प्रश्न पूछने, अन्वेषण करने और विज्ञान के रहस्यों को समझने के लिए प्रेरित करेगी। साथ ही, यह आधुनिक तकनीकों के माध्यम से वैज्ञानिक जागरूकता एवं अनुभवात्मक शिक्षण को बढ़ावा देने के प्रति आंचलिक विज्ञान नगरी की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करती है।
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